अफसरों के ट्रांसफर को लेकर एलजी ने केंद्र से की केजरीवाल की शिकायत

By: | Last Updated: Thursday, 28 May 2015 7:11 AM
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की उस याचिका पर कल सुनवाई करेगा जिसमें हाईकोर्ट ने उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें केंद्र की एक अधिसूचना को ‘‘संदिग्ध’’ बताया गया है . इस अधिसूचना में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा को आपराधिक मामलों में अपने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से रोका गया था. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि उपराज्यपाल अपनी मनमर्जी से काम नहीं कर सकते.

 

केंद्र की याचिका को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल महिंद्र सिंह द्वारा न्यायाधीश ए के सीकरी और न्यायाधीश यू यू ललित की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष लाया गया. सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों ने पूर्ण अनिश्चितता पैदा कर दी है और राष्ट्रीय राजधानी में रोजमर्रा के प्रशासन को मुश्किल बना दिया है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच के समीकरण में संतुलन बैठाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 239 ए ए की स्पष्ट व्याख्या जरूरी है.

 

जब पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने सिर्फ ‘संदिग्ध’ शब्द का इस्तेमाल किया है तो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि स्पष्टीकरण जरूरी है.

 

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए एक पुलिसकर्मी की जमानत याचिका के निपटारे के दौरान आई हंै. दिल्ली सरकार ने भी एक पक्षीय आदेश पारित किए जाने से पहले ही एक प्रतिवाद दाखिल कर दिया है.

 

अपने आवेदन में इसने कहा है कि कोई भी आदेश पारित किए जाने से पहले शहर की सरकार को उसका पक्ष स्पष्ट करने का मौका दिया जाए.

 

गृहमंत्रालय ने कल शीर्ष अदालत के समक्ष एक याचिका दायर करके 25 मई को जारी हुए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने वह आदेश दिल्ली पुलिस के एक कॉन्सटेबल की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए सुनाया था. इस कॉन्सटेबल को रिश्वत लेने के आरोप में दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था.

 

हाईकोर्ट की टिप्पणियां दरअसल एक फैसले का हिस्सा थीं, जिसमें उसने यह कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा को पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने का अधिकार है.

 

नोटिफिकेशन पर AAP भी कोर्ट पहुंची

दिल्ली में अफसरों को लेकर केजरीवाल-एलजी के झगड़े पर केंद्र सरकार ने जो नोटिफिकेशन जारी किया था उसे आम आदमी पार्टी ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. आप की अर्जी पर दिल्ली हाई कोर्ट में कल सुनवाई होगी.

 

क्या थी अधिसूचना

गृह मंत्रालय ने 21 मई को गजट अधिसूचना जारी कर केजरीवाल सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (एसीबी) को केंद्रीय कर्मियों, अफसरों और पदाधिकारियों पर कार्रवाई के अधिकार से वंचित कर दिया था. साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल को वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती करने की भी पूर्ण शक्तियां दी गई थीं.

 

हाईकोर्ट ने कहा था-

एलजी अपने विवेकाधिकार के आधार पर काम नहीं कर सकते. वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार से बाध्य हैं और वह उसकी मदद और सलाह से ही काम कर सकते हैं. दिल्ली सरकार को लोगों ने चुना है और केंद्र अपने आदेश से उसके अधिकारों में कटौती नहीं कर सकता. कोर्ट ने कहा था कि यदि कोई संवैधानिक या कानूनी बाध्यता न हो तो एलजी को दिल्ली की चुनी हुई सरकार का सम्मान करना चाहिए.

 

LG ने की केजरीवाल की शिकायत

एलजी नजीब जंग ने की गृह सचिव को केजरीवाल की शिकायत की है. एलजी ने कहा है कि हाईकोर्ट के एसीबी मामले में दिए फैसले के बहाने ट्रांसफर-पोस्टिंग पर केजरीवाल सीमा लांघ रहे हैं.

 

इस नोटिफिकेशन के खिलाफ दिल्ली विधानसभा कल प्रस्ताव पास कर चुकी है.दिल्ली विधानसभा ने उपराज्यपाल को पूर्ण शक्तियां देने वाली गृह मंत्रालय की अधिसूचना के खिलाफ आज पारित अपने प्रस्ताव की प्रतियां राष्ट्रपति, उपराज्यपाल और सांसदों को भेजने का फैसला किया.

 

देश को तानाशाही की ओर ले जाना चाहती है केंद्र सरकार: केजरीवाल

कल दिल्ली विधानसभा में अपने संबोधन में केजरीवाल ने उपराज्यपाल नजीब जंग पर प्रहार किया और कहा कि वह ‘केंद्र के इशारे’ पर चल रहे हैं और आप सरकार के लिए ‘जानबूझकर’ बाधाएं पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में जो हो रहा है वह खतरनाक है. यह बीजेपी नीत केंद्र का दिल्ली में प्रयोग है. एक-एक कर यह प्रयोग हर गैर बीजेपी शासित राज्य में किया जाएगा. वे देश को तानाशाही की तरफ ले जाना चाहते हैं. मैं सभी गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील करता हूं कि इस मुद्दे पर एकजुट हों.’

 

सिसोदिया ने गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन को ‘तालिबानी’ बताया

गृह मंत्रालय की अधिसूचना को ‘तालिबानी’ करार देते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को कहा कि केन्द्र भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली सरकार की जंग से ‘‘डरी’’ हुई है और इस तरह की अधिसूचना संविधान का ‘‘अपमान’’ है.

 

विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए सिसोदिया ने कहा कि केन्द्र की अधिसूचना दिल्ली विधानसभा के अस्तित्व को ‘‘खतरा’’ है और वर्तमान स्थिति 125 साल पुराने ब्रिटिश शासन के दौरान की स्थिति से भी खराब है.

 

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हर कोई.. विधानसभा.. निर्वाचित सरकार कह रही है कि यह अधिसूचना सही नहीं है, लेकिन वे (केन्द्र) कह रहे हैं कि हमें संविधान के बारे में कोई जानकारी नहीं है.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘सत्ता में आने से पहले, हम जानते थे कि दिल्ली सरकार के कार्यक्षेत्र में लोक व्यवस्था, भूमि और पुलिस नहीं आती. इन तीन विषयों को छोड़कर विधानसभा के पास सभी विषयों पर अधिकार है. जिन लोगों का संविधान में भरोसा नहीं है केवल वे ही इस तरह की अधिसूचना लाने की जरूरत महसूस कर सकते हैं. उन्होंने तालिबानी अधिसूचना जारी कर दी.’’

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