former bihar cm supports open book exams

former bihar cm supports open book exams

By: | Updated: 23 Mar 2015 04:18 PM

पटना: मैट्रिक परीक्षा के दौरान नकल को लेकर समूचे देश में भले ही बिहार की किरकिरी हुई हो और जनता दल-युनाइटेड सरकार की भद्द पिटी हो, लेकिन इस पर तरह-तरह के बयानों का दौर जारी है. इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने एक अजीबोगरीब बयान देकर इस मामले को फिर गरमा दिया है. उन्होंने कहा कि उनका राज रहता तो छात्रों को परीक्षा हॉल में किताब ले जाने की छूट देती.

 

बक्सर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष ने अपने अंदाज में कहा, "अगर हमारा राज होता तो हम परीक्षा में किताब ही उपलब्ध करा देते. अरे भई बच्चे जो पढ़े हैं, वही तो लिखेंगे. राजद शासनकाल की परीक्षा में पूरी आजादी रहती थी."

 

उन्होंने शिक्षा मंत्री प्रशांत कुमार शाही के बयान पर भी कटाक्ष किया और खास लहजे में कहा, "जब सरकार कदाचार रोक ही नहीं सकती है तो हमको (राजद सरकार) को क्यों हटाया गया?" अपनी अगली बात में हालांकि लालू परीक्षा में नकल से चिंतित लगे. उन्होंने कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था कैसी हो गई है, यह सभी लोग देख रहे हैं. इस तरह पास करने से छात्रों को क्या फायदा होगा?

 

एक सच यह भी है कि राजद शासन के दौरान परीक्षाओं में धड़ल्ले से नकल चली थी और उस दौरान परीक्षा पास करने वालों का उपहास यह कहकर उड़ाया जाने लगा था कि ये 'लालू डिवीजन' से पास हैं. इधर, लालू के दोरंगे बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव ने कहा, "लगता है, बिहार में जंगल राज पार्ट-2 आ गया है."

 

उन्होंने कहा कि एक ओर मंत्री नकल रोकने में असमर्थता जता रहे हैं और दूसरी ओर सरकार को समर्थन दे रही एक पार्टी के अध्यक्ष परीक्षा में किताब देने की बात कर रहे हैं. इसी से बिहार की शिक्षा व्यवस्था का हाल समझा जा सकता है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर भाजपा की सरकार बनी तो परीक्षा कदाचार मुक्त होगी.

 

वैशाली जिले के एक उच्च विद्यालय में परीक्षार्थियों तक चिट पहुंचाने के लिए जान जोखिम में डालकर ऊंची-ऊंची दीवारों व खिड़कियों पर चढ़े अभिभावकों की तस्वीरें टीवी चैनलों, सोशल मीडिया व अखबारों में आने के बाद कदाचार को लेकर बिहार की किरकिरी हो रही है. शिक्षा मंत्री शाही का बयान आया कि परीक्षा में कदाचार रोकना अेकेले सरकार के बूते के बाहर की बात है.

 

उल्लेखनीय है कि बिहार में 14 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं मैट्रिक परीक्षा में शामिल हो रहे हैं. इसके लिए 1200 से ज्यादा परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं.

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