राज्यपाल के साथ धक्का-मुक्की मामले में कांग्रेस के 5 विधायक सस्पेंड

By: | Last Updated: Wednesday, 12 November 2014 1:49 PM
Five Congress MLAs suspended

मुंबई: महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने बहुमत साबित कर दिया है, लेकिन इस विश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है. शिवसेना और कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्पीकर ने वोटिंग के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी और ध्वनि मत से प्रस्ताव को पास करा दिया. इसके बाद जब राज्यपाल अभिभाषण देने सदन पहुंचे तब विपक्ष ने जमकर हंगामा किया.

 

महाराष्ट्र विधानसभा के बाहर शिवसेना और कांग्रेस के नेताओं और विधायकों ने राज्यपाल का जमकर विरोध किया और उनकी गाड़ी घेर ली, इस दौरान राज्यपाल को चोट लगी, जिसके बाद स्पीकर ने कड़ा कदम उठाते हुए कांग्रेस के पांच विधायकों को दो साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया है.

 

सस्पेंड किए गए विधायक हैं राहुल बोंडरे, अमर काले, जयकुमार गोरे, वीरेंद्र जगपत और अब्दुल सत्तार. इन विधायकों का आरोप है कि मुख्यमंत्री फडणवीस का विश्वास मत अवैध है और इन्होंने बीस मिनट तक राज्यपाल विद्यासागर राव की गाड़ी रोके रखी.

 

जब राज्यपाल विधानसभा के अंदर अभिभाषण दे रहे थे तब भी विपक्ष विरोध जता रहा था. सारा मामला वोटिंग की जगह ध्वनिमत से विश्वास मत हासिल करने का है.

 

बीजेपी में फूट

 

शिवसेना का दावा है कि बीजेपी में फूट पड़ गई है और फडणवीस और गडकरी के गुट बन गए हैं और नितिन गडकरी समर्थक विधायक प्रस्ताव के खिलाफ में वोट देने वाले थे इसलिए सरकार ने ऐसा कराया.

 

स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए शिवसेना और कांग्रेस राज्यपाल से शिकायत करने जा रही है. दोनों पार्टियों ने इस विश्वासमत को लोकतंत्र का गला घोंटने वाला बताते हुए फिर से बहुमत साबित करने की मांग की है.

 

महाराष्ट्र विधानसभा में अभी कुल 287 विधायक हैं. बीजेपी के पास 121, शिवसेना के पास 63, कांग्रेस के पास 42 और एनसीपी के पास 41 विधायक हैं. सदन में अन्य विधायकों की संख्या 20 है.

 

शिवसेना और कांग्रेस सरकार के खिलाफ में थी. लिहाजा बिना एनसीपी के समर्थन के बहुमत साबित कर पाना संभव नहीं था. प्रस्ताव के वक्त सदन में एनसीपी का रुख क्या रहा इसको लेकर सस्पेंस बना हुआ है.

 

एनसीपी सरकार को समर्थन की बात पहले से कह रही थी, लेकिन चुनाव में जिस तरीके से एनसीपी के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया गया था उसके बाद से समर्थन का प्रस्ताव बीजेपी के लिए न तो निगलते बन रहा था और ना ही उगलते.

अब सवाल ये है कि क्या एनसीपी के समर्थन को देखते हुए स्पीकर ने ध्वनि मत से विश्वास प्रस्ताव को पास कर दिया . या फिर बीजेपी के विधायकों में एकता नहीं होने का जो दावा शिवसेना कर रही है उसके डर से विश्वास प्रस्ताव को पास कराया गया?

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