देश का मूड अब भी नरेंद्र मोदी के साथ

By: | Last Updated: Wednesday, 27 January 2016 7:49 AM
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नई दिल्ली: मोदी सरकार के 20 महीने पूरे हो चुके हैं. इस दौरान जहां कई मुद्दों पर सरकार घिरी तो वहीं वाहवाही भी मिली. मोदी की पार्टी को कई राज्यों के चुनावों में जीत का मजा और हार की मायूसी दोनों का सामना करना पड़ा.

इन हालात में देश का मूड क्या है? देश में किसकी है लहर? अगर आज चुनाव हुए तो ताज किसके सिर सजेगा? क्या अच्छे दिन आए? अखलाक की मौत पर मोदी की खामोशी को लेकर जनता की क्या राय है? भारत का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्री कौन है?

एबीपी न्यूज-नीलसन के सर्वे में कई सवालों के जवाब चौंकाने वाले रहे.

कौन है सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता?

मोदी सरकार के कार्यकाल के 20 महीने हो गए हैं, लेकिन अब भी मोदी का सिक्का हर तरफ जमकर बोल रहा है. जब देश के सबसे लोकप्रिय नेता का सवाल आता है तो सबकी जुबानी पर एक ही नाम है और वो हैं मोदी. आधे से ज्यादा 58 फीसदी जनता ने नरेंद्र मोदी का देश का सबसे बड़ा लोकप्रिय नेता माना.

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उनके बाद हैं राहुल गांधी जिन्हें महज़ 11 फीसदी जनता सबसे लोकप्रिय नेता मान रही है. 4 फीसदी जनता की च्वाइस के साथ तीसरे और चौथे स्थान पर सोनिया गांधी और अरविंद केजरीवाल हैं. ममता को 3 फीसदी जनता ने सबसे लोकप्रिय नेता माना है. बिहार चुनाव में जीत के बाद सुर्खियों में रहे नीतीश कुमार को महज़ 2 फीसदी जनता ने ही देश का सबसे लोकप्रिय नेता करार दिया.

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क्या अच्छे दिन आए?

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लोकसभा चुनावी मुहिम के दौरान जिस नारे की गूंज सबसे ज्यादा रही वो है- “अच्छे दिन आएंगे”. लेकिन एबीपी न्यूज-नीलसन का सर्वे ये बता रहा है कि मोदी के 20 महीने की सरकार में अच्छे दिन नहीं आए. आधी जनता यानी 50 फीसदी का कहना है कि अच्छे दिन नहीं आए. 42 फीसदी को लगता है कि अच्छे दिन आ गए हैं.

क्या आपकी ज़िंदगी बेहतर हुई?

जब लोगों के सामने ये सवाल किया गया कि क्या मोदी सरकार के दौर में आपकी ज़िंदगी बेहतर हुई है तो आधे से ज्यादा 53 फीसदी ने माना कि कोई बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि, 30 फीसदी का कहना था कि उनकी ज़िंदगी बेहतर हुई है. 14 फीसदी की ये शिकायत थी कि उनकी ज़िंदगी खराब हुई है.

कैसा रहा प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी का कामकाज़?

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यहां मोदी के लिए सुकून देने वाली खबर है. आधे से ज्यादा 54 फीसदी का कहना है कि मोदी का कामकाज़ अच्छा या बहुत अच्छा है. 30 फीसदी ने औसत और सिर्फ 14 फीसदी ने खराब और बहुत खराब करार दिया.

मोदी के कामकाज़ से उत्साहित जनता एनडीए सरकार पर उतनी मेहरबान नहीं है. आधे से भी कम 46 फीसदी जनता एनडीए सरकार के कामकाज़ को अच्छा या बहुत अच्छा कह रही है. 35 फीसदी ने औसत और 16 फीसदी ने खराब और बहुत खराब करार दिया.

क्या विपक्ष मोदी सरकार को काम नहीं करने दे रहा है?

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इस मामले में जनता मोदी के साथ है. 44 फीसदी का कहना है कि विपक्ष ने मोदी सरकार को जीएसटी बिल पास करने से रोका. 30 फीसदी इस मत से सहमत नहीं है.

क्या नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा का समर्थन करते हैं?

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इस सवाल पर भी नरेंद्र मोदी चैम की सांस ले सकते हैं. 53 फीसदी लोग मोदी के साथ खड़े दिख रहे हैं. 35% लोग मोदी के साथ नजर नहीं आ रहे हैं.

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असहिष्णुता पर गुस्सा कैसा था?

बीते दिनों असहिष्णुता के सवाल पर देश में माहौल जबर्दस्त गर्म था. लोग दो खेमों में बंट गए थे. इस सर्वे में भी लोग दो हिस्सों में बंटे हुए हैं. 35 फीसदी का मानना है कि असहिष्णुता पर गुस्सा स्वत: स्फूर्त था, जबकि 38 फीसदी का मानना है कि ये गुस्सा बनावटी था.

अखलाख कांड पर मोदी को चुप्पी तोड़नी चाहिए थी?

बीफ की अफवाह पर दादरी के मोहम्मद अखलाक की हत्या पर मोदी की चुप्पी को जनता ने ग़लत माना है. 50 फीसदी जनता का कहना है कि इस मुद्दे पर मोदी को बयान जारी करना चाहिए था जबकि 27 फीसदी ने ऐसी जरूरत से इनकार किया.

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मोदी सरकार को राम मंदिर बनवाने की पहल करनी चाहिए?

जब से मोदी सरकार आई है दक्षिणपंथी समूह अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे हैं. इस सर्वे में 65 फीसदी लोगों की राय है कि मोदी सरकार को राम मंदिर के निर्माण के लिए कोशिश करनी चाहिए. 23 फीसदी इसके खिलाफ हैं.

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डीडीसीए विवाद पर अरुण जेटली को इस्तीफा देना चाहिए था?

अरविंद केजरीवाल के जरिए डीडीसीए घोटाले में वित्त मंत्री जेटली के नाम उछाले जाने पर जनता की राय बंटी हुई है. 30 का कहना है कि जेटली को इस्तीफा दे देना चाहिए तो 40 फीसदी का कहना है नहीं.

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क्या काले धन मुद्दे पर मोदी सरकार नाकाम रही?

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क्या मोदी राज में महंगाई पर लगाम लगी?

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क्या अमीरों को LPG सब्सिडी ना देने का फैसला सही है?

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क्या नरेंद्र मोदी सरकार में रोजगार बढ़ा?

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अब तक का सबसे अच्छा प्रधानमंत्री कौन है?

इस सवाल के जवाब में देश की जनता मोदी पर कुर्बान दिखी. मोदी की विदेश और आर्थिक नीति की प्रशंसा करते हुए 32 फीसदी जनता ने उन्हें सबसे बेहतरीन पीएम घोषित किया. इंदिरा गांधी दूसरे स्थान पर रहीं, 23 फीसदी जनता ने उन्हें सबसे अच्छा पीएम माना. अटल बिहारी वाजपेयी तीसरे पायदान पर रहे, उन्हें 21 फीसदी जनता ने मनपंसद माना. 9 फीसदी जनता ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को सबसे अच्छा पीएम माना.

अभी चुनाव हुए तो किसके खाते में कितने फीसदी वोट?
एबीपी न्यूज-नीलसन के सर्वे के मुताबिक देश का मूड अब भी नरेंद्र मोदी और एनडीए गठबंधन सरकार के साथ दिख रहा है. 43 फीसदी जनता की राय है कि अगर आज लोकसभा के चुनाव हुए तो वे सत्ताधारी बीजेपी को दोबारा जिताएंगे. 14 फीसदी जनता कांग्रेस की झोली भरती दिख रही है, जबकि महज़ 4 फीसदी जनता आम आदमी पार्टी को जिताने की बात कह रही है.

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साल 2014 के चुनाव में इस सर्वे में शामिल जनता की 46 फीसदी हिस्से ने बीजेपी को वोट किया था. 13 फीसदी कांग्रेस के साथ थी और तीन फीसदी ने ‘आप’ की झोली भरी थी.

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अभी चुनाव हुए तो किसके हिस्से में कितनी सीटें ?

सर्वे से साफ दिख रहा है कि 20 महीने बाद भी मोदी सरकार लोगों की पसंद बनी हुई है. अगर आज चुनाव हुए तो बीजेपी गठबंधन 301 सीटें जीतकर पूरी मजबूती से सत्ता पर दोबारा काबिज़ हो जाएगा, उसे सिर्फ 35 सीटें को नुकसान हो रहा है. यूपीए की झोली 108 सीटों से भर जाएगी, उसे 48 सीटों का फायदा होगा, लेकिन सत्ता की दौड़ से वो बहुत दूर ही रुक जाएगा. लेफ्ट पार्टियां 10 सीटों के इज़ाफे के साथ 20 पर पहुंच जाएगी. अन्य पार्टियों के खाते में 114 सीटें जाएंगे.

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2014 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन को 336, यूपीए को 60, लेफ्ट को 10 और अन्य को 137 सीटें मिली थीं.

कैसे हुआ सर्वे ?

एबीपी न्यूज नीलसन का ये सर्वे 8 से 13 जनवरी के बीच हुआ. कुल 16 हजार 732 वोटरों से राय पूछी गई. 19 राज्यों में 109 लोकसभा क्षेत्रों में लोगों से बातचीत की गई. सर्वे में हर लोकसभा सीट की तीन विधानसभा सीटों पर राय जानी गई है. ये सर्वे यूरोपियन सोसाइटी फॉर ओपिनियन एंड मार्केटिंग रिसर्च यानी ESOMAR के दिशानिर्देशों को पूरी तरह ध्यान में रखकर किया गया है.

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