दिल्ली पुलिस की पहल 'युवा' से झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को मिली नई राह | Delhi Police initiative yuva is making lifes of slum area youngsters

दिल्ली पुलिस की पहल 'युवा' से झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को मिली नई राह

दिल्ली के 3000 हज़ार लड़के लड़कियां ऐसे है जिन्हें दिल्ली पुलिस के आठ थानों में 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' के तहत ट्रेनिंग मिली है. 250 प्रशिक्षित लड़के लड़कियों को बर्गर किंग, हीरो मोटोकॉर्प, वोडाफोन, सीसीडी, फोर्टिस अस्पताल और कई बड़े होटलों में नौकरी मिल चुकी है

By: | Updated: 11 Jan 2018 07:47 PM
Delhi Police initiative yuva is making lifes of slum area youngsters

नई दिल्लीः दिल्ली की चूना भट्टी में रहने वाली रंजना की शादी महज 15 साल की उम्र में हो गयी थी. खेलने पढ़ने की उम्र में ही रंजना दो दो बेटियों मां बन गयी. जिस आदमी से शादी हुई थी वो हत्या के आरोप में जेल चला गया. छोटी सी उम्र में बच्चों और खुद को संभालने के लिए रंजना घरों में बर्तन मांजने लगी, लेकिन पढ़-लिख नही सकी. रंजना को 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' के तहत दिल्ली के पुलिस स्टेशन में चल रही युवा योजना के बारे में पता चला. वहां दाखिला लेकर रंजना ने 'फ्रंट ऑफिस' सहायक की ट्रेनिंग ली. इसके बाद उसका प्लेसमेंट प्राइवेट पैथ लैब में हुआ जहां उसे 11,500 प्रति महीने सैलरी मिल रही है.


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रंजना दिल्ली के उन 3000 हज़ार लड़के लड़कियों में से है जिन्हें दिल्ली पुलिस के आठ थानों में 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' के तहत ट्रेनिंग मिली है. अब तक 250 से ज्यादा लड़के लड़कियों को प्लेसमेंट मिल चुका है. ये वो बच्चे हैं जो गरीबी, छोटे मोटे अपराध और नशे की वजह से पढ़ नही पाए.


इसी तरह 20 साल का राहुल (बदला हुआ नाम) छोटी मोटी चोरियों को अंजाम देता रहता था. जब कीर्ति नगर थाने में 'युवा' के तहत ट्रेनिंग दी ही जा रही थी तब एक पार्क में जुआ खेलने के जुर्म में उसे कस्टडी में लाया गया. ट्रेनिंग के लिए हामी भरने के बाद उसने कंप्यूटर हार्डवेयर का कोर्स चुना. होनहार होने की वजह से उसे ट्रेनिंग के बाद एक प्राइवेट पैथलैब में असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी मिल गयी.


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लेकिन राहुल और रंजना जैसे हालात सिर्फ इनके नहीं हैं. देश की राजधानी दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में लाखों की जनसंख्या रहती है. लेकिन जागरूकता के अभाव में लड़कियों की कम उम्र में शादी, आपराधिक प्रवृत्ति का बढ़ जाना, ड्रग्स की लत लग जाना और गरीबी की अभाव में स्कूल छोड़ देना आम बात है. घर के हालात के चलते कुछ बालमजदूर बन जाते हैं तो झुग्गी-झोपड़ी कॉलोनियों में माहौल में नशे के आदी या अपराधी बन जाते हैं.


ऐसे बच्चों को सामाजिक शिक्षा और व्यावसायिक ट्रेनिंग के जरिये समाज की मुख्य धारा में लाने का प्रयास शुरू हो चुका है. दिल्ली पुलिस ने इस प्रयास को 'युवा' नाम दिया है जिसके पहले चरण में 8 थानों को ट्रेनिंग के लिए चुना गया है. ये 8 थाने हैं- शाहदरा, रोहिणी, कीर्ति नगर, लाजपत नगर, जामा मस्जिद, अशोक नगर, आनंद पर्बत, उस्मानपुर. ट्रेनिंग के लिए 16 से 25 साल के बीच के लड़के लड़कियों को फ्रंट ऑफिस, डाटा एंट्री ऑपरेटर, मेक अप आर्टिस्ट, तकनीशियन बनने जैसी 45 तरह की ट्रेनिंग मिल रही है. इसके अलावा पर्सनालिटी डेवलपमेंट और स्पीकिंग इंग्लिश की विशेष क्लास चलती हैं.


250 प्रशिक्षित लड़के लड़कियों को बर्गर किंग, हीरो मोटोकॉर्प, वोडाफोन, सीसीडी, फोर्टिस अस्पताल और कई बड़े होटलों में नौकरी मिल चुकी है.

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