क्या सिर्फ दिवाली पर घरों की सफाई से हम साफ हो जाएंगे?

By: | Last Updated: Thursday, 23 October 2014 7:23 AM
Diwali_Chinese Items

नई दिल्ली: चाइनीज लाइटों से सजें मकान, तरह- तरह की मिठाईयां और पटाखें. क्या बस इन्हीं में सिमट कर रह गई है दीपावली? कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला दीपों का यह पर्व अब पूरी तरह से आधुनिकता का लिबास पहन चुका है.

 

हर्ष और उल्लास के इस पर्व ने वर्तमान समय में एक अलग ही रूप धारण कर लिया है. जहां एक तरफ दीपों का स्थान मोमबत्तियों और चाइनीज लाइटों ने लेकर इसके महत्व को कम करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, वहीं दूसरी तरफ परम्परा के तौर पर खेले जाने वाला जुआ अब घरों के बिकने का कारण बन चुका है.

 

धनतेरत से दीपावली के बीच लोग नए-नए कपड़े खरीदते हैं, सोने-चांदी के गहने और  बर्तन खरीदते हैं. नई वस्तुओं के स्वागत के लिए अपने आस-पास की भी सफाई करते हैं लेकिन सवाल है कि क्या एक दिन की सफाई से आ जाएगी सुन्दरता. मान लेते है कि इस सफाई से हमारे आस-पास का क्षेत्र चमक भी गया लेकिन उस गंदगी का क्या जो हमारे अन्दर बैठी है?

 

इसकी सफाई कौन करेगा और इससे बड़ा प्रश्न तो यह है कि कब होगा? क्योंकि वास्तव में इसी गंदगी ने हर जगह को मैला कर रखा है. चाहें वह सामाजिक हों या आर्थिक हों या राजनीतिक. हर क्षेत्र की गंदगी तभी साफ होगी जब हम करेंगे अपने अन्दर की सफाई.

 

अंधकार पर प्रकाश की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व पर मानों आज किसी की नज़र लग गई हो. आज-कल प्रकाश के इस पर्व पर होती है अंधकार की विजय.

 

समाज में व्याप्त जुआ, शराब जैसी कुरीतियों ने अंधकार रूपी बुराई को इतना अधिक बलवान बना दिया है कि प्रकाश रूपी विजय इसके सामने अपने घुटनें टेक देता है. क्या इसी तरह होता रहेगा समाज का पतन?

 

दीपावली भारत में मनाया जाने वाला एक ऐसा त्यौहार है जिसका केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक महत्व भी है. वैसे तो दीपावली को हिंदुओं का पर्व कहा जाता है लेकिन धीरे-धीरे इसका चरित्र राष्ट्रीय हो चला है और अब इसे देश के हर धर्म के लोग मनाते हैं.

 

दीपावली मनाने का इतिहास

 

दीपावली मनाने के पीछे कई कारण हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार 14 वर्ष का वनवास काटकर भगवान राम इसी दिन अयोध्या लौटे थे. तो उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से जगमग कर दिया था. तबसे लेकर हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है.

 

दीपावली के सामाजिक महत्व पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि कार्तिक मास के अमावस्या से पहले ही किसान की फसल तैयार हो चुकी होती हैं और फसल काटने के बाद उनके पास आनंद एवं उल्लास का पूरा समय होता है.

 

दीपावली का वैज्ञानिक महत्व भी है. वर्षा ऋतु के समय पूरा वातावरण कीट-पतंगों से भर जाता है. दीपावली के पहले साफ-सफाई करने से आस-पास का क्षेत्र साफ-सुथरा हो जाता है. घरों की पुताई करने से कई प्रकार के कीड़े-मकोड़े और मच्छर नष्ट हो जाते हैं और दीपावली के दिन दीपों की लौ से बचे हुए कीट-पतंगें भी मर जाते हैं.

 

दीपावली का शाब्दिक अर्थ होता है-दीपों की पंक्ति. इस त्यौहार में लोग दीपों को पंक्तिबद्ध रूप में अपने घर के अंदर और बाहर सजाते हैं. इस तरह यह प्रकाश का त्यौहार है. इस दिन लोग लक्ष्मी जी, जिन्हें पौराणिक हिन्दु ग्रंथों के अनुसार धन, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की देवी माना जाता है.

 

अमावस्या के अंधकार के बीच मनाए जाने के बावजूद भी दीपों से सजी माला से दुनिया इस तरह से जगमगाने लगती है कि मानो पूर्णिमा की रात हो. इस तरह यह त्यौहार हमें बताता है कि यदि हम सामूहिक प्रयास करें तो इस समाज से अंधकार रूपी बुराई को भी मिटाया जा सकता है.

 

आज जरूरत है कि हम समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार रूपी बुराई पर विजय प्राप्त करें नहीं तो भाई-चारा, प्रेम व हर्ष का संदेश देने वाला यह पर्व कहीं अंधकार रूपी बुराई के आगोश में न सम़ा जाए.

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