पीएम पद के लिए प्रणब मुखर्जी मुझसे ज्यादा काबिल थे : मनमोहन सिंह

पीएम पद के लिए प्रणब मुखर्जी मुझसे ज्यादा काबिल थे : मनमोहन सिंह

ये बात किसी से छुपी नहीं है कि 2004 में जब यूपीए की सरकार बन रही थी तब प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेता होने के नाते पीएम बनने के सबसे बड़े हकदार थे.

By: | Updated: 14 Oct 2017 10:58 AM

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह कहकर सबको चौंका दिया है कि सोनिया गांधी ने 2004 में उन्हें प्रधानमंत्री तो बना दिया लेकिन प्रणब मुखर्जी उस पद के लिए ज्यादा काबिल थे. मनमोहन सिंह ने ये बातें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा लिखी गई किताब 'द कोलिशन ईयर्स 1996 - 2012' के विमोचन के मौके पर कही, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी मौजूद थे.





मंच पर मौजूद प्रणब मुखर्जी की तरफ मुखातिब होते हुए मनमोहन ने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास इस मामले में कोई विकल्प नहीं था और ये बात प्रणब मुखर्जी जानते हैं. उन्होंने कहा, 'मैं राजनीति में घटनावश आया था जबकि प्रणब बाबू अपनी मर्ज़ी से...2004 में जब सोनिया जी ने मुझे पीएम बनाया तो मैं जानता था कि प्रणब जी मुझसे ज़्यादा काबिल थे लेकिन मेरे पास इस मामले में कोई विकल्प नहीं था. प्रणब मुखर्जी अगर ऐसा सोचते हैं कि उन्हें पीएम बनना चाहिए था तो इसमे गलत कुछ भी नहीं है.'


मनमोहन सिंह ने इस मौक़े पर प्रणब मुखर्जी की खूब तारीफ भी की. उनके साथ अपने संबंध को याद करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने उन्हें हर मौके पर सहयोग दिया. ये बात किसी से छुपी नहीं है कि 2004 में जब यूपीए की सरकार बन रही थी तब प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेता होने के नाते पीएम बनने के सबसे बड़े हकदार थे. कहा जाता है कि सोनिया गांधी के पति और पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के समय की कुछ घटनाओं के चलते सोनिया ने प्रणब मुखर्जी की जगह मनमोहन सिंह को पीएम बना दिया. जिसके बाद प्रणब मुखर्जी और सोनिया गांधी के रिश्तों में उतार चढ़ाव जगजाहिर है.


'द कोलिशन ईयर्स 1996 - 2012' शीर्षक से लिखी गई इस क़िताब में प्रणब मुखर्जी ने 1996 की संयुक्त मोर्चा सरकार से लेकर यूपीए-2 कार्यकाल तक के राजनीतिक इतिहास के बारे में लिखा है. किताब में 1996 से 2012 तक की राजनीति, घटनाओं के ज़रिए समझाने की कोशिश की गई है.


विमोचन के मौके पर सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी , यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव, डीएमके नेता कनिमोई समेत यूपीए गठबंधन के कई सहयोगी भी मौजूद थे.


मौके की नजाकत को भांपते हुए अखिलेश यादव ने किताब की प्रशंसा के बहाने भविष्य की राजनीति का भी संकेत दे दिया. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रणब दा की किताब आगे होने वाले गठबंधन के लिए काफी उपयोगी साबित होने वाली है.

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