Delhi smog: What Is Behind Delhi-ncr’s Soaring Air Pollution? जानें- सदिल्ली समेत पूरा NCR क्यों बन रहा है गैस चैम्बर, कौन है जिम्मेदार?

जानें- दिल्ली समेत पूरा NCR क्यों बन रहा है गैस चैम्बर, कौन है जिम्मेदार?

प्रदुषण रोकने के लिए ना तो अलग-अलग अदालतों के आदेश काम आ रहे हैं, ना ही सरकार के उठाए वह कदम, जिनका सरकार बार-बार कोर्ट में सुनवाई के दौरान हवाला देती है.

By: | Updated: 09 Nov 2017 08:50 AM
Delhi smog: What Is Behind Delhi-ncr’s Soaring Air Pollution?

नई दिल्ली: दिल्ली और एनसीआर में जहरीली धुंध के चलते मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं. सवाल यही है कि आख़िर हर साल इसी मौसम में दिल्ली और एनसीआर गैस चैंबर क्यों बन जाता है? वैसे तो इस हालात के लिए दिल्ली और एनसीआर के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है, लेकिन सिर्फ इसी मौसम में इस तरीके के हालात क्यों बनते हैं यह जानना बेहद जरूरी है.


यमुना एक्सप्रेस वे पर कोहरे के चलते टकराईं दर्जन भर गाड़ियां, करीब 20 लोग घायल


विशेषज्ञ दिल्ली और एनसीआर के इस हालात के लिए पड़ोसी राज्यों में फसल कटने के बाद पराली जलाने को सबसे ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक और हाईकोर्ट से लेकर एनजीटी तक सुनवाई हो चुकी है.


क्या होती है पराली?


दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के किसान फसल काटने के बाद उसके अवशेष जलाते हैं, जिसको पराली कहा जाता है और इस पराली को जलाने की वजह से आसपास के राज्यों में उठने वाला धुआं दिल्ली के ऊपर इकट्ठा हो जाता है.


एक सांस में 22 सिगरेट बराबर धुआं पी रहे हैं दिल्लीवासी, जानें अपने इलाके का हाल


क्या होता है स्मॉग?


दिल्ली में जहां पहले से ही प्रदूषण है, वहां यह धुआं मिल जाता है और उसके बाद जैसे ही मौसम में नमी आती है, यह धुंध का रुप ले लेता है. इसको अंग्रेजी में स्मॉग कहते हैं. स्मॉग का मतलब स्मोक और फॉग का मिश्रण है. यही स्मॉग इन दिनों दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है.


पराली जलाने से रोकने के लिए एनजीटी ने दिया था आदेश


सवाल उठता है कि क्या वाकई में आज भी किसान फसल अवशेष यानी पराली जलाते हैं, क्योंकि पिछले साल जब दिवाली के बाद दिल्ली में गैस चैम्बर जैसे हालात बने थे तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली के पड़ोसी राज्यों को निर्देश दिया था कि वह अपने यहां पराली जलाने पर रोक लगाएं और किसानों को ऐसी मशीन दें जिसके जरिए पराली को खेतों से हटाया जा सके और उसको जलाना ना पड़े.


punjab-paddy-burning_650x400_61476789578-580x395


लेकिन जब हरियाणा में पानीपत जिले के कुछ किसानों से पूछा कि आखिर वह इस पराली को क्यों जलाते हैं? तो उन्होंने कहा कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. अगर वह इस पराली को खत्म करने के लिए मेहनत करते हैं तो उस पर काफी खर्च आएगा और उनकी लागत काफी बढ़ जाएगी. इतना ही नहीं किसानों ने कहा कि यह मौसम गेहूं की फसल बोने का है और अगर इस पराली को जल्द से जल्द नहीं जलाया जाता या खत्म किया जाता तो फिर अगली फसल बोने के लिए समय नहीं बचता. लिहाज़ा इसको जलाने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है. पराली को जलाना ही सबसे आसान विकल्प है.


प्रशासन ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया- किसान


क्या सरकार की तरफ से इस पराली को ठिकाने लगाने के लिए कोई मदद नहीं मिली? इस सवाल पर किसानों ने कहा, ‘’प्रशासन ने कुछ महीनों पहले एक लिस्ट मांगी थी, वह लिस्ट तो उनको तभी दे दी गई थी, लेकिन उसके बाद मशीन आने की जो बात कही गई थी, वह आजतक नहीं आई. अगर वह मशीन आ जाती तो उससे इस पराली को आसानी से हटाया जा सकता था, लेकिन मशीन के दर्शन नहीं हुए.’’


शिकायत दर्द ना हो, इसलिए शाम में जलाते हैं पराली


किसान पराली को दिन में ना जला कर देर शाम या रात के अंधेरे में आग लगाते हैं, जिससे इनके खिलाफ मामला भी ना दर्ज़ हो और पराली भी जल जाए. हालांकि किसानों ने कहा कि दिक्कत तो होती है और हम भी चाहते हैं कि पराली ना जलाएं, लेकिन और कोई विकल्प मौजूद नहीं है.


दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में जो जहरीली धुंध के हालात बने हैं और उसकी एक बड़ी वजह जानकार जिस पराली के जलाने को मान रहे हैं, वह पराली तो आज भी उसी तरह से जल रही है. ना अलग-अलग अदालतों के आदेश काम आ रहे हैं ना ही सरकार के उठाए वह कदम, जिनका सरकार बार-बार कोर्ट में सुनवाई के दौरान हवाला देती है.

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title: Delhi smog: What Is Behind Delhi-ncr’s Soaring Air Pollution?
Read all latest India News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें