कांग्रेस राज में हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए कम

By: | Last Updated: Thursday, 20 November 2014 3:40 AM

नई दिल्ली: अर्श से फर्श पर पहुंच चुकी कांग्रेस पार्टी के लिए आखिरकार एक अच्छी खबर आई है. येल यूनिवर्सिटी द्वारा की गई एक नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार रहते हुए दंगे कम हुए हैं.

 

इस रिसर्च के मुताबिक 1962 से 2000 के बीच विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के ज्यादा विधायकों की जीत की वजह से हिंदू-मुस्लिम हिंसा में कमी देखी गई.

 

इस रिसर्च में “Do parties matter for ethnic violence? Evidence from India” टाइटल से लिखे गए एक लेख में लिखा गया है कि एक अनुमान के मुताबिक एक अकेले कांग्रेस के विधायक के जीतने पर उस विधानसभा क्षेत्र में दंगों की संभावना में 32 प्रतिशत तक की कमी देखी गई. जब कांग्रेस को सभी चुनावों में हार का सामना करना पड़ा उस वक्त दंगों में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई. यानी 998 दंगों की तुलना में देश में 1,118 दंगे हुए.

 

जबकि दंगों में मरने वालों की संख्या में 46 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई. 30,000 की जगह 43,000 लोगों ने दंगो में अपनी जान गंवाई.

 

इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए येल के शोधकर्ताओं ने हिंदू-मुस्लिम दंगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. 1962 से 2000 के बीच 17 प्रदेशों के विधानसभा परिणाम और 315 जिलों के डेमोग्राफिक डाटा का यूज किया. इसी से पता चला कि कांग्रेस पार्टी के विधायक के सत्ता में रहते हुए सांप्रदायिक दंगों में कमी आई.

ताजा जनगणना के मुताबिक भारत की कुल आबादी में लगभग 80 प्रतिशत हिंदू हैं, जबकि देश में सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिमों की आबादी लगभग 13 प्रतिशत है.

 

कांग्रेस के राज में कम सांप्रदायिक हिंसा के लिए इस रिसर्च में मुख्य तौर पर तीन कारणों को दर्शाया है-

 

  • कांग्रेस ने बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटों को कम से कम सुरक्षित कर लिया है. मुस्लिम समुदाय के समर्थन के लिए भी कांग्रेस चुनावी प्रेरक का काम करती है.

 

  • कांग्रेस पार्टी केंद्र और राज्य दोनों में सालों तक सत्ता में रही है. शायद धार्मिक दंगों के प्रभाव के चलते ही कांग्रेस की गवर्नेंस साख कम भी हुई है.

 

  • हिंदू कैंडिडेट के ज्यादा सपोर्ट की वजह से भी हिंदू-मुस्लिम संघर्ष बढ़ सकता है और शायद इस वजह से भी कांग्रेस पार्टी के वोट आधार में कमी हुई है.

इस रिसर्च में आगे लिखा गया है कि आंकड़ों से पता चलता है कि सत्ता मे रहते हुए कांग्रेस पार्टी के नेताओं को हिंदू-मुस्लिम हिंसा रोकने के लिए दोनों तरफ से बराबर दवाब झेलना पड़ सकता है.

 

हालांकि शोधकर्ता का कहना है कि ये आंकड़े कुछ लोगों को खासकर कांग्रेस को चौंका सकते हैं क्योंकि लगातार कांग्रेस को देश में कई दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है, खासकर 1984 के सिक्ख दंगों के लिए.

 

इस रिसर्च की शुरुआत शोधकर्ताओं ने हिंदू-मुस्लिम संघर्ष का पर्दा उठा कर की है और ‘कांग्रेस पार्टी की सत्ता विरोधी लहर के औसत प्रभाव’ का विश्लेषण भी किया है. इस अध्ययन में सिर्फ विधायकों का विश्लेषण किया है क्योंकि विधायक स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक नेटवर्क में नोडल स्थिति में होते हैं.

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Web Title: Fewer_Hindu_Muslim_Riots_when_the_Congress_is_in_Power
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