सैनिकों को सलाम: जहां ऑक्सीजन तक नहीं मिलती वहां कैसे लड़ते हैं हमारे जवान?

By: | Last Updated: Tuesday, 9 February 2016 6:42 PM
Detail information on Siachen Glacier

नई दिल्ली: सियाचिन का मोर्चा भारत के लिए भले ही नाक का सवाल है लेकिन ये मोर्चा अपने आप में हमारे जवानों के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं है. यहां कुदरत हमले करती है और इंसान को अपने जज्बे से बड़ी जंग लड़नी होती है.

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सियाचिन की ये तस्वीरें एक ऐसे सफेद खौफ की तस्वीरे हैं जहां जिंदगी का हर पल किसी बड़ी जंग से कम नहीं है. जहां तक नजर दौड़ाएंगे वहां तक बर्फ नजर आएगी. तापमान माइनस 25 से माइनस 40 डिग्री तक चला जाता है. ये वो तापमान है जहां इंसान का जिस्म इतना ठंडा हो सकता है कि उसकी मौत हो जाए. यही नहीं सियाचिन के जिस 22 हजार फुट पर भारतीय जवान पाकिस्तान से लगी एलओसी पर दिन रात तैनात रहते हैं वहां सांस लेने के लिए ऑक्सीजन भी नहीं मिलती.

कहने को तो सियाचिन का नाम सिया यानी गुलाब और चिन यानी घाटी से मिलकर बना है लेकिन ये गुलाबों की घाटी नहीं बल्कि हड्डियों को तोड़ देने वाली सर्द मौसम की सेज है. भारतीय सैनिकों के लिए यहां तीन चौकियां है जिसमें सबसे ऊंची और खतरनाक है नॉर्दन ग्लेशियर. यहां सैनिकों को तीन महीने तक लगातार मौसम से जूझकर देश की रक्षा करनी पड़ती है.

बेस कैंप से भारत की जो चौकी सबसे दूर है उसका नाम इंद्रा कॉल है और सैनिकों को वहां तक पैदल जाने में लगभग 20 से 22 दिन का समय लग जाता है.चौकियों पर जाने वाले सैनिक एक के पीछे एक लाइन में चलते हैं और एक रस्सी सबकी कमर में बंधी होती है ताकि अगर कोई खाई में गिरने लगे तो बाकी लोग उसे बचा सकें. लेकिन ये सब तक तक काम आता है जब तक मौसम सामान्य होता है. हिमस्खलन जैसे हादसों में तो सियाचिन जिंदगी और मौत के बीच जंग का मैदान बन जाता है.

हिमस्खलन जैसे हादसों की यादें सियाचिन में तैनात रह चुके सैनिकों को अब भी सिहरने पर मजबूर कर देती हैं. सियाचिन में चलने के लिए फिसलन भरी बर्फ है और दूसरी तरफ सर्दी से बचने के लिए सैनिक को कपड़ों की कई पर्ते लादनी पड़ती हैं. सबसे ऊपर जो कोट पहना जाता है उसे स्नो कोट कहते हैं जो बेहद भारी होता है.

सियाचिन में टेंट को गर्म रखने के लिए एक ख़ास तरह की अंगीठी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे स्थानीय भाषा में बुख़ारी कहते हैं. इसमें लोहे के एक सिलिंडर में मिट्टी का तेल डालकर उसे जला देते हैं. इससे वो सिलिंडर गर्म होकर बिल्कुल लाल हो जाता है और टेंट गर्म रहता है.

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सैनिक लकड़ी की चौकियों पर स्लीपिंग बैग में सोते हैं और ऑक्सीजन की कमी से मौत ना हो जाए इसलिए एक जवान रात में उन्हें कई बार जगा भी देता है. वहां नहाने के बारे में सोचा नहीं जा सकता और सैनिकों को दाढ़ी बनाने के लिए भी मना किया जाता है क्योंकि वहां त्वचा इतनी नाज़ुक हो जाती है कि उसके कटने का ख़तरा काफी बढ़ जाता है.

सबसे ऊंचाई तक जाने और सबसे ऊंचाई पर बने हेलिपैड पर लैंड करने वाले हेलिकॉप्टर का रिकॉर्ड इसी के नाम है लेकिन आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि यहां चीता हेलिकॉप्टर सिर्फ़ 30 सेकेंड के लिए ही रुकता है.

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