दिल्ली विश्वविद्यालय में पेटेंट के पंजीकरण पर जल्द ही होगी नीति

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 8:57 AM

नई दिल्ली: किस तरह के शोध का पेटेंट कराया जा सकता है ? इसमें किस तरह के कानूनी मसले जुड़े हुए हैं ? अगर छात्र विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करते हुए शोध करते है तो जो नतीजे आते हैं क्या वह छात्रों की बौद्धिक संपदा है.

 

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों और अध्यापकों को इन सभी सवालों का जवाब जल्द ही मिलेगा क्योंकि विश्वविद्यालय अपने छात्रों और अध्यापकों द्वारा पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी) नीति को आकार देने की प्रक्रिया में है.

 

शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकर्ताओं को कानूनी तंत्र से उनके बौद्धिक संपदा अधिकार और उसके वाणिज्यिक पहलुओं का प्रबंध करने में मदद करने के लिए डीयू के बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ की स्थापना 2008 में हुयी थी. शुरूआत में प्रकोष्ठ का नेतृत्व डीन ऑफ रिसर्च करते थे. इस साल मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने डीयू में आईपीआर पीठ का गठन किया.

 

एमएचआरडी आईपीआर चेयर प्रोफेसर :तकनीकी: रेखा चतुर्वेदी ने बताया, ‘‘छात्रों और शोधकर्ताओं को जानने की जरूरत होती है कि जब वे शोध करते हैं तो क्या सब पेटेंट योग्य है. समुचित नीति के अभाव में अध्ययनकर्ता कई चीजों से अनभिज्ञ होते हैं और कानूनी तथा वाणिज्यिक मुद्दों से निपटने में कठिनाई आती है.’’

 

नीति के तहत छात्रों, अध्यापकों, विजिटिंग प्रोफेसर के आईपी राइट, पेटेंट या ट्रेडमार्क के मालिकाना पैटर्न पर विचार होगा. इसमें कॉपीराइट नीति, लाइसेंसिंग नीति, पेटेंट फंड, पेमेंट ढांचे का विभाजन, डिजीटल क्षेत्र में आईपीआर मुद्दा, पेटेंट योग्य आकलन, खोज खुलासा और प्लेगरिज्म :साहित्यिक चोरी: समेत अन्य विषय रहेंगे.

 

चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘पेटेंट पंजीकरण में समय लगता है और यह खर्चीला प्रक्रिया है और ऐसा नहीं है कि पेटेंट पंजीकरण के बाद काम खत्म हो जाता है. पेटेंट बनाये रखने और इसका वाणिज्यिकरण एक थकाउ प्रक्रिया है.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, हमने एक नीति तैयार करने का फैसला किया जो इस तरह के विभिन्न पहलुओं से निपटे. प्रक्रिया पर स्पष्टता इसमें शामिल है. शोधकर्ताओं को अधिकार और छात्रों व अध्यापकों को रचनात्मक शोध के लिए बढ़ावा मिलेगा और इसका पेटेंट होगा.’’ डीयू ने पिछले महीने ‘बौद्धिक संपदा संरक्षण और लाइसेंसिंग’ और ‘इंडस्ट्री भागीदारी के साथ सहयोगपूर्ण शोध’ के लिए दिशा-निर्देश तय किया था.

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