प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले दिग्विजय सिंह- हर हिंदू आतंकी संघी क्यों होता है?

By: | Last Updated: Saturday, 24 October 2015 3:02 PM
digvijay singh comment on rss in abp news special programe press conference

सवाल- 130 साल पुरानी आपकी पार्टी है जिसकी एक नीति रही है जिसके बारे में लोग सोचते पढ़ते रहे हैं, आपकी 2 महीने या 4 महीने पुरानी पार्टी नहीं है कि आपको जरूरत पड़े एक अमेरिका से आए हुए लड़के की, फिर आप एक कहानी सुना रहे हैं और आप खुद ही कह रहे हैं ऐपल का मतलब लोग सेब समझ सकते हैं फिर भी आप सुनाए जा रहे हैं, गंभीरता कब आएगी. कब ऐसी बात आएगी की हां लगे कि ये 130 साल पुरानी पार्टी है या आपको लगता है कि क्षमता ही नहीं है इन लोगों में.

 

जवाब-दिबांग जी गंभीरता आप हमारी नीति और कार्यक्रम में क्यों नहीं देखते हैं. 2004 में हमारी यूपीए सरकार बनी राइट टू इंफॉर्मेशन और राइट टू एजुकेशन जितने भी राइट्स हमने दिए इसमें गंभीरता नहीं थी? क्या मनरेगा के अंदर गंभीरता नहीं थी? जितने भी हमारे नीति कार्यक्रम बने जिसका विरोध ये लोग करते रहे उसके बाद इन्होंने स्वीकार क्यों किया? आधार कार्ड का विरोध स्वयं नरेंद्र मोदी जी ने किया था आज वो उसका श्रेय लेना चाहते हैं. आप इसमें गंभीरता नहीं देखते?

 

सवाल-एक बात आप बहुत साफ कह रहे हैं हम जो काम करते हैं उसमें गंभीरता है राहुल गांधी हैं कुछ भी अपने मन से कह देते हैं उनके कुछ लड़के हैं कुछ भी अपने मन से करते रहते हैं क्या आप ये कह रहे हैं?

 

जवाब-नहीं नहीं

सवाल- मैं जब आपसे राहुल गांधी का सवाल पूछता हूं तो आप कह रहे हैं राहुल गांधी बोल रहे होंगे लेकिन हमारे काम में गंभीरता ये है. आप राहुल गांधी का बचाव नहीं करना चाहते ऐसा लगता है?

 

जवाब- नहीं ऐसा नहीं है. मैंने ये कहां कहा कि उन्होंने जो भाषण दिया उसमें गंभीरता नहीं है. बात ये है कि हर व्यक्ति, हम भी जब भाषण देते हैं तो कई लोग हमें पॉइंट्स लिखकर देते हैं. तो उन्होंने उसका जुमला बता दिया वहां पर, आजकल जुमले का जमाना है.

 

सवाल-किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नेता की लोकप्रियता और उसके प्रभाव के आकलन का बड़ा पैमाना होता है उसकी वोट दिला सकने की क्षमता. कितने चुनाव और हारने के बाद आप लोगों को एहसास होगा कि राहुल गांधी वोट नहीं दिला सकते?

 

जवाब- अगर आप देखेंगे तो 2004 से राजनीति में राहुल गांधी आए. 2004 में हम चुनाव जीते 2009 में हम चुनाव जीते. 2004 से आजतक कई राज्यों में हम चुनाव जीते. जहां चुनाव जीत जाते हैं वहां आप उनको श्रेय नहीं देते लेकिन जहां चुनाव हार जाते हैं सारे के सारे आपलोग कहते हैं कि चुनाव राहुल जी की वजह से हार गए. ये क्या न्यायोचित है?

 

सवाल- राहुल गांधी को प्रमोशन मिलेगा उनके अध्यक्ष बना रहे हैं ऐसा हम 2 साल से सुनते आ रहे हैं और आपको कहा जाता है कि आप राहुल गांधी के करीब हैं इसका कभी खामियाजा नुकसान भुगतना पड़ता है? और अगर राहुल को प्रमोशन मिलता है तो कब मिलेगा?

 

जवाब- कांग्रेस पार्टी में हमारी जो लीडरशिप है कांग्रेस प्रेजिडेंट की और वाइस प्रेजिडेंट हमारे राहुल गांधी जी हैं वो सबके निकट हैं, हर आदमी अपने आप को उनके निकट होने का महसूस करता है. ये उनके लीडरशिप की क्वालिटी है. वो कांग्रेस प्रेजिडेंट बनें इसमें किसी को एतराज नहीं है. कई बार पत्रकार मुझसे बात करते हैं कि ये बुजुर्ग लोग नौजवानों को आगे नहीं आने देना चाहते. मैं हमेशा उनसे कहता हूं जरा उस बुजुर्ग का नाम बता दें तो नौजवान को नहीं चाहता है. कांग्रेस ने तो सदैव युवकों को

मौका दिया है. मुझे खुद को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था तब मैं 38 साल का था.

 

सवाल- क्या आपको नहीं लगता कि जो आपका केंद्र में नेतृत्व है वो प्रेरित, प्रोत्साहित नहीं कर पा रहा है. वो इतना लिजलिजा ढीला है यानी विचार तो छोड़िए वो भाषण में भाषा से लड़ता रहता है, भाषा उसकी इधर उधर जाती रहती है. मैं राहुल गांधी की बात कर रहा हूं. जिस तरह की हिंदी वो बोलते हैं उसको समझना मुश्किल हो जाता है. ये कहना क्या चाह रहे हैं कयास सा लगाना पड़ता है. आज के दौर में जब कम्युनिकेशन पर इतना जोर है जब आपके विरोधी एक ऐसे नेता हैं पीएम पद पर जो बड़ा अच्छा भाषण देते हैं, तरह तरह से अपनी आवाज को बदलते हैं और लोग उनकी बात को सुन रहे हैं. क्या आपको

नहीं लगता एक कमी लीडरशिप में भी है या आप पाते हैं कि आपकी लीडरशिप जो है वो सर्वश्रेष्ठ है. इससे बढ़िया लीडरशिप हो नहीं सकती.

 

जवाब – ये बात मानकर चलिए जितने भी इंग्लिश मीडियम से लोग पढ़कर आते हैं वो जब हिंदी बोलते हैं, मेरे साथ भी शुरू में ऐसा होता था, मैं इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़कर आया, इंजीनियरिंग कॉलेज में भी इंग्लिश मीडियम था. जब भाषण देना शुरू करते थे तो हम लोगों का थॉट प्रोसेस जो है वो अंग्रेजी में होता है और उसको वर्बल बोलने में हमको ट्रांसलेट करना पड़ता है इसलिए शुरू-शुरू में दिक्कत आती है. अब उनकी तुलना नरेंद्र मोदी जी से नहीं करनी चाहिए हालांकि मोदी जी के पहले के भाषण और अब के भाषण में बहुत फर्क है. अब कहां तक सही है मैं तो नहीं जानता, शीला जी बता सकती हैं कि परेश रावल जी ने उनको ट्रेनिंग दी है कि कैसे बोला जाए, कैसा भाव दिखाया जाए. ऐसी परेश रावल जी ने ट्रेनिंग दी, मैं नहीं जानता . अगर परेश रावल जी देना चाहें तो हम भी उनसे ट्रेनिंग लेना चाहते हैं.

 

सवाल- आप ये कह रहे हैं कि परेश रावल जी ने उनको ट्रेनिंग दी है तो राज बब्बर तो आपके पास भी हैं आप ट्रेनिंग यहां भी दिलवा सकते हैं.

 

जवाब-परेश रावल जो सफल हुए शायद राज बब्बर नहीं हो पाए. इसलिए कह रहा हूं कि अगर परेश रावल जी तैयार हों तो दिग्विजय सिंह भी उनसे ट्रेनिंग लेगा.

 

सवाल- तो आप कह रहे हैं कि कोशिश हुई थी और राज बब्बर असफल रहे

 

जवाब – नहीं, नहीं राज बब्बर का ऐसा कुछ रहा मैं तो ऐसा नहीं मानता

सवाल – इस जवाब से आप ये तो मान रहे हैं कहीं ना कहीं

जवाब- नहीं, डेवलप होने में टाइम लगता है. आप इंदिरा जी को ही ले लीजिए, राजीव जी को ही ले लीजिए

सवाल- आपको यहां बीच में रोक रहा हूं, आप कह रहे हैं कि टाइम लगता है तो मतलब कितना टाइम और

लगेगा, टाइम काफी नहीं लग गया?

 

जवाब – आप राहुल जी का 2005 का भाषण देख लीजिए और अब में फर्क पड़ा है.

सवाल- आप ये मुश्किल मान रहे हैं ना कि कांग्रेस नेता स्टूडियो में तो बात कर लेते हैं दौरे कर लेते हैं हवाई दौरे कर लेते हैं . राहुल गांधी भी हवाई दौरा कर लेंगे लेकिन वहां पर बैठकर कोई आंदोलन कर लेंगे या टिके रहेंगे.

जवाब – राहुल गांधी जी ने पदयात्राएं शुरू की हैं

सवाल – मैं दादरी की बात कर रहा हूं.

जवाब – दादरी में भी मैं तो उनको सुझाव दूंगा, अभी दिया नहीं है, कि उनको सांप्रदायिक सदभाव के लिए उनको वेस्टर्न यूपी के अंदर पदयात्रा करनी चाहिए.

सवाल – आप राहुल गांधी को एक अच्छा रणनीतिकार मानते हैं?

जवाब – राहुल गांधी 2004 में राजनीति में आए, उन्होंने चुनाव की प्रक्रिया संगठन में, स्टूडेंट विंग एनएसयू आई में और युवा कांग्रेस में शुरू की लेकिन उसमें कुछ खामियां रह गईं. चुनाव बाद जो हमारी कमेटी बनी युवा कांग्रेस की उसको नीचे की कमेटी बनाने का अधिकार नहीं मिला जिसकी वजह से वो संगठन 10-12 लोगों में समाहित हो गया. जबकि पहले मास उसके साथ जुड़ जाया करता था, वो परिवर्तन अब किया जा रहा है. वो मूल रूप से प्रजातंत्रीय मानस के व्यक्ति हैं और नॉमिनेशन के खिलाफ हैं.

 

सवाल- उनको आप अच्छा रणनीतिकार मानते हैं या नहीं?

जवाब – सबसे बड़ी स्ट्रैटिजी की बात आपको बताता हूं कि कांग्रेस में जो आज आवश्यकता है वो यही है कि हमारे वर्कर्स को हमारे लीडर्स को लोकल लीडरशिप चयन करने का अधिकार मिलना चाहिए. दिल्ली से ऊपर से थोपने के बजाय प्रक्रिया में हमलोग रीजनल लीडर को बिल्ड अप करें ये अपने आप में सही स्ट्रैटिजी है. इसलिए मैं उनको सही रणनीतिकार मानता हूं.

सवाल –  यानी कि जो इंदिरा गांधी के जमाने में हुआ कि जो केंद्र में नेता होगा वही बड़ा होगा उसी की छत्रछाया में सब रहेंगे उसमें एक बदलाव की जरूरत है?

 

जवाब- निश्चित तौर पर बदलाव की जरूरत है. पंडित जवाहर लाल नेहरू के जमाने में पहले जो सूचियां स्टेट से बनकर आती थीं उसमें कोई कमी बेसी नहीं हुआ करती थी.

 

सवाल – तो आपको क्या लगता है ऐसा होगा तो आपलोग जो गणेश परिक्रमा करते हैं दिल्ली आकर वो बंद होगी?

जवाब – निश्चिन तौर पर बंद होना चाहिए, मैं इसका पक्षधर रहा हूं. मैं खुद पीसीसी का प्रेजिडेंट बना था चुनाव हुए थे. मैं जब मुख्यमंत्री बना वोटिंग हुई थी.

 

सवाल- आप अपने पर ले रहे हैं तो मैं आपसे ही पूछता हूं आप क्यों नहीं जाते मध्य प्रदेश. एमपी में जो बड़े नेता हैं वो दिल्ली में गणेश परिक्रमा करते रहते हैं उनमें सबसे सक्षम आप दिखाई देते हैं. पर आप नहीं जाते क्योंकि आपका डीएनए है कि यहां गणेश परिक्रमा कीजिए प्रसाद पाइए और खुश रहिए.आप क्यों नहीं लड़ते?

जवाब – देखिए मैं सन 70-71 से कांग्रेस में आया. 18 साल तक मध्य प्रदेश की राजनीति में, टिकट बंटवारे, निर्णय में शामिल रहा. 2003 में जब चुनाव हुए सबने कहा दिग्विजय सिंह की वजह से चुनाव हार गए तो मैंने कहा ठीक है दिग्विजय सिंह अब 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ेगा अब आप लोग जिताइए. मैंने खुद को अलग कर लिया.

 

सवाल – तो 10 साल तो अब हो गए ना अब आपको वापस जाना चाहिए चूंकि आप कह रहे हैं फिजा बदल रही है पार्टी बदल रही है.

जवाब – अब नए लड़कों को मौका मिलना चाहिए. हो क्या रहा है 10 साल के अंदर नए लोग आ गए हैं नए लड़के, युवा आ गए हैं नई लीडरशिप आ गई है.

सवाल – दिग्विजय जी आप ये बात मुस्कुरा कर कहते हैं, अगर आपको लगता है कि नए लोगों को मिलना चाहिए तो आपको फिर रिटायर कर लेना चाहिए, आप राजनीति में भी रहेंगे और फिर राज्य में भी जाकर.

जवाब- मैंने मध्य प्रदेश की राजनीति से अपने आप को अलग कर रखा है. लीडरशिप भी अगर मुझसे कुछ पूछती है मध्य प्रदेश के बारे में तो मैं बताता हूं. अपनी तरफ से मैं मध्य प्रदेश कांग्रेस के बारे में बात नहीं करता हूं.

 

सवाल – ये बात भी आप मानिए कि लगातार तीसरी बार शिवराज चुनाव जीते हैं. आप लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सबसे भ्रष्ट सरकार है. तो भ्रष्ट सरकार तीन बार चुनाव जीतती है तो ये जो नया नेतृत्व जिसको आप कह रहे हैं तो क्या ये कांग्रेस को वहां समाप्त नहीं कर रहा ?

जवाब – मैं तो अपने आप को कह चुका हूं कि मैं अपनी मर्जी से कोई निर्णय नहीं लेता हूं. जो भी आदेश होता है उसका पालन करता हूं.

सवाल – क्या आप संतुष्ट हैं जो 2014 में हुआ यानी आप राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार 4 बड़े राज्य हैं. इन राज्यों में आपने जितनी सीटें जीती हैं उससे ज्यादा केरल में जीती हैं. इन चारों में आप 174 में केवल 6 सीटें जीत पाए हैं. तो क्या आप इसको ठीक मानते हैं.

जवाब- बिल्कुल नहीं, इसीलिए स्वयं सोनिया जी ने राहुल जी ने इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन वर्किंग कमेटी ने उसको ठुकरा दिया. चुनाव में हार जीत होती है.

 

सवाल – केवल हार की बात नहीं है दिग्विजय जी जिस तरह से कांग्रेस हार रही है एक तरह से एक के बाद एक राज्य में डेसिमेट हो रही है. जहां आप सत्तारूढ़ थे वहां तीसरे और चौथे नंबर की पार्टी बन रही है.

 

जवाब- ये संकट है मैं इसको स्वीकार करता हूं. कांग्रेस का ढांचा हमेशा मास मूवमेंट का ढांचा रहा है और कांग्रेस हमेशा मास की पार्टी रही है और हमलोग कैडर बेस पार्टी नहीं रहे हैं और यही हमलोगों के अंदर विचार मंथन होता रहा है कि इसको कैडर बेस बनाने की आवश्यकता है. अगर आप देखेंगे तो कोएलिशन पॉलिटिक्स चालू हुई संविद सरकारों से और संविद सरकारों से लेकर फिर 77 में हुई. केवल एक कैडर बेस पार्टी आरएसएस, जनसंघ और फिर जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी हर कोएलिशन में उसका फायदा होता है और वहीं हमारी मास बेस पार्टी हर कोएलिशन में हमारा नुकसान होता है. चाहे बिहार में

चाहे यूपी में हो. सबसे बड़ा नुकसान यूपी में हमारा तब हुआ जब हमने बीएसपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. तो कैडर बेस पार्टी को कोएलिशन में हमेशा फायदा होता है और हम जैसी मास बेस पार्टी को कोएलिशन में दिक्कत आती है. दूसरी बात, कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से 2-3 मुद्दों पर हमलोग क्लियर कट हैं. एक तो हम लोग किसी भी सांप्रदायिक दल के साथ समझौता नहीं करते. कांग्रेस वो पार्टी है जिसने कभी जनसंघ के साथ समझौता नहीं किया. कांग्रेस पार्टी वो है जिसने हमेशा से कमजोर तबके को महत्व दिया है. दलित-आदिवासी के पक्ष में काम किया है. और स्वयं को अधिकार संपन्न बनाने के बजाय हमने आम लोगों को अधिकार संपन्न बनाने का काम किया है. अब उसके अंदर मंडल के बाद एक कास्ट उभर कर सामने आई लेकिन कास्ट आधारित राजनीति में कांग्रेस हमेशा पिछड़ जाती है. कम्युनल पॉलिटिक्स में हम लोग हमेशा पिछड़ जाते हैं. क्यों कम्युनल पॉलिटिक्स में जहां पोलराइजेशन हुआ तो हिंदू हिंदू हो जाता है और मुसलमान मुसलमान हो जाता है और कांग्रेस जो दोनों को मिलाकर चुनाव लड़ती आई है वो हमेशा से पिछड़ जाती है. इसका मूल कारण यही रहा है कि हमलोग कम्युनल और कास्ट पॉलिटिक्स में पिछड़ते जा रहे हैं.

 

सवाल – मूल कारण आपको ये नहीं लगता कि कुल मिलाकर जिस तरह की राजनीति चली है और जिस तरह की आपकी स्थिति रही है उसमें दरअसल आप अपने किसी सिद्धांत के साथ खड़े नहीं रह सके ना कोई जो आपके वोटर हैं वो खड़े रह सके. आप केरल में मुस्लिम लीग के साथ खड़े हैं गठबंधन उनके साथ करते हैं. कुल मिलाकर आपकी एक ही रणनीति रही है कि सिद्धांत को छोड़ो स्ट्रैटिजी पर ज्यादा ध्यान रखो और स्ट्रैटिजी का इस्तेमाल करो सत्ता पाने के लिए.

 

जवाब – आपकी बात से कुछ हद तक मैं सहमत हूं. कांग्रेस को असर्ट(assert)करना चाहिए अपनी विचारधारा पर और इस शॉर्ट टर्म्स गेंस पर जाने के बजाय हमें लॉंग टर्म गेंस पर अधिक ध्यान देना चाहिए. सिद्धांत अगर छूट गया तो हमलोगों का जो अस्तित्व है वही खतरे में पड़ जाएगा.

 

सवाल – आपकी मास पार्टी है आप खुद ही कह रहे हैं जनाधारित पार्टी है तो आपको तो एक ट्रिगर पॉइंट पकड़ना चाहिए और एक राष्ट्रीय उछाल जैसी नरेंद्र मोदी ने ली वैसी अपेक्षा है कांग्रेस से.

 

जवाब – आप बिल्कुल सही फरमाते हैं एक इश्यू होता है लॉंग टर्म प्लानिंग और एक होता है आज का विषय क्या है. जैसे आज काउ स्लॉटर( गोहत्या) का विषय चला हुआ है . आज मीडिया बीजेपी से सवाल नहीं कर रहा कि लोगों को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा, रुपये का अवमूल्यन क्यों हो रहा है, निर्यात में केवल मास का निर्यात मोदी जी के राज में बढ़ रहा है बाकी का क्यों घट रहा है?इसपर क्यों चर्चा नहीं हो रही है? मेरा आपसे कहना है कि आप जो ट्रिगर पॉइंट कहते हैं ये अहम है. आपने बहुत अच्छी बात कही. कई बार ट्रिगर पॉइंट से पूरे देश में माहौल बन जाता है. तो उस ट्रिगर पॉइंट का राजनीतिक फायदा कैसे लेना है अब आप जैसे क्रिकेट खेल रहे हैं कैच उछला और मैंने कैच पकड़ लिया, छोड़ दिया तो निकल गया. इसलिए

दोनों चीजें साथ में होना चाहिए. एक तरफ लॉंग टर्म हम लोगों को प्लानिंग करना चाहिए दूसरा राजनीतिक मुद्दे को पकड़कर उसको सही दायरे में डालकर प्रभावशाली ढंग से उसका उपयोग करना चाहिए.

 

सवाल – अगर आपके नेता उस तरह के नहीं हैं जिस स्तर पर उनको होना चाहिए तो आपका जो पूरा  संगठन है वो भी एक तरीके से जंग खाया हुआ है. बहुत सालों से उसने कुछ किया नहीं. आपको ट्रिगर पॉइंट मिल भी जाता है तो भी आप उसका फायदा उठा नहीं सकते हैं . और आज के दौर में जो तेजी चाहिए फूर्ति चाहिए उसमें आप जंग खाई हुई 130 साल पुरानी बूढ़ी पार्टी सी लगते हैं.

जवाब – हमसे भी बूढ़ी पार्टियां और भी हैं विदेशों में. किसी भी संगठन में जंग नहीं लगता है. हमेशा एक प्रक्रिया चलती रहती है. सोच विचार में परिवर्तन होता रहता है. मूल बात ये है कि कांग्रेस को दृढ़ता से सिद्धांत पर अधिक ध्यान देना चाहिए शॉर्ट टर्म्स गेंस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए.

सवाल – क्या आप एंटनी से सहमत हैं कि आपने माइनॉरिटी से इतनी करीबी बढ़ाई कि आपके सेक्युलरिज्म पर भ्रम पैदा हो गया? क्या आप सहमत हैं?

जवाब – हर देश में बहुसंख्यक का धर्म और फर्ज होता है कि वो अल्पसंख्यक का विश्वास साथ लेकर चले.

सवाल – तो आप एंटनी की बात से सहमत नहीं हैं?

जवाब – एंटनी जी का परसेप्शन है कि हमको एंटी हिंदू के रूप में देखा गया उसका कारण है कि बीजेपी ने सोशल मीडिया पर और अपने प्रचार में जो संघ के कार्यकर्ता हैं वो घर घर जाकर एक ही बात कहते हैं कि देखिए मुसलमानों को इतनी तरजीह दी जा रही है. पब्लिकली वो बात करेंगे नहीं. आज उनकी रणनीति क्या है. बड़े दंगे नहीं कराएंगे, छोटे-छोटे दंगे करा रहे हैं ताकि स्पिन ऑफ इफेक्ट होता रहे. इसलिए ये चिंता का विषय है. अर्थव्यवस्था, अर्थनीति महत्वपूर्ण हैं, मेक इन इंडिया महत्वपूर्ण है लेकिन यूनाइट  इंडिया सबसे महत्वपूर्ण है.

सवाल – एक आदमी पर केस चलता है, सुप्रीम कोर्ट तक वो केस जाता है . आधी रात को जगकर भी सुप्रीम कोर्ट बात को सुनती है उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आता है. क्या इसपर भी सवाल उठना चाहिए?

जवाब – मैंने तो प्रशंसा की है. देखा नहीं आपने . मैंने प्रतिबद्धता की प्रशंसा की है.

सवाल – नहीं आपने कहा था साख दांव पर है.

जवाब – जैसी प्रतिबद्धता दिखाई है वैसी सभी केस में दिखाई जानी चाहिए. मैंने प्रशंसा की है.

सवाल – जब आप दोनों चीजों को जोड़ते हैं तब सवाल खड़े होते हैं. आप याकूब मेमन और उसी सांस में दूसरी बात भी करते हैं तो सवाल उठते हैं.

जवाब – मैंने कोर्ट की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की है. मैंने कहा यही प्रतिबद्धता सारी एजेंसियों को दिखानी चाहिए. इसमें क्या दिक्कत है?

सवाल – इसमें आपको दिक्कत दिखाई नहीं देती या देखना नहीं चाहते

जवाब – मेरा अनुरोध है कि आप मेरी भावनाओं को दूसरे नजरिए से देख रहे हैं . मैंने सुप्रीम कोर्ट की तत्परता, रात 2 बजे तक कोर्ट में सुनवाई हुई इसकी प्रशंसा की है.

सवाल – और फिर सवाल उठाए, आपको लगता है ऐसी ही बातें एंटनी साहब के दिमाग में रही होंगी?

जवाब – मैं नहीं जानता.

 

सवाल – मोदी सरकार के डेढ़ साल में आम जनता के मन में जो इतनी नाराजगी है . आपको नहीं लगता राहुल गांधी के नेतृत्व में वो जमीनी लड़ाई हमें दिखाई नहीं दे रही है. सोनिया जी के बारे में जो परसेप्शन है वो अब भी राहुल गांधी के बारे में नहीं है. राहुल के बारे में अब भी परसेप्शन है कि वो नॉन सीरियस कैप्टन हैं. क्या इस पर पार्टी में कोई चर्चा हुई है?

जवाब – मोदी जी ने हमें इतने मुद्दे दिए हैं उन मुद्दों पर सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रेस रिलीज से काम नहीं चलेगा. ये जवाबदारी हमारे नीचे संगठनों की है. प्रदेश कांग्रेस, जिला, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को इन सब बातों को जनता के बीच में ले जाना चाहिए. क्यों नहीं ले जाते हैं. क्या राहुल जी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की तरह काम करेंगे. कमियां लीडरशिप में नहीं कमियां हम लोगों के अंदर हैं. दिग्विजय सिंह को मैं अलग नहीं करता. मैं 4 राज्यों का महामंत्री हूं, जहां तक राहुल गांधी का सवाल है उनमें खूबियां हैं. उन्होंने जयपुर में कहा था कि कांग्रेस कैसे काम करती है मैं आज तक नहीं समझ पा रहा हूं. मैं इससे सहमत हूं कि इसमें कांग्रेस पार्टी को वो सारे कदम उठाने चाहिए जिससे की उसके ढांचे और काम के तरीके में सुधार हो.

 

सवाल – क्या कांग्रेस में हिंदुइज्म को लेकर दिक्कत है. राहुल गांधी को मंदिरों के दर्शन कर रहे हैं क्या ये एक कोशिश है उसको एड्रेस करने के लिए?

जवाब-  भारत बहुत धार्मिक देश है. और इसकी आत्मा को गांधीजी ने जितना समझा है किसी और ने नहीं समझा. रघुपति राघव में उन्होंने ईश्वर और अल्लाह दोनों को जोड़कर भारत की आत्मा को सही रूप में ढालने का प्रयास किया है. इसलिए धर्म को राजनीति से अलग तो नहीं रखा जा सकता लेकिन राजनीति से धर्म को नहीं चलाना चाहिए. इस देश में जहां विभिन्न जातियां, विभिन्न धर्म है इसको एक धर्म में जकड़ने से आप इस देश की आत्मा को मार देंगे.

 

सवाल – मैं परसेप्शन की बात पूछ रही थी जो पिछले चुनाव में हुआ, हिंदू-मुसलमान के लाइन पर वोट पड़े हैं उसको लेकर मैं कह रही हूं.

जवाब – हम चिंतित हैं. हालांकि आप देखेंगे बीजेपी को 31 फीसदी वोट मिले. मोदी जी का आप अगर भाषण देखेंगे गुजरात के मुख्यमंत्री और यहां प्रधानमंत्री के तौर पर भी देखिए. वो चुनाव के आखिरी तीन दिन से पहले तक विकास की बात करेंगे और आखिरी तीन दिन में कहीं मियां मुशर्रफ आ जाएंगे, कहीं मियां अहमद पटेल आ जाएंगे. कहीं पिंक रिवॉल्यूशन आ जाएगा. तो ये उनकी रणनीति है.

 

सवाल- धन्यवाद जो आपने सवाल पूछने से पहले ही अपनी तरफ से कह रहे हैं

जवाब – हाफिज जो है वो अपने आप में सम्मानजनक शब्द है, हाफिज भी साहब को ही माना जाता है. अगर हाफिज सईद कहने में आपत्ति नहीं है तो हाफिज सईद साहब कहने में आपत्ति क्यों ? दूसरी बात मेरा व्यंग्य था पाकिस्तानी सेना पर कि आपके डेढ़ सौ मीटर पर ओसामा जी रह रहे हैं और आपको पता नहीं लगा. अब उस बात को मीडिया ने ओसामा जी ओसामा जी चलाया जैसे मैं उनका सम्मान कर रहा हूं. जहां तक सौ टंच माल की बात है तो हमारे मध्य प्रदेश के मालवा में लोहे को सौ टंच माल कहा जाता है. शुद्धता को कहा जाता है. ये किसी महिला के ऊपर नहीं है. उसको आपने सौ टंच माल बना लिया.

सवाल – मीडिया ने अगर बनाया तो क्या कहा मैं आपसे सुनना चाहता हूं?

जवाब – मीडिया ने ये बता दिया कि उनको मैंने सौ टंच माल कहा है. माल जो मैंने कहा है सौ टंच प्योर गांधियन फॉलोअर है ये मैंने कहा था.

सवाल – ये तो आप मान रहे हैं ना कि इसको आपको समझाने में मुश्किल होती है. आपसे सवाल पूछे जाते हैं. आप तो परिपक्व नेता हैं जो भाषा जानते हैं. ये भी जानते हैं कि इसकी दूसरी ध्वनियां क्या क्या निकलती हैं. क्या आपको सावधानी नहीं बरतनी चाहिए?

 

जवाब – मैंने हमेशा जो कहा है सोच समझकर कहा है. बिना सोचे समझे कभी नहीं कहा है. आज भी मैं इसीलिए जाना जाता हूं , मैं आपका आभारी हूं कि आपने कहा कभी अपने बयान से पलटते नहीं हैं, मैं जीवन में कभी बयान देकर नहीं पलटा हूं, तीनों बयान मैंने जिस संदर्भ में कहा है मैं आज भी उस पर कायम हूं.

सवाल – आपने कहा सौ टंच माल लोहे को कहा जाता है

जवाब – नहीं मैंने लोहे को कहां कहा

सवाल – अभी आपने कहा

जवाब – सौ टंच माल वस्तु को, जैसे सोना है, चांदी है उसको कहा जाता है.

सवाल – जब आप भाषण दे रहे हैं तो जोहरी कुछ भी लिख सकता है क्या लोहा क्या सोना उसको आप बैठ कर जस्टिफाय नहीं कर सकते हैं.

जवाब – आप मेरे साथ न्याय नहीं कर रहे हैं , मैं कह रहा हूं जोहरी कोई लोहे का आंकलन करता है. जोहरी

आंकलन करता है सोना, चांदी और हीरे का. और उसमें अगर कोई सौ टंच कहता है तो क्या आपत्ति है.

सवाल – आप जितने भी बयान देते हैं जैसे बटला हाउस का तो आपकी पार्टी में भी इसका विरोध होता है कि पार्टी की छवि प्रो मुस्लिम होती जा रही है और कांग्रेस को उसका नुकसान होता है.

जवाब – बटला हाउस में मैं आज भी इस बात को कहता हूं कि किसी भी एनकाउंटर में पांचों गोलियां सिर में नहीं लगती हैं. वो आतंकी था नहीं था मैं नहीं जानता मैं कोई जांच एजेंसी नहीं हूं. इसलिए मैं उसमें शिकायतकर्ता रहा, उसमें जांच होनी चाहिए थी . अगर न्यायिक जांच हो जाती तो सब दूध का दूध पानी का पानी हो जाता . लेकिन हमारी गलती रही जो हमने उसकी न्यायिक जांच नहीं करवाई.

 

जवाब – मैं आज भी इस पर कामय हूं. उस शाम सात सवा सात बजे के बीच में मेरी हेमंत करकरे से फोन पर बात हुई थी. मेरे एक मित्र हैं जो करकरे को जानते थे . हेमंत करकरे ने मालेगांव ब्लास्ट में जो ईमानदारी से जांच की थी जिसमें प्रज्ञा सिंह ठाकुर, अभिनव भारत संघ और आरएसएस के जो कार्यकर्ता थे उनको उन्होंने पकड़ा, जो मैं 2002 से कह रहा था. आडवाणी जी भाषण में एक जमाने में कहा करते थे कि हर मुसलमान तो आतंकवादी नहीं हो सकता लेकिन हर आतंकवादी मुसलमान क्यों है तो मैं उनसे हमेशा इस बात को कहता था 2002 के बाद से कि हर हिंदू तो आतंकवादी नहीं हो सकता लेकिन हर हिंदू आतंकी जो पकड़ा जा रहा है वो संघी क्यों है? क्या कारण है, इस बात को लेकर मैंने उस बात को कहा था और मेरी बात प्रमाणित हुई. मुझे पागल कहा गया, मुझे झूठा कहा गया लेकिन मेरी बात प्रमाणित हुई . जब संघ के कार्यकर्ता पकड़े गए आतंकी गतिविधियों में. मालेगांव के दोनों ब्लास्ट, मोडासा आंध्र प्रदेश में मक्का मस्जिद धमाका , समझौता एक्सप्रेस का ब्लास्ट, अजमेर दरगाह शरीफ का क्या ये मुसलमानों ने किया था? ये संघियों ने किया था ये प्रमाणित है. सुनील जोशी जो कि संघ का कार्यकर्ता था जो मास्टरमाइंड था उसकी हत्या किसने की किसी कांग्रेसी ने की, किसी मुसलमान ने की, नहीं उसकी हत्या आरएसएस कार्यकर्ता ने की. मैं आज भी इस बात पर कायम हूं मेरी उनसे बात हुई थी. जब बोला गया कि दिग्विजय सिंह झूठ बोल रहा है तो मैंने कॉल रिकॉर्ड्स लाकर दिखाए थे कि हां मेरी बात हुई थी.

 

सवाल – उनकी पत्नी ने भी कहा कि कभी बात नहीं हुई और ये भी कहा कि इस मौके पर ऐसे बयान देकर हम पाकिस्तान की मदद करेंगे, उनको ऐसा बयान देने से बचना चाहिए.

जवाब – मैं उनकी पत्नी से कभी मिला नहीं हूं, मैं उनका सम्मान करता हूं. हेमंत करकरे से मेरी फोन पर बात होती थी. उन्होंने मुझे फोन पर बताया. एक संघ की पत्रिका निकलती है उसमें आरोप लगा है कि मेरे बेटे को दुबई से 50 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया है. दिग्विजय सिंह जी मेरा बेटा 17 साल का स्कूल में पढ़ता है. शिवसेना के अखबार सामना में लिखा जा रहा है कि हेमंत करकरे के घर पर थूककर आओ. इन चीजों से विचलित थे करकरे.

 

सवाल – जब ऐसी बातें आप करते हैं तो ये निजी राय क्यों बन जाती है. क्या आपकी पार्टी को डर लगता है कि आपके सच के पीछे खड़े रहेंगे तो हिंदुओं को दूर कर देंगे?

जवाब – मैं प्रैक्टिसिंग हिंदू हूं. स्वामी स्वरूपानंद जी का दीक्षित शिष्य हूं. एकादशी का व्रत करता हूं. बीजेपी का कोई नेता आकर खड़ा हो जाए मुझसे ज्यादा धार्मिक अगर हो तो. मैं इतना जानता हूं कि मैंने जो कुछ कहा है मैंने कांग्रेस की नीतियों के अंतर्गत ही बयान दिए हैं. और आज तक पार्टी ने मुझसे नहीं पूछा कि तुमने ये बयान क्यों दिया?

 

जवाब – पहली बात तो ये है हास्यास्पद कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री बोल रहे हैं सिगरेट की पर्ची पर आदेश देते थे. वो सिगरेट की पर्ची दिखा तो दें. जहां तक ये बात कर रहे हैं ये व्यापम की वजह से बहुत परेशान हैं दुखी हैं. व्यापम प्रकरण आप सबको मालूम है.

सवाल – आप व्यापम बोलते हैं लेकिन चुनाव आप हार जाते हैं.

जवाब – आप चुनाव को भ्रष्टाचार से क्यों जोड़ते हैं? भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके जेल जा चुके लोग भी चुनाव जीते हैं.

सवाल – आपको लगता है कि भ्रष्टाचार और चुनाव का कोई तालमेल नहीं है?

जवाब – बिल्कुल नहीं है. आप देख नहीं रहे है भ्रष्टाचार जिनके ऊपर चला वो चुनाव नहीं जीते क्या?

सवाल – 2014 में आप जो चुनाव हारे एक बड़ी वजह बोलते हैं कि कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के बहुत आरोप थे. आप इसको नहीं मानते हैं?

जवाब – उसके अंदर भ्रष्टाचार का कुछ अंग रहा है जिस तरह से प्रदर्शित किया गया. उसमें भी तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया गया.

सवाल – व्यापम पर आपने जो सबूत पेश किए थे शिवराज कहते हैं कि हाईकोर्ट ने वो सबूत खारिज कर दिए.

जवाब – वही कह रहा हूं. वो जो मेरे सवाल थे आज भी अनुत्तरित हैं. मेरे ऊपर 20-20 साल पुराने केस निकाला जा रहा हैं. मैं कहता हूं, मेरे कार्यकाल में जो मैंने निर्णय लिया वो संविधान के तहत मेरे अधिकार के अंदर मैंने निर्णय लिया. आज भी मैं उस पर कायम हूं. मेरे ऊपर जब भी किसी बीजेपी नेता ने आरोप लगाया चाहे उमा भारती हों या कोई हों, मैंने मानहानि मुकदमा किया है. आज तक मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए.

सवाल- कांग्रेस की जो छवि है कुल मिलाकर विकास विरोधी छवि बनती जा रही है? जैसे जीएसटी बिल को ले लीजिए, लैंड बिल को लीजिए. जो बिल जिसपर आप जान लड़ाते रहे और बीजेपी उसका विरोध करती रही . अब बीजेपी सत्ता में आ गई तो क्या सिर्फ विरोध के लिए विरोध है?

 

जवाब – पहली बात ये है विकास किसका? किसकी प्राथमिकता किसको पहला अधिकार. जहां तक जीएसटी का सवाल है कांग्रेस ने हमेशा जीएसटी का समर्थन किया है हमने कभी जीएसटी का विरोध नहीं किया. जीएसटी कमेटी में जब मसला गया तो हमारी दो-चार आपत्तिया हैं कोई बड़ी नहीं हैं जिनको सुलझाया जा सकता है. मैं तो इस बात पर हैरान हूं कि अरुण जेटली जी कहते हैं कि जीएसटी का कानून वही है जो कांग्रेस लाई थी तो उनको जवाब देना चाहिए कि फिर उसका विरोध क्यों किया आपने. जहां तक जमीन बिल का सवाल है इसमें कहीं कोई विकास विरोधी मुद्दा नहीं है.

सवाल – अगर आप जीएसटी की बात कर रहे हैं और जेटली बोल रहे हैं कि वही बिल हो तो क्यों आप पास नहीं करा देते? क्या आप सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं कि अगर ये वही बिल है और जब हम लाए थे तब आप विरोध कर रहे थे इसलिए अब हम विरोध कर रहे हैं?

जवाब – नहीं, कांग्रेस उस मानसिकता से ग्रस्त नहीं है. कांग्रेस जीएसटी को चाहती है क्योंकि जीएसटी देश की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है और खासकर कारोबारी समाज के लिए जरूरी है. मेरा उसमें यही अनुरोध है कि जैसा रेट वो बता रहे हैं 26 और 28 फीसदी तो मैं समझता हूं वो नामुमकिन हो जाएगा इसको 16 से 20 फीसदी से ज्यादा नहीं रखना चाहिए.

सवाल – बीफ या गोमांस पर जो राजनीति हो रही है उससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ रहा है उसके लिए कांग्रेस कोई रचनात्मक पहल करने जा रही है?

 

जवाब – निश्चित तौर पर करना चाहिए. सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए. मैं तो राहुल जी से अनुरोध करूंगा कि उनको सांप्रदायिक सदभाव और भाईचारे के लिए पूरा प्रोग्राम तय करना चाहिए. मुझे सीताराम केशरी बताते थे. वो दानापुर के थे. दानापुर में 1936-37 में गुरु गोलवलकर जी गए. गोलवलकर जी ने वहां लोगों से कहा कि जब तक ये महात्मा गांधी है ये हमलोगों को सफल नहीं होने देगा. क्योंकि महात्मा गांधी के रहते वो कटुता पैदा नहीं हो सकती थी. हिंदू और मुसलमान के बीच कटुता से ही संघ और बीजेपी की इस देश में आगे बात बनी है.

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