दिल्ली में एक बार फिर बीजेपी नेता संजय जोशी के पोस्टर में पीएम मोदी पर निशाना

By: | Last Updated: Tuesday, 23 June 2015 1:32 AM
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आज एक बार फिर बीजेपी के पूर्व महासचिव संजय जोशी की बड़ी तस्वीरों वाले होर्डिंग लगे दिखाई दिए हैं. इन हॉर्डिंग्स में एक बार फिर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा गया है.

 

इन होर्डिंग पर लिखा है – पाकिस्तान को रमज़ान पर देते हो बधाई, सुषमा, आडवाणी, संजय जोशी, राजनाथ, गडकरी, मुरली मनोहर जोशी और वसुंधरा के लिए मन में है खटाई.

 

संजय जोशी की बड़ी तस्वीर वाले इस पोस्टर में आगे लिखा है – न संवाद, न मन की बात, न सबका साथ, न सबका विकास, फिर क्यों करे जनता आप पर विश्वास?

 

बीजेपी समर्थकों के नाम से छपवाए गए ये पोस्टर आडवाणी, सुषमा और अमित शाह के घर के पास लगे हुए हैं.

 

कुछ दिनों पहले ही नरेन्द्र मोदी के विरोधी एवं बीजेपी के कभी ताकतवर नेता रहे पूर्व पार्टी महासचिव संजय जोशी ने अपने समर्थकों से ऐसी किसी पोस्टरबाजी से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि यह पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा.

 

उन्होंने स्वीकार किया था कि मोदी उनके और भाजपा के नेता हैं तथा अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

 

जोशी ने कहा कि वह संगठन की एकता में यकीन रखते हैं और पार्टी में उनकी वापसी की मांग करने वाले पोस्टर और होर्डिंग्स लगाने में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भूमिका नहीं है.

 

बीजेपी के पूर्व महासचिव (संगठन) जोशी के अतीत में मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध नहीं रहे हैं और एक सीडी विवाद के बाद 2005 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था और पार्टी के सारे पदों से हटा दिया गया था.

 

गौरतलब है कि अप्रैल में बीजेपी मुख्यालय और शाह तथा पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के आवास के बाहर लगे पोस्टर में जोशी की पार्टी में वापसी की मांग की गई थी. इनमें जोशी की घर वापसी की मांग की गई थी.

कौन हैं संजय जोशी?

संजय जोशी बीजेपी और आरएसएस में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. संजय जोशी का शुमार बीजेपी में उन ताकतवर नेताओं में होता है जिन्हें शायद आम जनता ठीक से नहीं जानती लेकिन पार्टी में उनका कद काफी ऊंचा था. 1980 के दशक में बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष नितिन गडकरी और संजय जोशी नागपुर में आरएसएस की एक ही शाखा में काम किया करते थे. इसीलिए आरएसएस के साथ साथ उनकी बीजेपी के कार्यकर्ताओं में भी अच्छी लोकप्रियता है. खास तौर से जो जमीन से जुड़े कार्यकर्ता संजय जोशी के सबसे ज्यादा करीब है और तो और पार्टी छोड़ चुके पुराने नेता भी संजय जोशी की तारीफ करते नहीं थकते.

 

संजय जोशी मूल रूप से नागपुर के हैं. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद वो सीधे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़ गए. वो संघ के रास्ते बीजेपी में आए और उन्हें बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए पहली बड़ी जिम्मेदारी गुजरात की दी गई.

 

वो 1990 में महाराष्ट्र से गुजरात आए. 1995 में गुजरात में बीजेपी की पहली बार सरकार बनीं उस वक्त वो गुजरात बीजेपी के महासचिव बनाए गए. जोशी करीब तेरह साल तक गुजरात में रहे और बीजेपी के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक रहे.

 

साल 2001 में नरेंद्र मोदी से खटपट होने के बाद वो दिल्ली आ गए. दिल्ली में उन्हें बीजेपी ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए महासचिव बनाया. जोशी को सबसे बड़ा धक्का लगा जब 2005 में कथित सीडी कांड में उनका नाम आया और उन्हें पार्टी में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

 

लेकिन सीडी कांड में क्लीन चिट मिलने के बाद उन्हें फिर से पार्टी में अहम रोल अदा करने का मौका मिला. बीजेपी ने जोशी को उत्तर प्रदेश के 2012 के विधानसभा चुनावों की बाग़डोर सौंप दीं. हालांकि इन चुनाव में बीजेपी कोई कमाल नहीं कर पाई.

 

संजय जोशी ने शादी नहीं की है. भले ही वो नागपुर के हैं लेकिन उनके परिवार के कई लोग गुजरात में रहते हैं.

 

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