पांच पैसे के नुकसान के लिए कंडक्टर के खिलाफ मामले में डीटीसी ने 47 हजार रुपये से अधिक खर्च किए

By: | Last Updated: Friday, 31 October 2014 4:15 PM

नई दिल्ली: दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) 41 साल पहले एक पूर्व कंडक्टर द्वारा एक यात्री से कथित तौर पर टिकट के लिए पांच पैसे कम लेने को लेकर उसके खिलाफ मुकदमे पर 47 हजार 795 रुपये अब तक खर्च कर चुका है. डीटीसी ने दिल्ली हाई कोर्ट को आज यह जानकारी दी.

 

यह बात अदालत के उस सवाल के जवाब में न्यायमूर्ति हिमा कोहली के समक्ष कही गई जब डीटीसी से पूछा गया कि फरवरी 1982 से इस मामले में वह कितनी राशि खर्च कर चुकी है.

 

बस कंडक्टर रणबीर सिंह ने 1973 में एक महिला यात्री से 15 पैसे के टिकट के बदले में कथित तौर पर 10 पैसे लिए थे और यह घटना तब प्रकाश में आई थी जब टिकट चेकरों का एक उड़न दस्ता बस पर सवार हुआ था.

 

डीटीसी के उड़न दस्ते ने फैसला किया था कि उसने निगम के साथ धोखाधड़ी की और उसने लापरवाही दिखाई. इसके बाद विभागीय जांच की गई और उसमें सिंह को सरकारी खजाने को पांच पैसे का नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया गया.

 

सिंह को 15 जुलाई 1976 को इस आधार पर सेवा से बख्रास्त कर दिया गया था कि उन्होंने अपराध की पुनरावृत्ति की. सिंह ने इसे श्रम अदालत में चुनौती दी थी.

 

श्रम अदालत ने 1990 में उनके पक्ष में फैसला सुनाया था और डीटीसी को उन्हें पूरे वेतन के साथ बहाल करने का निर्देश दिया था.

 

डीटीसी ने श्रम अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने भी 2008 में डीटीसी की याचिका खारिज कर दी थी. डीटीसी ने इसके बाद मौजूदा समीक्षा याचिका के जरिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि सरकार के साथ धोखाधड़ी करने वाले कर्मचारी को खुला घूमने की छूट नहीं दी जानी चाहिए. परिवहन निगम ने पिछला बकाया वेतन देने की भी सिंह की मांग का विरोध किया है.

 

डीटीसी ने आरोप लगाया है कि सिंह ने कई यात्रियों को बिना टिकट के यात्रा करने की अनुमति दी.

 

हाई कोर्ट ने डीटीसी से पूर्व कंडक्टर रणबीर सिंह को कितनी बकाया राशि देनी है और कितनी राशि का भुगतान किया जा चुका है इसके बारे में भी जानकारी मांगी थी.

 

इसके जवाब में डीटीसी ने कहा है कि उसने कुल तकरीबन चार लाख रुपये की राशि में से सिंह को डेढ़ लाख रपये का भुगतान किया है. यह रकम सिंह को वेतन, ग्रेच्युटी, पेंशन, पे फिक्सेशन आदि के लिए 1976 में उनकी सेवा से बख्रास्तगी से लेकर 30 सितंबर 2002 को होने वाली उनकी सेवानिवृत्ति तक दी जानी थी.

 

डीटीसी ने अदालत को बताया कि सिंह को 2.72 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है.

 

इस बीच, सिंह के वकील ने डीटीसी की ओर से दायर हलफनामे का अध्ययन करने के लिए अदालत से समय मांगा. इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी को निर्धारित कर दी.

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