EARTHQUAKE_LALU

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By: | Updated: 26 Apr 2015 06:47 PM

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने पिछले दो दिनों से आ रहे भूकंप के झटके से आई त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि आज भी प्रभावित क्षेत्र के लोग दहशत में हैं. उन्होंने केन्द्र सरकार से मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग की है.

 

पटना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए रविवार को लालू ने कहा, "बिहार सहित देश के कई राज्यों में भूकंप के झटके आए हैं, जिससे भारी क्षति हुई है. केन्द्र सरकार को इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करना चाहिए तथा केन्द्र सरकार द्वारा मृतक के परिजनों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा देना चाहिए." उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को सारी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और प्रभावित लोगों को मदद करनी चाहिए.

 

उन्होंने कहा, "पिछले दिनों बिहार में आए तूफान और अब भूकंप में मृतकों के परिजनों के लिए बिहार सराकार ने चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है जो काफी कम है. राज्य सरकार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देना चाहिए."

 

लालू ने दार्शनिक अंदाज में कहा, "ऐसे में सरकार क्या कर सकती है. सरकार तो प्रभावितों को राहत ही पहुंचा सकती है, इसके लिए वैज्ञानिकों को आगे आना चाहिए."

 

नेपाल में बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री भेजेगी सरकार: नीतीश

 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को कहा कि नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए बिहार सरकार खाद्य सामग्री भेजेगी तथा बिहार के फंसे लोगों को लाने के लिए यात्री बस भेजेगी. भूकंप से आई तबाही और राहत कार्यो की समीक्षा के लिए आला अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए नीतीश ने कहा कि नेपाल में फंसे बिहार के लोगों को वहां से लाने के लिए बिहार सरकार बस भेजेगी.

 

उन्होंने कहा, "बिहार से दवा और चिकित्सकों का एक दल भी नेपाल भेजा जा रहा है. इसके अलावा बिहार से सटे नेपाल के इलाकों में बिजली व्यवस्था सुधारने में भी बिहार सरकार मदद करेगी." उन्होंने कहा कि इस संबंध में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत हुई है.

 

उन्होंने बताया कि बिहार के बहुत सारे लोग नेपाल में फंसे हुए हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में भूकंप प्रभावित लोगों को मदद पहुंचाई जा रही है. पीड़ितों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सभी मंत्रियों को क्षेत्र में रहने का निर्देश दिया गया है.

 

नेपाल में कुणाल देशमुख सुरक्षित, वतन वापसी का इंतजार

 

नेपाल में जिस समय 7.9 तीव्रता वाला भूकंप आया उस समय बॉलीवुड के फिल्म निर्देशक कुणाल देशमुख वहीं पर मौजूद थे. वह अभी भी नेपाल में हैं और सुरक्षित हैं. कुणाल अब मुंबई लौटने का इंतजार कर रहे हैं. फिल्म निर्माता महेश भट्ट ने ट्विटर पर लिखा, "अभी कुणाल और सोनाली से बात की है. वे दोनों काठमांडू हवाईपट्टी पर बैठे हैं और घर वापस आने के लिए विमान का इंतजार कर रहे हैं."

 

इससे पहले महेश भट्ट ने ट्वीट किया था, "क्या कोई कुणाल देशमुख को काठमांडू में ढूंढने में हमारी मदद कर सकता है? वह गोरकना फॉरेस्ट रिसॉर्ट में रह रहे थे."

 

महेश के ट्वीट का जवाब देते हुए निर्माता अश्विनी यार्डी और बालाजी टेलीफिल्म के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तनुज गर्ग ने इस बात की पुष्टि की कि कुणाल सुरक्षित हैं. यार्डी ने ट्विटर पर लिखा, "महेश भट्ट सर कुणाल सुरक्षित है. अभी उसने दादी से बात की है और कुणाल उनके संपर्क में बना हुआ है."

 

तनुज गर्ग ने देशमुख के सुरक्षित होने की जानकारी साझा करते हुए ट्विटर पर लिखा, "महेश भट्ट उसने मुझे सुबह संदेश भेजा था कि वह सुरक्षित है और मुंबई लौटने का रास्ता ढूंढ रहा है. संदेश सुबह करीब 9.00 बजे आया था." नेपाल में इस भूकंप के कारण अब तक 2300 लोगों की मौत हो चुकी है.

 

नेपाल त्रासदी पर भाजपा ने शोक जताया

 

केंद्र सत्तारूढ़ भारमीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता विजय जौली ने नेपाल में हुई भूकंप त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेपाल को राहत सामग्री भेजे जाने व अन्य किस्म के सहयोग के लिए तत्परता दिखाए जाने सराहना की.

 

उन्होंने कहा, "हम भारतीय नागरिक मजबूती से नेपाली भाइयों व बहनों के साथ हैं. इस प्राकृतिक आपदा से हुई मौतें व नुकसान पर हम बेहद दुखी व सदमे में हैं. नेपाल हमारा पड़ोसी व मित्र राष्ट्र है. हम उनके सुख-दुख में भागीदार की तरह हैं."

 

जम्मू-कश्मीर में नेपालियों को रिश्तेदारों की फिक्र

 

नेपाल में आए भीषण भूकंप में जम्मू एवं कश्मीर के दो लोगों के मारे जाने की खबर है. राज्य में काम कर रहे स्थानीय एवं नेपाली लोगों ने कहा कि वे नेपाल में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को लेकर फिक्रमंद हैं. राजधानी श्रीनगर में ऐसी खबरें हैं कि शनिवार को आए 7.9 तीव्रता वाले भूकंप में काठमांडू में ढाबा चलाने वाले एक पिता व उसके बेटे की मौत हो गई. वे जम्मू के सतवाड़ी के रहने वाले थे.

 

जम्मू में 1,500 से अधिक नेपाली नागरिक काम करते हैं. वे सभी भूकंप ग्रस्त नेपाल में अपने परिवारों और घरों को लेकर चिंतित हैं.

 

मूलरूप से नेपाल के गोरखा जिला निवासी दुर्गा बहादुर यहां एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में कार्यरत हैं. उन्होंने रविवार सुबह अपने परिवार से फोन पर बात भी की. दुर्गा ने कहा, "भूकंप में मेरी भाभी की मौत हो गई. उनका शव अभी भी मलबे में दबा हुआ है. घर पूरी तरह तबाह हो गया. मेरा भाई शेर बहादुर घायल हुआ है."

 

नेपाल के अरगा खेसी जिला निवासी गोपाल बहादुर जम्मू में एक निर्माणाधीन रिसोर्ट में काम करते हैं. उन्होंने कहा, "हमारा घर तहस-नहस हो गया, लेकिन मेरे सभी परिजन सुरक्षित हैं." उन्होंने कहा, "वे गांव से दूर खुले मैदानों में आसमान तले रह रहे हैं. उन तक अब तक कोई सहायता नहीं पहुंची है."

 

श्रीनगर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "हम विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं, जो नेपाल में काम करने वाले सभी भारतीयों की कुशलक्षेम के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. " वहीं, जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने नेपाल में आए जलजले शोक जताया. यह भूकंप अब तक 1,800 से अधिक लोगों की जानें ले चुका है.

 

राजस्थान में भूकंप के झटके, एक लड़की की मौत

 

राजस्थान के कुछ हिस्सों में रविवार को आए भूकंप के झटके महसूस किए गए. यहां के भरतपुर जिले में बलुआ पत्थर से बना एक अस्थाई छप्पर टूट गया जिसमें दबकर एक आठ साल की बच्ची की मौत हो गई जबकि सात अन्य बच्चे घायल हो गए.

 

नदबाई के उप-मंडल अधिकारी शौकत अली ने कहा, "ये सभी बच्चे भरतपुर जिले के नदबाई में एक अस्थाई छप्पर के भीतर खेल रहे थे, तभी छप्पर टूट गया. शुरुआती जांच में पता चला है कि यह छप्पर पत्थरों से बना था और भूकंप के कारण टूट गया."

 

उन्होंने कहा, "इस हादसे में आठ साल की एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि सात बच्चे घायल हो गए. घायलों की उम्र पांच से 11 साल के बीच है." राज्य के जयपुर, भरतपुर और अजमेर जिलों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए.

 

वैशाली नगर के रहने वाले आर.के. सिंह ने यहां कहा, "अपराह्न 12.42 बजे मेरे चारों ओर की चीजों ने हिलना शुरू कर दिया, तभी मैंने अपने घर से बाहर भागने की कोशिश की लेकिन तब तक भूकंप रुक चुका था. इसके कुछ मिनट बाद मुझे दोबारा हल्के झटके महसूस हुए."

 

तिलक नगर इलाके में रहने वाले अरविंद शर्मा ने कहा, "मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, तभी वह अचानक हिलने लगा. शुरुआत में मुझे एहसास ही नहीं हुआ कि क्या हो रहा है लेकिन जल्द ही मुझे समझ आ गया और मैं घर से बाहर निकल आया."

 

बड़ी-बड़ी इमारतों में रहने वाले ज्यादातर लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए. सबसे पहले यही लोग अपने घरों से बाहर खुले क्षेत्र में आए. भूकंप के कारण कुछ इमारतों में दरारें भी आ गई हैं.

 

यूपी में फिर लगे भूकंप के झटके

 

उत्तर प्रदेश के लोग अभी शनिवार के भूकंप के झटकों से उबर भी न पाए थे कि रविवार को फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए. झटके दोपहर 12.39 बजे कुछ सेकंड तक महसूस किए गए. भूकंप की तीव्रता 6.7 मापी गई. लगातार दो दिन भूकंप से प्रदेश में अफरातफरी का माहौल है.

 

रविवार की दोपहर भूकंप के झटके लखनऊ, मैनपुरी, गाजियाबाद, पीलीभीत, सोनभद्र, मऊ, कुशीनगर, बलिया, वाराणसी, कानपुर, झांसी, गोरखपुर, इलाहाबाद सहित कई जिलों में महसूस किए गए. इस दौरान लोग अपने घरों से निकलकर बाहर आ गए. इस दौरान उनमें दहशत साफ देखी गई. भूकंप के बाद सभी एक बार फिर से फोन पर अपनों का हालचाल लेने में जुट गए. इस दौरान मोबाइल नेटवर्क कुछ देर के लिए ठप हो गई.

 

राज्यपाल को राम नाइक रविवार को कुशीनगर में एक कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान जैसे ही भूकंप के झटके महसूस किए गए, सुरक्षाकर्मियों ने राज्यपाल को मंच से सुरक्षित उतारा.

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