केजरीवाल को डबल झटका, हाईकोर्ट ने कहा- LG को फैसला लेने का अधिकार

By: | Last Updated: Friday, 29 May 2015 6:18 AM
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नई दिल्ली: एक दिन में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को दो-दो झटके लगे हैं. दोपहर में पहला झटका सुप्रीम कोर्ट से लगा तो शाम होते होते दूसरा झटका दिल्ली हाई कोर्ट से लगा.

 

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र के नोटिफिकिशन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए अपने अंतरिम आदेश में कहा कि दिल्ली में आखिरी फैसला लेने का अधिकार राज्यपाल का है.

 

दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि दिल्ली सरकार कोई भी फैसला लेती है तो उसे राज्यपाल के पास भेजना होगा और राज्यपाल अपने विवेक से अंतिम फैसला लेंगे. कोर्ट के इस आदेश का सीधा मतलब ये है कि दिल्ली का असल बॉस राज्यपाल हैं. उपराज्यपाल अपने विवेक के आधार पर तय करें कि कौन सा फैसला सही या गलत.

 

‘आप ने फैसले का स्वागत किया’

 

आम आदमी  पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि ये फैसला अवाम के हक में है.

 

सुप्रीम कोर्ट से भी लगा झटका

 

इससे पहले दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से झटका लगा. जिस हाई कोर्ट के फैसले के हिस्से को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने एक बड़ी जीत बताया था उसी को सुप्रीम कोर्ट ने गैर ज़रूरी बताया है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र के 21 मई के नोटिफिकेशन को फैसले के एक हिस्से में (पैराग्राफ 66 ) संदिग्ध करार दिया था.

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के उस हिस्से का हाई कोर्ट में आगे होने वाली सुनवाई के दौरान कोई असर नहीं होगा, एक तरह से सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को ये राहत जरूर दी है कि अब हाई कोर्ट पुराने ऑब्जरवेशन के आधार पर कोई निर्णय नहीं दिया जा सकेगा न ही उसका कहीं ज़िक्र हो सकेगा.

 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वक़ील से पूछा कि उन्होंने केंद्र के नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की हुई है तो वो चाहती क्या है क्या इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करे या हाई कोर्ट.

 

दिल्ली सरकार के वक़ील का कहना था कि हाई कोर्ट में नोटिफिकेशन को चुनौती दी है जबकि सुप्रीम कोर्ट में एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारों पर और हाई कोर्ट की टिप्पणी पर बात हो रही है. लिहाज़ा दोनों जगह अलग अलग मामला चल सकता है.

 

केजरीवाल से जवाब मांगा

 

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी माँगा है. दिल्ली सरकार को तीन हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना कहा है.

 

केंद्र सरकार के 21 मई के नोटिफिकेशन पर केंद्र और दिल्ली सरकार आमने-सामने है. केंद्र ने नोटिफिकेशन में एसीबी के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए केंद्र के अफसर कर्मचारियों पर कार्रवाई न करने को कहा है. उधर, केजरीवाल सरकार ने इसके विरोध में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर नोटिफिकेशन के खिलाफ प्रस्ताव पास कराया. दिल्ली सरकार का आरोप है कि केंद्र सरकार इस नोटिफिकेशन के जरिए राज्य सरकार के कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण कर रही है.

 

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली सरकार को नोटिस 

 

क्या थी अधिसूचना

गृह मंत्रालय ने 21 मई को गजट अधिसूचना जारी कर केजरीवाल सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (एसीबी) को केंद्रीय कर्मियों, अफसरों और पदाधिकारियों पर कार्रवाई के अधिकार से वंचित कर दिया था. साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल को वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती करने की भी पूर्ण शक्तियां दी गई थीं.

 

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