दिल्ली की लड़ाई: केजरीवाल VS किरन बेदी!

By: | Last Updated: Friday, 16 January 2015 5:14 AM
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नई दिल्ली: दिल्ली में चुनावी दंगल अब पहले से कहीं दिलचस्प हो गया है. गुरुवार शाम पूर्व आईपीएस ऑफिसर और सामाजिक कार्यकर्ता किरन बेदी बीजेपी में शामिल हो गईं. दो साल पहले अस्तित्व में आई आम आदमी पार्टी से टक्कर लेने के लिए अब बीजेपी के पास किरन बेदी जैसा चेहरा है. महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा जैसे राज्यों में पीएम मोदी के चेहरे के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने वाली बीजेपी को आखिरकार दिल्ली में एक चेहरे की जरूरत पड़ गई. लंबे समय से दिल्ली में एक अदद चेहरे की तलाश कर रही भगवा बीजेपी को आखिरकार अब किरन बेदी जैसी बेदाग छवि और ईमानदार चेहरा मिल गया है. गुरुवार शाम किरन बेदी के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही दिल्ली की लड़ाई अब केजरीवाल VS किरन बेदी कही जा रही है. किरण बेदी के आने से जहां बीजेपी में खुशी की लहर है तो विरोधी पार्टियों में खलबली भी मच गई है.

दिल्ली में बीजेपी सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किए जाने से लगातार आम आदमी पार्टी के निशाने है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि बीजेपी पीएम मोदी के चेहरे को आगे रखकर ही दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ेगी लेकिन किरन बेदी जैसी ईमानदार और लोकप्रिय शख्शियत के आने से अब वो बहस जरूर खत्म हो जाएगी जिसमें कहा जाता रहा है कि पीएम मोदी दिल्ली के सीएम तो नहीं बन सकते.

 

अन्ना आंदोलन में किरण-केजरीवाल राग

35 साल तक एक पुलिस ऑफिसर और फिर सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर देश की सेवा करने वाली किरन बेदी और केजरीवाल कभी अन्ना हजारे के आंदोलन में साथी रहे थे. जनलोकपाल और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर एक साथ रहे किरन और केजरीवाल के बीच कई मसलों पर अन्ना आंदोलन के समय से ही मतभेद सामने आते रहे हैं. अन्ना आंदोलन के समय भी किरन और केजरीवाल अपना-अपना राग अलापते थे. बीजेपी नेता नितिन गडकरी के घर के सामने जब केजरीवाल ने प्रदर्शन किया था तब तो किरन बेदी का केजरीवाल के खिलाफ गुस्सा खुलकर सबके सामने आ गया था. 

अन्ना आंदोलन के समय केजरीवाल, कुमार विश्वास, मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं ने अलग आम आदमी पार्टी बना ली. वहीं अन्ना हजारे किरन बेदी, जनरल वी.के. सिंह की एक अलग टीम बन गई. जनरल वी.के. सिंह तो 2014 के आम चुनाव में ही बीजेपी में शामिल हुए और गाजियाबाद से सांसद बन गए. आज वी.के. सिंह केंद्र में मंत्री हैं. अब किरन बेदी भी बीजेपी के साथ और अपने पुराने साथी केजरीवाल के खिलाफ हैं. राजनीति में जाने से अन्ना हजारे बच गए और भुला दिए गए हैं. किरन के बीजेपी में शामिल होने पर अन्ना ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. क्या अब ये भी सोचने की जरूरत है कि अन्ना आंदोलन की जमीन भी किरन, केजरीवाल जैसे नेताओं ने आपनी राजनीतिक महत्वाकाँक्षा पूरी करने के तहत तो डिजाइन नहीं की थी? पर एक बात तो साफ है कि अन्ना आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया और सालों पुरानी कांग्रेस और बीजेपी को पीछे छोड़ दिल्ली में 49 दिन की सरकरा भी बना ली. निश्चित ही केजरीवाल की पार्टी ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही दिल्ली में उनके हिसाब से रणनीति बनाने पर जरूर मजबूर कर दिया.

 

बीजेपी लड़ेगी किरन के नेतृत्व में दिल्ली चुनाव!

‘क्रेन बेदी’ के नाम से मशहूर रहीं किरन बेदी ने पार्किंग का उल्लंघन करने पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गाड़ी को भी उठवा लिया था और जुर्माना भी लगाया था.किरन ने बीजेपी में शामिल होते वक्त किरण बेदी ने हुंकार भरी और कहा कि, ”मैं अपने 40 वर्षों का अनुभव देश को दने आई हूं. मैं अब खुद को और्पने अनुभवों को दिल्ली को समर्पित करूंगी. दिल्ली को एक मजबूत, स्पष्ट विजन वाली स्थाई सरकार की सख्त जरूरत है.” राजनीति में प्रवेश के साथ ही किरन की इस हुंकार से ही उनके बुलंद इरादों का अनुमान लगाया जा सकता है. किरन हमेशा से ही राजनीति से परहेज होने के बावजूद सार्वजनिक मंचो पर पीएम मोदी की तारीफ करती रही हैं. गुरुवार को भी किरन ने अपने राजनीति में आने का श्रेय पीएम मोदी के प्रेरणीदायी नेतृत्व को ही बताया.

बीजेपी ने गुरुवार शाम को दिल्ली का चुनाव किरन बेदी के नेतृत्व में भी लड़ने के संकेत दिए. अब सवाल यह भी है कि क्या दिल्ली में सुपर कॉप रहीं किरन बेदी दिल्ली में बीजेपी की सीएम पद की उम्मीदवार होंगी?दिल्ली में बीजेपी का सीएम उम्मीदवार पर बीजेपी अध्यक्ष ने अमित शाह ने कहा, ”दिल्ली में पार्टी का मुख्यमंत्री कौन होगा यह पार्टी तय करेगी और कौन कहां से चुनाव लड़ेगा यह संसदीय बोर्ड.” इसके अलावा बीजेपी सांसद विजय गोयल ने भी ट्वीट कर दिया कि उन्हें पूरी भरोस है कि उनकी प्रेरणादायी किरन बेदी के नेतृत्व में बीजेपी जीतेगी और दिल्ली का विकास होगा.

 

बीजेपी के इस दांव का फल तो 10 फरवरी को ही पता चलेगा लेकिन बेदी के बीजेपी में शामिल होने के साथ ही आम आदमी पार्टी और केजरीवाल की मुश्किलें जरूर बढ़ गई हैं. शायद आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के इस दांव के जवाब देने की तैयारी अभी तक नहीं की थी लेकिन अब तक पीएम मोदी के खिलाफ रणनीति बना रही आम आदमी पार्टी को अब अपनी ही पुरानी साथी के खिलाफ भी एक मजबूत रणनीति बनानी होगी. हालांकि केजरीवाल ने किरण बेदी के बीजेपी में शामिल होते ही केजरीवाल ने ट्विटर पर अपनी खुशी जाहिर की और बेदी के राजनीति में आने का स्वागत किया.

बीजेपी के ‘मास्टर स्ट्रोक’ से बढ़ीं ‘आप’ की मुश्किलें

लेकिन क्या सिर्फ किरन बेदी के आने से बीजेपी आम आदमी पार्टी से टक्कर ले पाएगी? ये सवाल इसलिए है क्योंकि आम आदमी पार्टी दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर तब से प्रचार कर रही है जब बीजेपी दिल्ली में चुनाव होने की सोच भी नहीं रही थी. यहां तक कि आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवार सबसे पहले तय कर लिए थे. अभी तो वो शायद चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में है और हर रोज कोई न कोई नए आरोप लगाकर बीजेपी को बैकफुट पर ला रही है. बिजली, पानी, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दों पर चुनावी जंग लड़ रही आम आदमी पार्टी के लिए अब यह जंग इतना आसान नहीं रहा है. किरन बेदी को लाकर बीजेपी ने अपना मास्टर स्ट्रोक चल दिया है. तो क्या अब बीजेपी को आम आदमी पार्टी की काट मिल गई है?

 

अगर बात करें दिल्ली की जनता के पास केजरीवाल के रुप में साफ छवि के साथ ही कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा को लेकर लोगों के भरोसे को जीत सकने वालीं किरन बेदी जैसा विकल्प भी मौजूद है.

 

दिल्ली में 7 फरवरी को एक साथ 70 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. क्या किरन बेदी दिल्ली की भावी मुख्यमंत्री होंगी? किरण बेदी के आने से दिल्ली की सियासत पर क्या पड़ेगा? क्या आम आदमी पार्टी एक बार फिर सत्ता पर काबिज हो पाएगी? इन सवालों के जवाब 10 फरवरी यानी दिल्ली के नतीजे आने तक परतों में लिपटा रहेगा.  

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