दिल्ली: पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से किसको फायदा?

By: | Last Updated: Thursday, 12 February 2015 1:31 PM
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नई दिल्ली: आज अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की. बीजेपी आप की इस मांग पर ज्यादा कुछ कहने से बच रही है, लेकिन सवाल यह उठता है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से नफा होगा या नुकसान?

 

दिल्ली में ऐतिहासिक जीत के बाद अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से पहली बार मुलाकात की. दोनों के बीच करीब 14 मिनट तक चाय पर चर्चा हुई और जिस एक मुद्दे पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वो थी दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का मुद्दा.

 

आप नेता मनीष सिसोदिया ने मीडिया से कहा कि हमने प्रधानमंत्री जी से निवेदन किया कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए. केंद्र में भी बहुमत की सरकार है और दिल्ली में भी बहुमत की सरकार बनेगी तो अब वक्त आ गया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए.

 

मनीष सिसोदिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जी ने भरोसा दिया है कि हम इस पर विचार करेंगे. उन्होनें कहा कि हमने प्रधानमंत्री जी को शपथग्रहण समारोह में आने का भी न्यौता दिया लेकिन प्रधानमंत्री उस दिन दिल्ली से बाहर रहेंगे जिस वजह से उनका आना संभव नहीं है.

 

आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भी अपने घोषणापत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का वादा किया था लेकिन अभी वो इस मुद्दे पर अपने पत्ते नहीं खोल रही है.

 

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के मुताबिक इस मांग पर विचार विमर्श किया जाएगा.

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के दो पहलू हैं- संवैधानिक और व्यावहारिक. संविधान के मुताबिक दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है लेकिन इसकी अपनी विधानसभा है.

 

हालांकि संसद विशेष बहुमत से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे सकती है लेकिन लोकसभा में फिलहाल आम आदमी पार्टी के 4 सांसद हैं जबकि राज्यसभा में एक भी सांसद नहीं. मतलब इस मामले में वो पूरी तरह से बीजेपी के रहमोकरम पर है.

 

अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाता है तो इसका व्यावहारिक पहलू ज्यादा जटिल हैं. दिल्ली में राष्ट्रपति भवन है, संसद है, केंद्र सरकार है, केंद्र सरकार के तमाम प्रतिष्ठान हैं लेकिन अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो फिर ये सारे व्यावहारिक तौर पर दिल्ली सरकार के किरायेदार बनकर रह जाएंगे और ये सबको पता है कि मकान मालिक के सामने किरायेदार की क्या हैसियत होती है ?

दिल्ली को अगर पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाता है तो फिर पुलिस भी राज्य सरकार के अधीन होगी. अब जरा सोचिए कि अगर इस हालत में केंद्र और केजरीवाल सरकार की उसी तरह फिर टक्कर हो जाती है जिस तरह पिछले बार हुई थी तो फिर क्या तस्वीर होगी ? केंद्र किसके सहारे अरविंद केजरीवाल को धरने से उठायेगी ?

 

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