...महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी के बीच विवाद की ये वजह है!

By: | Last Updated: Monday, 22 September 2014 10:46 AM

नई दिल्ली : महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना का गठबंधन खतरे में पड़ता दिख रहा है . बीजेपी अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस ने साफ साफ कह दिया है कि अब बीजेपी की ओर से शिवसेना से बातचीत की पहल नहीं होगी . महाराष्ट्र बीजेपी ने कल राज्य भर के पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है . आज बीजेपी के महाराष्ट्र चुनाव प्रभारी ओम माथुर और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुलाकात होने की खबरें थी लेकिन अब ये मुलाकात नहीं हो रही है .

 

बीजेपी शिवसेना गठबंधन रहेगा या टूटेगा इस पर फैसला मंगलवार को हो सकता है. बीजेपी 130 सीट पर अड़ी है लेकिन शिवसेना 119 से ज्यादा देने को तैयार नहीं. गठबंधन के मुद्दे पर दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ महाराष्ट्र के प्रभारी राजीव प्रताप रूडी, ओम माथुर और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की बैठक हुई. इसके बाद रूडी ने कहा कि 130 सीट पर लड़ने से कम कुछ मंजूर नहीं. रूडी ने इशारों ही इशारों में ये भी कहा कि झगड़ा सीट का नहीं सीएम की कुर्सी का है. बीजेपी ने मंगलवार को राज्य भर के पार्टी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है जिसमें गठबंधन को लेकर रणनीति पर चर्चा होगी.

 

दिन बीतता जा रहा है और शिवसेना-बीजेपी गठबंधन पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा. ना तो सीटों पर समझौता हुआ और न ही अलग होने का फैसला हुआ. हालांकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से बात करके गठबंधन बनाए रखने को कहा लेकिन शिवसेना सूत्रों ने फोन पर बात होने की खबर खारिज कर दी.

 

दिल्ली में रविवार की रात बीजेपी के बड़े नेता चर्चा पर चर्चा करते रहे . उम्मीद थी कि कोई रास्ता निकल आएगा . लेकिन पार्टी नेताओं के जिस तरह के तल्ख तेवर दिख रहे हैं उससे बात बनने की उम्मीद कम और बिगड़ने की ज्यादा दिख रही है . बीजेपी के महासचिव राजीव प्रताप रूडी ने आज फिर कहा है कि हम महागठबंधन चाहते हैं .

 

कहने को तो दोनों पार्टियों के विवाद की जड़ में वो सीटें हैं जिसपर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार कभी नहीं जीते . लेकिन पर्दे के पीछे कहानी कुछ और बताई जा रही है . सूत्रों की माने तो असली वजह मुख्यमंत्री की कुर्सी है . जिस पर शिवसेना तो खुलकर दावेदारी कर रही है लेकिन बीजेपी पत्ते नहीं खोल रही .

 

बीजेपी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावेदारी के लिए जो गणित बिठा रही है उसके पीछे की वजह पिछले चुनाव नतीजे हैं . 1995 से शुरुआत करें तो  शिवसेना 171 पर लड़कर 73 सीटों पर जीती थी. जबकि बीजेपी 117 पर लडकर 65 पर जीती. यानी शिवसेना 43 फीसदी सीट जीती जबकि बीजेपी को 56 फीसदी सीटों पर जीत मिली .

 

1999 के चुनाव में शिवसेना 171 पर लड़कर 69 पर जीती. जबकि बीजेपी 117 पर लड़कर 65 पर जीती . इस साल शिवसेना का स्टाइक रेट 40 फीसदी रहा जबकि बीजेपी को 56 फीसदी सीटें हासिल हुई .

 

फिर 2004 चुनाव में 171 पर लड़कर शिवसेना  62 सीटें पर जीती जबकि  बीजेपी 117 पर लडकर 54 पर जीती . 36 फीसदी सीटें शिवसेना ने जीतीं जबकि 46 फीसदी बीजेपी ने. 2009 में 169 शिवसेना के 45 और बीजेपी 119 के 46 विधायक जीते. इस बार शिवसेना के 27 फीसदी जीते जबकि बीजेपी के 38 फीसदी.  

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Web Title: for cm candidate bjp and shiv sena gight each other!
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