अब दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में दूर होगी सीवर की समस्या

By: | Last Updated: Friday, 17 July 2015 5:25 PM
Delhi_

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली मे पानी बिजली तो दूर झुग्गी झोपड़ी में रह रहे लोग सीवर तक की सुविधाओं से वंचित हैं जिसके चलते लोगों को खुले में शौच करना पड़ता है और इससे अनेकों बीमारियाँ उन्हें घेरे रहती हैं. इसी समस्या को दूर करने की पहल करते हुए दिल्ली सरकार ने दिल्ली के आया नगर की अवैध कॉलोनियों में एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत करने की बात की है जो यहाँ सीवर की समस्या को दूर कर देगा.

 

दिल्ली सरकार ने दिल्ली डॉयलॉग कमिशन और दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड यानि ड्यूसिब की सलाह पर इस प्रोजेक्ट को सहमती दी है. इस प्रोजेक्ट में आया नगर में रह रहे लोगों के सीवर सिस्टम को बायो digester टेक्नोलॉजी की मदद से तंदरुस्त कर दिया जाएगा.

 

दिल्ली डायलाग कमिशन के उपाध्यक्ष आशीष खेतान ने इस प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया की फिलहाल आधी दिल्ली में ट्रंक सीवर है, यहाँ मेन लाइन सीवर नहीं है. करीब 2200 से 2300 कॉलोनी ऐसी हैं जहाँ पर सीवर बिलकुल नहीं है और 1000 से ऊपर में पार्शियल सीवर है. आशीष खेतान के मुताबिक डीडीसी ने इस पर काम किया और एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया और सरकार को भेजा और इसपर मुख्यमंत्री की सहमति मिल गयी है.

 

दिल्ली सरकार के मुताबिक़ फिलहाल दिल्ली में सीवर की ताज़ा स्थिति कुछ इस प्रकार है-

– 50% जनसंख्या सीवर सिस्टम से वंचित

– 2200 कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन नहीं

– 1600 कालोनियों में पार्शियल सीवर

– इसके चलते खुले में सौंच को मजबूर लोग

– सेप्टिक टैंक का गलत निर्माण और रखरखाव.

– सरकार का मानना है कि पब्लिक शौचालयों की और जरुरत है.

– सिवेज सिस्टम की हालत खस्ता है.

 

इस प्रोजेक्ट के लिए आया नगर में 3 सड़कों को चुना गया है. वहां पहली सड़क ऐसी है जहाँ लोगो के घरों में सेप्टिक टैंक तो है लेकिन रसोईं का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं है.

 

दूसरी सड़क ऐसी है जहाँ सेप्टिक टैंक भी है और किचन के अलावा बाकी गंदा पानी निकालने के लए लोगो ने खुद पाईप लाइन बिछाई हैं. तीसरी सड़क वो है जहाँ सेप्टिक टैंक भी है और पाइप लाइन भी लेकिन सब चोक है.

 

आयानगर में डीडीसी और ड्यूसिब ने मिलकर विस्तार से एक एक घर का सर्वे किया और हर घर के अलग हल निकाला. यहाँ के घरों में मौजूदा सेप्टिक को बायो digester टेक्नोलॉजी की मदद से बायो digester टॉयलेट में तब्दील किया जायेगा और यहाँ काले या गंदे पानी को भी इसी तकनीक के इस्तेमाल से साफ़ कर के नाली के ज़रिये एक अंत तक ले जाया जाएगा.

 

इस इलाके में 75 मकान चुने गए हैं जहाँ बायो टॉयलेट बनेंगे. आशीष खेतन के मुताबिक यह अपने तरह का पहला ऐसा पोजेक्ट है और इसकी लागत आम सीवर लाइन के खर्च से काफी कम होगा. दिल्ली सरकार के इस प्रोजेक्ट की सफलता या असफलता यह तय करेगी की झुग्गी झोपडी  रेहने वाले लोगों को सीवर लाइन की सुविधा कब और कैसे मिलेगी.

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