महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी का शतक, 1990 के बाद सैकड़ा लगाने वाली पहली पार्टी

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 12:24 PM

नयी दिल्ली: नरेन्द्र मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानासभा चुनाव में सैकड़ा लगाते हुए 1990 के बाद ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है. इससे पहले 1990 में कांग्रेस ने राज्य में विधानसभा चुनाव में शतक लगाया था.

 

महाराष्ट्र में कांग्रेस और राकांपा के गढ में दखल बनाते हुए भाजपा 288 सदस्यीय विधानसभा में इस बार 120 से अधिक सीट जीतने की ओर अग्रसर है जो उसके पूर्व सहयोगी शिवसेना के लिए गहरे झटके के रूप में देखा जा रहा है.

 

शिवसेना को इस चुनाव से पहले तक राज्य के गठबंधन में ‘बड़े भाई’ का दर्जा प्राप्त था हालांकि चुनाव से ठीक पहले यह गठबंधन टूट गया. गौरतलब है कि 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 141 सीट मिली थी.

 

सैंकड़ा पार करने के बावजूद भाजपा अपने बूते सरकार बनाने के लिए 145 सीट के जादुई आंकड़े को हासिल नहीं कर पायी लेकिन उसका प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा. 2009 के विधानसभा चुनाव की तुलना में उसे करीब तीन गुणा अधिक सीटें प्राप्त हुई है. 2009 में भाजपा को 47 सीट मिलीं थीं.

 

इस चुनाव में भाजपा को प्राप्त सीटों की संख्या पिछले चुनाव में उसे और शिवसेना को मिलीं कुल संख्या से भी अधिक है. तब भाजपा और शिवसेना की सीटों की संख्या का योग 92 रहा था. इन आंकडों से यह संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र की सियासी बिसात पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जो दांव खेला था, वह सही बैठा है.

 

साल 1995 में भाजपा और शिवसेना को संयुक्त रूप से 138 सीट मिली थीं जब उन्होंने राज्य में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनायी थी. साल 1990 में भाजपा और शिवसेना ने पहली बार मिलकर चुनाव लड़ा था और भाजपा 104 सीट पर चुनाव लड़कर 42 सीट जीतने में सफल रही थी जबकि शिवसेना ने 183 सीट पर चुनाव लड़कर 52 सीट हासिल की थीं.

 

भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन के जनक माने जाते हैं. महाजन के दिवंगत बाल ठाकरे के साथ अच्छे संबंध थे और शिवसेना सुप्रीमो ने भाजपा को उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की थी. यह स्थिति हाल तक बनी हुई थी.

 

1985 में भाजपा ने 67 सीट पर चुनाव लड़ा था और 16 सीट जीतने में सफल रही थी जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस का प्रभाव चरम पर था. इस चुनाव में कांग्रेस ने 287 सीट पर चुनाव लड़ा और 161 सीट जीतने में सफल रही.

 

1999 में शरद पवार कांग्रेस से अलग हो गए और इसके बाद कांग्रेस के वोट में सेंध लग गई. बाद में पवार की राकांपा के साथ कांग्रेस की 15 साल तक गठबंधन सरकार रही.

 

इस साल लोकसभा चुनाव में हालांकि राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदला और भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों ने प्रदेश की 48 लोकसभा सीट में से 42 पर जीत दर्ज की.

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