DEPTH INFORMATION: इंद्राणी के पति का फोन कनेक्शन?

By: | Last Updated: Monday, 31 August 2015 5:04 PM
Depth information: sheena bora murder case

नई दिल्ली: शीना हत्याकांड में एक नया मोड़ आ गया है. शीना की मां इंद्राणी के साथ उनके दूसरे पति संजीव खन्ना तो पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे लेकिन पुलिस अब इंद्राणी के पहले पति की तलाश में जुटी है. शीना इंद्राणी के पहले पति सिद्धार्थ दास की ही बेटी है और इंद्राणी की गिफ्तारी से पहले ही फरार हो चुके हैं. लेकिन क्यों?

 

मुंबई पुलिस का ये फोन ना बजता तो इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी के कत्ल के इल्जाम में जेल ना जातीं. इंद्राणी के दूसरे पति संजीव खन्ना भी गिरफ्तार होने से बच जाते, इंद्राणी की साजिश का खुलासा करने वाला ड्राइवर श्याम राय भी गिरफ्त में ना आता लेकिन ये फोन आखिर क्यों बजा? पुलिस को ये फोन कहां से आया? और पुलिस को ये फोन किसने किया?

 

ये सवाल आज आपको इंद्राणी की जिंदगी की उस गुमनाम गली में ले जाएगा जहां मौजूद एक शख्स आज इन रहस्यमयी सवालों का जवाब बनता दिखाई दे रहा है.

 

उस शख्स की आज ना तो तस्वीर मौजूद है और ना ही कोई पता-ठिकाना. सिर्फ एक नाम है और इंद्राणी से एक पुराना नाता.

 

नाम है सिद्धार्थ दास. सिद्धार्थ दास शीना बोरा और मिखाइल बोरा के पिता हैं. और इंद्राणी मुखर्जी का पहले पति हैं. शीना बोरा हत्याकांड में सिद्धार्थ दास की तलाश क्यों हो रही है? खबरी वेबसाइट क्विंट डॉट कॉम के मुताबिक जांच के दौरान जिस सवाल की पड़ताल के लिए पुलिस इंद्राणी दास सिद्धार्थ दास की मां और युवा भाई के घर असम पहुंची है वो ये है कि सिद्धार्थ दास इंद्राणी की गिरफ्तारी से सिर्फ 6 दिन पहले 19 अगस्त से गायब क्यों हो गया है.

 

क्विंट डॉट कॉम ने सवाल उठाया है कि क्या सिद्धार्थ दास को भी शीना की हत्या की जानकारी थी? कहीं सिद्धार्थ दास ही तो वो शख्स नहीं था जिसने 21 अगस्त को फोन करके इंद्राणी के ड्राइवर श्याम मनोहर राय के बारे में ये जानकारी दी थी कि वो साजिश में शामिल है?

 

इंद्राणी के पहले पति सिद्धार्थ दास की शीना हत्याकांड में इस अहम भूमिका का सच अभी सामने आना बाकी है लेकिन मुंबई पुलिस असम में उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है. लेकिन सिद्धार्थ दास का कोई सुराग नहीं मिल रहा है.

 

क्विंट डॉट कॉम ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है. इसके मुताबिक इंद्राणी मुखर्जी के पहले पति सिद्धार्थ दास के रिश्तेदारों के मुताबिक वो 10 साल से सिद्धार्थ दास के संपर्क में नहीं हैं लेकिन इसके बिलकुल उलट मुंबई पुलिस के पास ये खबर है कि सिद्धार्थ दास 19 अगस्त को ही बांग्लादेश की सरहद पार करके गायब हो गया है. सिद्धार्थ के गायब होने के दो दिन बाद ही पुलिस को शीना हत्याकांड में एक अज्ञात फोन आया था.

 

मां इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी की हत्या में जेल की सलाखों के पीछे हैं तो पिता बांग्लादेश भाग चुका है. क्विंट ने अपने दावे के पक्ष में एक और खुलासा भी किया है. क्विंट डॉट कॉम के मुताबिक असम के करीम गंज में रहने वाला सिद्धार्थ दास भारत बांग्लादेश सीमा से 10 किलोमीटर दूर सुतरकांडी (बांग्लादेश) पहुंच चुका है. उसे भारत से बाहर पहुंचाने में अब्दुल आबेद नाम के एक शख्स ने मदद की है जो खुद मिजोरम बैंक डकैती के मामले में साल 2004 में आरोपी रह चुका है.

 

शीना बोरा हत्याकांड में आया ये नया मोड़ इंद्राणी और सिद्धार्थ दास के रिश्तों की उस कहानी से निकला है जिसे इंद्राणी ने कभी दुनिया के सामने नहीं आने दिया था. सिद्धार्थ दास से अपनी पहली शादी और उस शादी से हुए दो बच्चों यानी शीना बोरा और मिखाइल को इंद्राणी ने हमेशा छिपाने की कोशिश की है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कहीं सिद्धार्थ दास ही तो वो शख्स नहीं था जिसने अपनी बेटी शीना और बेटे मिखाइल के लिए इंद्राणी मुखर्जी को ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी.

 

अब तक इस मामले में माना जा रहा था कि सिद्धार्थ दास इस दुनिया में नहीं है लेकिन अब खुद उसके परिवार ने दावा किया है कि सिद्धार्थ उनके संपर्क में भले ही ना हो लेकिन जिंदा है. इंद्राणी और सिद्धार्थ की वो प्रेम कहानी जो आपने इससे पहले नहीं सुनी.

 

क्या सिद्धार्थ दास इंद्राणी का पहला प्यार था. अगर नहीं तो उससे पहले कौन था इंद्राणी के सपनों का राजकुमार. इन सवालों का जवाब जानने पहले इंद्राणी के बचपन के उन दिनों के बारे में जानना जरूरी है जब इंद्राणी गुवाहाटी में अपने पिता उपेन कुमार बोरा और मां दुर्गारानी बोरा के साथ रहती थीं और तब उनका नाम हुआ करता था परी बोरा.

 

हमें उस दौर में चलना होगा जब इंद्राणी इंद्राणी नहीं परी बोरा के नाम से जानी जाती थीं और गुवाहाटी के सुंदर नगर में मौजूद इस बोरा हाउस में रह रही थीं.

 

पिता उपेन कुमार बोरा और दुर्गा रानी बोरा की नेमप्लेट वाला ये घर उनकी बेटी परी बोरा यानी इंद्राणी की पूरी दुनिया थी.

 

मुंबई में अपने इर्द गिर्द जो दुनिया इंद्राणी ने बुनी थी उसे इंद्राणी के बारे में सिर्फ वही पता होता था जो इंद्राणी बताना चाहती थीं. और जो वो छिपाना चाहती थीं वो उनकी इस मुस्कान के पीछे दफ्न हो जाता था.

 

उन्हीं दफनाई गई सच्चाईयों का एक टुकड़ा ये है कि बचपन में परी बोरा ने नाम से जानी जाने वाली इंद्राणी अपने घर से भाग गई थीं ताकि वो अपनी मां दुर्गा रानी और पिता उपेन बोरा की नजरों से दूर रह सकें.

 

1982 – परी बोरा तब दसवीं में पढ़ती थीं और उनके स्कूल के दोस्त बताते हैं कि साल 1982 में घर से भाग गई थी. परी को तब सिर्फ घर से ही नहीं भागना था उसने गुवाहाटी छोड़ने का मन बना लिया था. लेकिन उसकी ये योजना धरी की धरी रह गई. परिवार ने उसे तलाशा और गुवाहाटी के रेलवे स्टेशन पर उसे पकड़ लिया गया. परी एक बार फिर बोरा हाउस में लौट आई.

 

आपको बता दें कि हाईस्कूल का फॉर्म तो परी बोरा ने 1982 में गुवाहाटी के सेंट मैरी स्कूल से भरा था लेकिन इस घटना के बाद वो दसवीं के बोर्ड की परीक्षा में नहीं बैठ पाईं. उन्हें 1983 में प्राइवेट छात्रा के तौर पर बोर्ड की परीक्षा देनी पड़ी. और इसके बाद उन्हें 11 और 12 वीं की पढ़ाई के लिए कॉटन स्कूल में दाखिला लेना पड़ा.

 

इसी दौरान कॉटन कॉलेज के पास रहने वाले इस शख्स से हुई परी बोरा की मुलाकात और वो मुलाकात प्यार में बदल गई. इस शख्स का नाम था बिष्णु कुमार चौधरी. करीब दो साल तक दोनों के बीच गहरे रिश्ते रहे लेकिन कॉलेज के पढ़ाई के लिए परी बोरा को बिष्णु का साथ और गुवाहाटी दोनों छोड़ना पड़ा.

 

परी बोरा ने गुवाहाटी के सेंट मैरी स्कूल से पढ़ाई की लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए उसे मेघालय जाना पड़ा. ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई के लिए उसने शिलांग के लेडी कियाने कॉलेज (lady Keane College ) में एडमिशन ले लिया और गुवाहाटी हमेशा के लिए छूट गया.

 

शिलांग में रहते हुए परी बोरा की जिंदगी में सिद्धार्थ दास नाम का शख्स आ गया. ये दोस्ती प्यार में बदली और फिर शादी में. सिद्धार्थ दास की मां मायारानी दास के मुताबिक ये उस दौर की बात है जब हम शिलांग में थे. सिद्धार्थ एक दिन इंद्राणी को साथ लाया और उसकी गोद में 9 महीने की बेटी शीना भी थी. ये करीब 1989 की बात है. उसने हमरे कहा कि इंद्राणी उसकी पत्नी है और शीना उसकी बेटी है. मैं उसके और इंद्राणी के रिश्ते के बारे में जानती थी लेकिन ये पहली बार था जब मैं उससे मिली थी ( द टेलीग्राफ)

 

द टेलीग्राफ के मुताबिक तब मिखाइल का जन्म नहीं हुआ था लेकिन बाद में सिद्धार्थ दास ने बताया था कि इंद्राणी मिखाइल नाम के एक बेटे की मां भी बन चुकी है. सिद्धार्थ की निजी जिंदगी ठीक से नहीं चल पाई.

 

आनंद बाजार पत्रिका को सिद्धार्थ दास के एक दोस्त ने बताया कि इंद्राणी का अपनी सास के लिए बर्ताव बेहद बुरा हो गया था. एक दिन सिद्धार्थ को अपने परिवार सहित मां का घर छोड़ना पड़ा. और वो परिवार से अलग रहने लगा. लेकिन इसके बाद इंद्राणी और सिद्धार्थ में भी झगड़े शुरू हो गए और दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं.

 

1966 में जन्मे सिद्धार्थ दास की अपनी जिंदगी भी उलझी हुई थी. वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था और 21 साल की उम्र में ही उसने परी बोरा उर्फ इंद्राणी से शादी कर ली थी. जाहिर है घर का खर्च चलाना आसान नहीं था और शायद यही वजह थे कि महत्वाकांक्षी इंद्राणी अब इस रिश्ते से खुश नहीं थी.

 

द टेलीग्राफ के मुताबिक इंद्राणी के पड़ोसी साल 1990 का वो दौर याद करते हैं जब परी बोरा नाम की 16 साल की लड़की दो बच्चों के साथ वापस आई थी. वो तब कोलकाता में किसी सिद्धार्थ दास के साथ रहती थी. 2 साल की शीना और 1 साल का मिखाइल परी बोरा और सिद्धार्थ के बच्चे थे. वो जितनी जल्दबाजी में आई थी उतने ही चुपचाप तरीके से लौट गई. बच्चों को उसने अपने माता पिता के पास छोड़ दिया और फिर 14 साल के लिए गायब हो गई.

 

परी बोरा उर्फ इंद्राणी गुवाहाटी नहीं आती थीं. दोनों बच्चे स्कूल जाने लगे थे. अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ के मुताबिक कोलकाता और त्रिपुरा में कारोबार करने वाले सिद्धार्थ के कुछ रिश्तेदार गुवाहाटी में भी रहते थे और वो दादा-दादी के घर में इंद्राणी के बच्चों से दो बार मिलने आए थे. यहां तक कि वो डिजनीलैंड स्कूल जहां शीना पढ़ती थी वहां भी पैरेंट-टीचर मीटिंग में एक बार गए थे. लेकिन फिर ये सिलसिला थम गया.

 

इंद्राणी ने तो अपने बच्चों की परवाह नहीं की लेकिन सिद्धार्थ को उनकी फिक्र हमेशा रही. शायद इसकी वजह ये थी कि उन्हें खुद पिता का प्यार नहीं मिला था. सिद्धार्थ दास का बचपन भी इंद्राणी की तरह ही उलझे हुए पारिवारिक रिश्तों का शिकार हो चुका था. उसकी मां मायारानी और भाई शांतनु और उसके साथ मायके में रहने को मजबूर हो गई थीं.

 

आनंद बाजार पत्रिका ने एक दोस्त के हवाले से रिपोर्ट दी है कि मायारानी के पति यानी सिद्धार्थ दास के पिता एक दूसरी महिला के साथ घर छोड़कर चले गए थे. तब मायारानी को सिद्धार्थ, शांतनु और उनकी बहन बाबली के साथ अपने मायके करीमगंज के घर में पनाह लेनी पड़ी थी. सिद्धार्थ दास के बचपन का नाम बाबुल था.

 

करीमगंज के वार्ड नंबर 14 में साल 1997 की वोटर लिस्ट में मायारानी और सिद्धार्थ दास का नाम दर्ज है. लेकिन साल 2014 की वोटर लिस्ट में सिद्धार्थ दास का नाम वोटर लिस्ट से हट गया. परिवार के मुताबिक सिद्धार्थ दास से संपर्क ना होने की वजह से ऐसा हुआ.

 

दरअसल इंद्राणी मुखर्जी ने शिलांग के लेडी कायने कॉलेज से पढ़ाई पूरा करते ही सिद्धार्थ दास को छोड़ दिया था और खुद कोलकाता चली गई थी. कोलकाता में इंद्राणी की मुलाकात संजीव खन्ना से हुई और उसने सिद्धार्थ से तलाक का मन बना लिया.

 

इंद्राणी ने इसके लिए बाकायदा तलाक लिया था. उस तलाक के लिए दाखिल किए गए इस हलफनामे में साफ लिखा है कि एस दास उसका पति था और शीना और मिखाइल उसके बच्चे.

 

इंद्राणी और सिद्धार्थ का रिश्ता करीब तीन साल तक चला. ये करीब 1986 से 1989 की बात है. 90 की शुरुआत में ही इंद्राणी सिद्धार्थ दास से अलग हो गई और उसने कोलकाता में नई जिंदगी बसा ली लेकिन सिद्धार्थ का इसके बाद कोई पता नहीं चला.

 

द टेलीग्राफ के मुताबिक 72 साल की मायारानी बताती हैं कि सिद्धार्थ से उनका कई बरसों से संपर्क नहीं है. पिछली बार में उसने 8 साल पहले फोन पर बात की थी. वो कोलकाता चला गया था जहां उसने कालीघाट में अपना घर बना लिया है. सिद्धार्थ अपनी पत्नी बाबली दास के साथ रहता है. उसका एक बेटा भी है. वो किसी प्राइवेट कंपनी में काम कर रहा है.

 

पुलिस अब ये जानना चाहती है कि क्या वाकई इंद्राणी और सिद्धार्थ दोबारा कभी संपर्क में नहीं आए या फिर शीना हत्याकांड में शीना और मिखाइल की कई दिनों तक देख-रेख करने वाले पिता सिद्धार्थ की भी इसमें कोई भूमिका है.

 

सिद्धार्थ दास की मां मायारानी जो पीडबल्यूडी विभाग में काम कर चुकी हैं अब रिटायर हैं और सिलचर की बनमाली रोड पर अपना घर बना चुकी हैं और सिद्धार्थ के बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहतीं. अब पुलिस सिद्धार्थ दास की तलाश कर रही है.

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