18 साल में 13 बेटियां, पिता को है अब भी दूसरे बेटे की उम्मीद!

By: | Last Updated: Monday, 10 August 2015 8:29 AM
father firm on having second son

तस्वीर- www.globalgujaratnews.in

नई दिल्ली: झारखंड के गरभदा तालूका इलाके के दाहोद जिले में एक आदिवासी दंपत्ति को उम्मीद थी कि उनकी होने वाली 16वीं संतान एक बेटा होगा, लेकिन दो अगस्त को वो एक बार फिर एक बेटी के मात-पिता बन गए. लेकिन 15वीं बेटी के जन्म के बाद भी पिता को दूसरे बेटे की उम्मीद है. इस दंपत्ति ने 2013 में पहले बेटे को जन्म दिया था.

 

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, रामसिंह एक गरीब किसान है और एक बार फिर उसे उम्मीद है कि वो एक बेटे के माता-पिता बनेंगे. लेकिन उनकी 33 वर्षीय पत्नी कानू संगोद अब आगे मां नहीं बनना चाहतीं. कानू चाहती हैं कि उनकी हिस्टरेक्टोमी (गर्भाशय निकालने वाली सर्जरी) सर्जरी कर दी जाए.

 

रामसिह के मुताबिक उनके समुदाय में एक व्यक्ति को अपनी बहनों की शादी, उनके बच्चे होने पर , उनके बच्चों की शादी होने पर भी बड़े तोहफे देने पड़ते हैं. मेरा बेटा अकेला है और अपनी सभी बहनों में सबसे छोटा है. उसके लिए अपनी बहनों के लिए इन सभी रीति-रिवाजों को अकेले निभाना नामुमकिन होगा. इसलिए मैं चाहता हूं कि अगर भगवान की दुआ से हमें दूसरा बेटा हो जाता है तो दोनों भाई इन जिम्मेदारियों को मिल-बांटकर निभा सकेंगे. अगर भगवान हमें इस बार भी बेटी देता है तो वो अगली बार हमें एक और बेटे से नवाज सकता है.

 

रामसिंह और कानू की शादी को 18 साल हुए हैं. 18 साल में कानू ने 15 बच्चों को जन्म दिया है. 14 में से उनकी दो बेटियां काली और ओवंती की बीमारी से मौत हो गई थी. उनकी 15 वीं संतान 2 अगस्त को हुई जो कि एक बेटी है.

 

33 साल की कानू का कहना है, ”मुझे अपनी सबसे छोटी बेटी का नाम अभी भी सोचना है. मैं चाहती हूं कि मेरे पति हमारे भविष्य के बारे में फैसला लें. अगर वो मुझे हिस्टरेक्टोमी सर्जरी की अनुमति दे देते हैं तो यह मेरे लिए बहुत अच्छा रहेगा. हमारे पास खुद को जिंदा रखने के लिए भी मुश्किल से पैसे हैं और मेरा शरीर अब और ज्यादा प्रेग्नेंसी के लायक नहीं रहा है. मैं उनके कारणों को समझती हूं. एक बेटे के लिए अपनी सभी बहनों की उम्मीदों पर खरा उतरना वाकई मुश्किल है. लेकिन मेरा दिल और शरीर अब ठीक हालात में नहीं है.”

 

कानू ने पहले कहा था कि सात बेटियों की मां बनने के बाद मेरे पति ने मुझसे कहा कि अगर वो बेटे को जन्म नहीं देती है तो वो किसी दूसरी औरत से शादी कर लेंगे. मैं एक अनाथ हूं और नहीं चाहती कि मैं अकेली हो जाऊं. इसलिए मैं बार-बार मां बनने को तैयार हुई जबतक कि मुझे बेटा ना हो जाए.

 

2011 की जनगणना के मुताबिक दाहोद में हर 1000 लड़कों पर 948 लड़कियां हैं जबकि 2001 में यह आंकड़ा 967 था. लेकिन रामसिंह चाहते हैं कि वे एक अंतिम कोशिश करेंगे क्या पता भगवान की मर्जी से उन्हें दूसरा बेटा मिल जाए.

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Web Title: father firm on having second son
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