मोदी सरकार का दिवाली धमाका: डीजल की कीमत में 3 रुपए 37 पैसे की कमी, डीजल भी अब बाजार के हवाले

By: | Last Updated: Saturday, 18 October 2014 1:54 PM

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि सरकार ने डीजल मूल्य नियंत्रण मुक्त करने का फैसला किया है. अब इसकी कीमत बाजार आधारित होगी. यह फैसला यहां केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया.

 

जेटली ने संवाददाताओं से कहा, “डीजल की कीमत अब बाजार आधारित होगी और लागत के आधार पर उपभोक्ताओं को उसकी कीमत अदा करनी होगी.”

 

उन्होंने कहा, “पेट्रोल मूल्य की तरह ही डीजल की कीमत अब बाजार से तय होगी. पिछले कुछ महीनों में डीजल की कीमत 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई जाती रही है.”

 

जेटली के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू मांग पर अब डीजल मूल्य निर्धारित होगी.

 

जेटली ने कहा, “डीजल की कीमत अब नीचे आएगी क्योंकि पिछले कुछ समय में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है.”

 

 सरकार ने प्राकृतिक गैस की कीमत एक नवंबर से बढ़ाकर 5.61 डालर प्रति इकाई कर दी है लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज को फिलहाल उसके केजी-डी6 क्षेत्र से उत्पादन में कमी की भरपाई होने तक 4.2 डालर का मूल्य ही मिलेगा.

 

वित्त मंत्री अरण जेटली ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आज कहा कि सरकार ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा मंजूर रंजराजन फार्मूले में कुछ बदलाव किया ताकि गैस मूल्य को 8.4 डालर से कम करके 5.61 डालर प्रति इकाई पर लाया जा सके.

 

अब बाजार के हवाले डीजल: क्या होगा इसका असर ? 

प्राकृतिक गैस मूल्य का नया फार्मूला एक नवंबर से प्रभावी होगा और मूल्य में प्रत्येक छह महीने में संशोधन किया जायेगा. गैस मूल्य में अगला संशोधन एक अप्रैल 2015 को होगा.

 

रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी-डी6 स्थित डी1 एवं डी3 गैस क्षेत्रों जहां उत्पादन आठ करोड़ घनमीटर प्रतिदिन :एमएमएससीएमडी: तक होना चाहिए था, पर फिलहाल इसमें 80 लाख एममएससीएमडी से भी कम उत्पादन हो रहा है. मंत्रिमंडल ने क्षेत्र में हो रही गैस उत्पादन के लिये फिलहाल मौजूदा 4.2 डालर प्रति एमएमबीटीयू का दाम ही बरकरार रखने का फैसला किया है.

 

गैस उपभोक्ता हालांकि संशोधित कीमत ही चुकायेंगे लेकिन रिलायंस को सिर्फ 4.2 डालर का दाम ही मिलेगा. शेष राशि अलग एस्क्रो खाते में जमा होगी.

 

आरआईएल को गैस की उंची कीमत तभी मिलेगी जब वह कानूनी रूप यह साबित कर देगी कि उसने क्षेत्र से जानबूझकर उत्पादन नहीं घटाया और उत्पादन में भूगर्भीय वजहों से गिरावट आई है जैसा कि उसने दावा किया है.

 

गैस की उंची कीमत से बिजली और उर्वरक संयंत्रों की परिचालन लागत बढ़ेगी वहीं बुनियादी ढांचा एवं खाद्य कीमतें बढ़ेंगी जिससे मुद्रास्फीति भी बढ़ेगी.

 

गैस की कीमत में प्रत्येक एक डालर की बढ़ोतरी से यूरिया उत्पादन लागत में 1,370 रपए प्रति टन और बिजली शुल्क में 45 पैसे प्रति यूनिट :देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में गैस परिचालित संयंत्रों की हिस्सेदारी सिर्फ सात प्रतिशत है: की बढ़ोतरी होगी.

 

साथ ही सीएनजी की कीमत में न्यूनतम 2.81 रपए प्रति किलो और पाइप के जरिए आने वाली रसोई गैस की कीमत में 1.89 रपए प्रति घन मीटर की बढ़ोतरी होगी.

 

गैस की कीमत इससे पहले तीन बार बढ़ाई गई है.

 

डीजल ब्रिकी से होने वाला नुकसान या अंडर रिकवरी समाप्त हो चुकी है और तेल कंपनियों को सितंबर के दूसरे पखवाड़े से मुनाफा होने लगा. कंपनियों को इसकी ब्रिकी से होने वाला मुनाफा (ओवर रिकवरी) 3.56 रपये प्रति लीटर तक पहुंच गया.

 

कीमतों के नियंत्रण मुक्त होने का मतलब है कि सरकार एवं ओएनजीसी सहित सार्वजनिक तेल उत्खनन कंपनियां अब डीजल पर सब्सिडी नहीं देंगी.

 

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने पेट्रोलियम सब्सिडी के लिए बजट में 63,400 करोड़ रपये का प्रावधान किया है जो कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत कम है. लेकिन इस बार कच्चे तेल के दाम में गिरावट को देखते हुये सब्सिडी बिल बजट प्रावधान से उपर निकलने की संभावना नहीं लगती.

 

मूल रूप से पेट्रोल व डीजल के दाम अप्रैल 2002 में नियंत्रण मुक्त किया गया था जबकि राजग सरकार सत्ता में थी. लेकिन राजग शासनकाल के आखिरी दिनों में जब कच्चे तेल के दाम बढ़ने लगे सरकारी नियंत्रण वाली प्रशासनिक मूल्य प्रणाली फिर से लौट आई.

 

इसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम जब आसमान छूने लगे तो मूल्यों पर सरकारी नियंत्रण बनाये रखा. हालांकि, जून 2010 में पेट्रोल के दाम नियंत्रण मुक्त कर दिये गये. उसके बाद से ही पेट्रोल के दाम नियंत्रणमुक्त हैं. तब सरकार ने डीजल के दाम भी नियंत्रण मुक्त करने का सिद्धांत: फैसला कर दिया था.

 

देश की कुल ईंधन खपत में डीजल की खपत 43 प्रतिशत तक है. जनवरी 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने डीजल की बिक्री पर होने वाले नुकसान को धीरे धीरे छोटी-छोटी वृद्धि के साथ समाप्त करने का फैसला किया. इस तरह डीजल के दाम में आखिरी 50 पैसे की वृद्धि सितंबर 2014 में हुई जिसके साथ डीजल बिक्री पर नुकसान पूरी तरह समाप्त हो गया.

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Web Title: Deregulation of Diesel Prices
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