दिल्ली में होंगे चुनाव, सभी पार्टियों ने विधानसभा भंग करने की मांग की

By: | Last Updated: Monday, 3 November 2014 12:53 PM

नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव होने का रास्ता साफ हो गया है. दिल्ली की सभी राजनीतिक पार्टियों बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने उप राज्यपाल नजीब जंग से विधानसभा भंग करने की मांग की है.

 

उप राज्यपाल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सभी राजनीतिक पार्टियों ने विधानसभा भंग करने की मांग की है.

 

आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने  उप राज्यपाल से मुलाकात के बात मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने विधानसभा भंग करने की मांग की है.

 

अगर दिल्ली में चुनाव होता है तो जीत किसको मिल सकती है ?

 

इसके साथ ही सिसोदिया ने कहा कि जब उन्होंने राज्यपाल से पूछा कि दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर दूसरी पार्टियों की क्या राय है तो उन्हें एलजी ने बताया कि बीजेपी और कांग्रेस ने भी विधानसभा भंग करने की मांग की है.

 

आपको बता दें कि सोमवार की शाम करीब छह बजे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने उप-राज्यपाल से मुलाकात की थी.

याद रहे कि इससे पहले, सुबह में बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं ने भी एलजी नजीब जंग से मुलाकात की थी.  सूत्रों के हवाले से ये खबर आई थी कि बीजेपी नेता सतीश उपाध्याय ने एलजी से कहा कि वे सरकार बनाने में सक्षम नहीं है. हालांकि, औपचारिक तौर पर बीजेपी ने विधानसभा भंग करने की बात मीडिया को नहीं बताई.

 

इसी तरह कांग्रेस के नेताओं ने भी एलजी से मुलाकात की थी और अपनी तरफ से विधानसभा भंग करने की मांग की थी.

ग़ौरतलब है कि अरविंद केजपीवाल के इस्तीफे के बाद से बीते नौ महीने से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू है और फरवरी 2014 से विधानसभा निलंबित है. आम आदमी पार्टी की सरकार ने 49 दिन की सरकार के बाद इस्तीफा दे दिया था.

 

आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि जम्मू-कश्मीर और झारखंड विधानसभा चुनावों के साथ ही दिल्ली में चुनाव करा दिए जाएं और वोटों की गिनती एक साथ 23 दिसंबर को कराई जाए. 

 

कैसे विधानसभा भंग करने की स्थिति बनी

 

दरअसल, दिल्ली में सरकार बनाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एलजी को 11 नवंबर तक का वक़्त दिया था और जब किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने से मना कर दिया तो अब नए चुनाव की तरफ दिल्ली बढ़ चुकी है.

 

क्या है दिल्ली विधानसभा की मौजूदा स्थिति

 

दिल्ली विधानसभा में फिलहाल 67 विधायक हैं जिसमें बीजेपी के पास 29, आम आदमी पार्टी के पास 27, कांग्रेस के पास 8 और अन्य के पास 3 विधायक हैं. तीन विधासभा सीटें खाली है.

 

कौन है इस वक्त चुनावी रेस की दौड़ में सबसे आगे?

 

दिल्ली में विधानसभा की कुल 70 सीट है जबकि लोकसभा की 7 सीट . 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सातों सीट पर जीत दर्ज की थी जबकि आप सभी सीटों पर नंबर दो थी. विधानसभा के हिसाब से बीजेपी 60 सीटों पर नंबर वन थी जबकि आप 10 सीटों पर सबसे आगे थी. मतलब लोकसभा के हिसाब से बीजेपी को 60 और आप को 10 सीट मिल सकती है.

 

आप और कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में फर्क होता है. तो चलिए, विधानसभा के आंकड़े के हिसाब से देखते हैं कि कौन पार्टी नंबर वन बन सकती है? 

 

2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 68 सीटों पर लड़ी थी, 31 सीटों पर उसने जीत दर्ज की, 2 सीट पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी जबकि कुल 33 फीसदी वोट उसके हिस्से में आये थे. बीजेपी की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल 2 सीटों पर लड़ी थी, एक पर उसे जीत मिली और एक फीसदी वोट उसके हिस्से में आया था.

 

मतलब बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर कुल 70 सीटों पर लड़े थे, 32 सीटों पर उन्होंने जीत दर्ज की थी, 2 सीट पर उनकी जमानत जब्त हुई थी जबकि कुल 34 फीसदी वोट उनके हिस्से में आया था.

 

आप का आंकड़ा

 

अब आइए आप के आंकड़ें पर. आप ने दिल्ली की सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे जिसमें से उसे 28 सीटों पर जीत मिली थी . 9 सीटों पर जमानत जब्त हुआ था जबकि उसे कुल 29 फीसदी वोट मिले थे.

 

आप की तरह ही कांग्रेस ने भी सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन उसके हिस्से में आयी थी महज 8 सीटें . 11 सीटों पर जमानत जब्त हुआ हालांकि कांग्रेस का वोट प्रतिशत रहा 25 फीसदी .

 

बीएसपी 69 सीटों पर लड़ी थी लेकिन वह एक भी सीट नहीं जीत पायी उल्टे 63 सीटों पर उसका जमानत जब्त हो गया . बीएसपी को मात्र पांच फीसदी वोट मिले थे.

 

बीएसपी से अच्छी हालत रही जेडीयू की . जेडीयू ने 27 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिसमें से एक सीट पर उसने जीत दर्ज की थी जबकि 26 सीटों पर जमानत भी नहीं बचा पायी थी. उसे महज एक फीसदी वोट मिला था.  एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार रामबीर शौकीन ने जीत दर्ज की थी.

 

लेकिन ये आंकड़े हैं 8 दिसंबर 2013 के जिस दिन चुनाव नतीजे आये थे. तब से लेकर आज तक का राजनीतिक माहौल काफी बदल चुका है. कांगेस के सहयोग से बनी केजरीवाल की सरकार 49 दिनों में गिर चुकी है. दिल्ली की गद्दी पर मोदी सरकार काबिज हो चुकी है.हरियाणा और महाराष्ट्र में इतिहास की पहली बीजेपी सरकार बन चुकी है. जाहिर है बीजेपी खेमे में फीड गुड का अहसास कुछ ज्यादा है लेकिन आखिरी फैसला तो दिल्ली के एक करोड़ 15 लाख मतदाताओं को ही करना है.

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