अपने जीवनकाल में ही बाल दासता खत्म करना मेरा मिशन: कैलाश सत्यार्थी

By: | Last Updated: Friday, 8 January 2016 2:24 PM
Ending Child Slavery In My Lifetime Is My Mission says Kailash satyarthi

नयी दिल्ली: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के लिए अब भारत और दुनिया भर में बच्चों के अधिकारों के लिए अपने जीवनकाल में बाल दासता को समाप्त कर देना मिशन बन गया है.

सत्यार्थी ने कहा ‘‘हम बच्चों की स्वतंत्रता की ओर अग्रसर हैं और मैं अपने जीवनकाल में ही बाल दासता का अंत देखूंगा. मानव जीवन के इतिहास में 35 साल बहुत ज्यादा समय नहीं होता और मेरे देश में तथा पूरी दुनिया में 35 साल पहले यह कोई मुद्दा ही नहीं था.’’ उन्होंने कहा ‘‘लोग सोचते थे कि दासता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है लेकिन अब लोगों ने यह मानना शुरू कर दिया है कि बच्चों को दास बनाया जा रहा है तथा हमें इसका अंत खोजना होगा.’’

Kailash Satyarthi

वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित सत्यार्थी की हिंदी में लिखी गई पहली किताब ‘‘आजाद बचपन की ओर’ का कल शाम उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक मिसरा ने यहां विमोचन किया.

यह किताब बाल अधिकारों के लिए सत्यार्थी के तीन दशक से चल रहे संघर्ष के दौरान हुए महत्वपूर्ण घटनाक्रम, अदालती फैसलों एवं प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप पर उनके ही लिखे गए लेखों का संकलन है.

सत्यार्थी ने कहा ‘‘यह मेरी पहली किताब है और मुझे इस बात पर गर्व है कि इसका प्रकाशन मेरी मातृ भाषा में हुआ है. किताब में लेखों का जो संग्रह है वह लेख मेरे जीवन के सर्वाधिक भावुक तथा कठिन समय में लिखे गए हैं जब मैं बच्चों को बचाने के लिए जी.जान लगा कर लड़ रहा था.’’

सत्यार्थी 1980 के दशक से बच्चों तथा उनके अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के लिए लड़ते रहे हैं. किताब बाल श्रम, उन्हें छुड़ाने के अभियानों, उनकी तस्करी, बाल दासता, उनके यौन उत्पीड़न और निरक्षरता के मुद्दों के बारे में है

प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह किताब विश्व पुस्तक मेला 2016 में उपलब्ध होगी.

अब सत्यार्थी की योजना ज्यादती के शिकार बच्चों को बचाने के लिए युवाओं को साथ लेने की है और इसके लिए जल्द ही वह एक ऐतिहासिक अभियान शुरू करने वाले हैं.

उन्होंने कहा ‘‘मैं युवाओं को साथ लेकर सर्वाधिक महत्वाकांक्षी अभियान पर काम कर रहा हूं. 10 करोड़ बच्चे विभिन्न तरह की हिंसा के शिकार हैं. इसलिए मैं 10 करोड़ युवाओं को इस अभियान से जोड़ना चाहता हूं. हम नयी पीढ़ी के हीरो बनाएं. आखिर कब तक हम हमारे हीरो चुनने के लिए सिनेमा का या क्रिकेट का सहारा लेंगे. हर युवक एक हीरो है और हमें उस हीरो की तलाश करनी है जो बाल दासता का अंत करने के लिए लड़ेगा.’’

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Ending Child Slavery In My Lifetime Is My Mission says Kailash satyarthi
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017