जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र की जीत हुई ?

By: | Last Updated: Tuesday, 23 December 2014 10:42 AM
democracy in jammu and kashmir

नई दिल्ली: भले मुखौटा पीएम नरेंद्र मोदी का है. भले पटाखे पीडीपी के नाम पर फूटे हों. लेकिन हकीकत ये है कि जम्मू कश्मीर में जीत लोकतंत्र की हुई है.

 

लाख अलगाववादियों ने चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी. लाख अलगाववादियों ने वोटिंग के दिन बंद बुलाया लेकिन लोकतंत्र की जीत को वे रोक नहीं सके . इसे लोकतंत्र की जीत नहीं तो क्या कहेंगे ?

 

अलगावादी नेताओं ने तो इस बार चुनाव में भी हिस्सा लिया . और जनता ने उनका मुख्यधारा में स्वागत भी किया . अलगवावादी नेता सज्जाद लोन की पार्टी जम्मू कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस को दो सीटों पर जीत मिली . हंदवाड़ा से खुद सज्जाद लोन जीते तो हब्बा कदल से उनकी ही पार्टी के शमिम फिरदौस की जीत हुई .

 

जनता ने उन सबको मुंहतोड़ जवाब दिया जो लोकतंत्र के सबसे बड़े त्योहार में खलल डालना चाहते थे . वोटिंग के दिन इस बार गोलियां नहीं चली . चुनाव के दौरान भले आतंकवादियों ने हमला कर लोकतंत्र के पर्व में बाधा डालने की कोशिश की लेकिन वोटरों के उत्साह को वे कम नहीं कर सके .

 

भले राज्य में कोई पार्टी अकेले दम पर सरकार बनाने की हालत में नहीं है लेकिन लोकतंत्र की जीत के ये आंकड़े भी गवाह हैं . जम्मू कश्मीर में 27 साल यानी 1987 के बाद इस तरह की जबरदस्त वोटिंग हुई. 1987 में करीब 75 फीसदी मतदान हुआ था इसके बाद से 1996 में करीब 54 फीसदी, 2002 में करीब 44 फीसदी और 2008 में करीब 61 फीसदी मतदान हुआ लेकिन 2014 में 66 फीसदी वोटिंग के साथ लगातार तीन चुनावों के वोटिंग का रिकॉर्ड टूटा .

 

इन आंकड़ों से अलग हटकर जश्न में डूबे चेहरों पर एक बार नजर डालिए . क्या आपको नहीं लगता है कि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र की जीत हुई ?

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Web Title: democracy in jammu and kashmir
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