बिहार के भागलपुर में देखिए मोदी के वादे और हकीकत

By: | Last Updated: Saturday, 9 May 2015 3:25 PM

नई दिल्ली: बिहार का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर भागलपुर की रेशम उद्योग में खास पहचान है. प्राचीन काल का विश्वविख्यात विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी यहीं था जहां दुनियाभर से छात्र पढ़ने आते थे.

 

लेखक शरद चन्द्र, फिल्म एक्टर दादा मुनि और मशहूर गायक किशोर का बचपन भी इसी शहर में गुजरा है. बिहार के बड़े शहरों में भागलपुर शुमार है.

 

पिछले साल 15 अप्रैल को जब पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी यहां आए थे तो स्थानीय भाषा में यहां के लोगों का अभिवादन किया था. उनका ये अंदाज रेशम नगरी के लोगों का दिल छू गया था.

 

नरेंद्र मोदी की एतिहासिक चुनावी रैली हुई थी. ढेरों वादे हुए थे. भागलपुर को तमाम सपने दिखाए गए थे. 2014 में केंद्र में मोदी की सरकार बनी और अब एक साल होने को है. सवाल ये है कि एक साल में कितना बदला है भागलपुर?

 

भागलपुर की जनता से किए गए मोदी के वादे

 

मोदी का वादा

 

रेशम उद्योग के अच्छे दिन आएंगे

 

वादे की हकीकत. पीएम मोदी ने जबसे ज्यादा चिंता रेशम उद्योग की बदहाली पर दिखाई थी. रेशम नगरी को एकबार फिर उसकी पहचान लौटाने का वादा किया था. लेकिन कारोबारियों की मानें को उनके वादे हवा-हवाई थे. रेशम कारोबारियों की हालत जस की तस है.

 

कारोबारियों को थोड़ी उम्मीद जगी जब केंद्र सरकार की तरफ से एक कलस्टर बनाने की योजना का एलान हुआ लेकिन लोग उसमें भी खामियां गिना रहे हैं. बीस साल पहले जो एक्सपोर्ट पांच सौ करोड़ तक होता था आज महज कुछ करोड़ में सिमट गया है. महंगाई ने रेशम उद्योग की कमर तोड़ दी है.

 

मोदी का वादा

 

रोजगार

 

वादे की हकीकत

एक साल बाद भी भागलपुर में रोजगार के लिए माहौल बनाने में केंद्र सरकार नाकाम रही है.

 

साल 2013 में सात सौ बेरोजगारों ने रोजगार नियोजन ऑफिस में अपना नाम दाखिल कराया था. साल 2014 में केवल तीन हजार चार सौ लोगों ने अपना नाम लिखाया. इनमें से मुश्किल से चार से पांच प्रतिशत को ही नौकरी मिल पाई. भागलपुर में रोजगार के मौके नहीं के बराबर रह गए हैं. बेरोज़गारी बढ़ रही है. यहां के लोगों को अभी भी अच्छे दिन का इंतजार है.

 

मोदी का वादा

मनरेगा

 

वादे की हकीकत

 

मनरेगा के मामले तो भागलपुर का ग्राफ पिछले साल के मुकाबले गिरा ही है. साल 2013-14 में लक्ष्य 27 लाख था जबकि 24 लाख को रोजगार दिया गया. साल 2014-15 में लक्ष्य 24 लाख 88 हजार था पर मोदी राज में सिर्फ 10 लाख 38 हजार को ही रोजगार मिल सका. इसके पीछे अधिकारी फंड की कमी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

 

भागलपुर के सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल आरजेडी से हैं. इनका रिपोर्ट कार्ड भी सिफर ही है. जनता का मुद्दा उठाने के लिए संसद में भी कम ही मौजूद रहते हैं. सांसद निधि का महज 20 फीसदी ही उपयोग किया जा सका है. यहां के लोगों की उम्मीदें मोदी सरकार पर टिकी थी लेकिन एक साल निकल जाने के बाद भी भागलपुर की तस्वीर में कोई बदलाव नहीं हो सका.

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Web Title: DESH ka mood bhagalpur
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