घड़ी की वजह से मिली हथकड़ी लेकिन अब ऐसे बदल गए दिन

By: | Last Updated: Thursday, 17 September 2015 4:36 PM
Full controversy Ahmad Mohammad

नई दिल्ली: आपको याद होगा अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत को नसीहत दी थी कि भारत को धार्मिक कट्टरता पर काबू पाना चाहिए लेकिन आज उसी अमेरिका से आई है एक ऐसी खबर जिसमें 14 साल एक मासूम बच्चे को सिर्फ इसलिए हथकड़ियां पहना दी गईं क्योंकि उसके स्कूल में अपनी बनाई घड़ी ले जाने की गलती की थी. उसका नाम था अहमद मोहम्मद और इस नाते उस पर बम बनाने की इल्जाम लगा दिया गया.

 

वो भी कहता रहा है कि वो बम नहीं बना रहा था, वो आतंकवादी नहीं है. लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी. 14 बरस की उम्र में उसकी कलाईयों को हथकड़ी से जकड़ दिया गया. पुलिसवालों ने पिता को फोन करने की गुजारिश को खारिज कर दिया गया और स्कूल ने उसे तीन दिन के लिए स्कूल आने पर पाबंदी लगा दी.

 

क्या सिर्फ इसलिए कि उसका नाम था अहमद मोहम्मद और वो उस अमेरिका में रह रहा था जो 9/11 के उस हमले के लिए आज भी एक कौम को जिम्मेदार मानकर बैठा है?

 

इस सवाल का जवाब आपको अहमद मोहम्मद के उन 24 घंटों में मिलेगा जिसमें उसने अपना सबसे बुरा वक्त बिताया है. अहमद मोहम्मद टेक्सस में रहता है और उसने उम्र के 14 वें बरस में कदम रखा है. अहमद के पिता ने इसी बरस उसे टेक्सस के इस मैकआर्थर स्कूल की नवीं कक्षा में दाखिल कराया है.

 

टेक्सस में उसका कमरा देखकर आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि अहमद मोहम्मद सामान्य छात्र नहीं है. इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और गजट बनाने का सामान उसकी मेज पर बिखरा रहता है. अहमद पलक झपकते ही इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने में महारत रखता है. ये उसका शौक भी है जुनून भी और दरअसल यही उसका जुर्म भी है.

 

अपने कमरे में रविवार की रात उसने अपने पेंसिल बॉक्स को एक डिजिटल घड़ी में बदल दिया. इंटरनेट की मदद से पहले सर्किट बनाया और फिर उसे बिजली से चलने लायक बनाया. उसकी ये घड़ी सही वक्त भी बताने लगी. ये सब उसने 20 मिनट में किया था लेकिन उसकी बनाई इस घड़ी ने उसके अगले 24 घंटों को जीवन की सबसे बुरी याद में बदल दिया.

 

उत्साह से भरा हुआ अहमद सोमवार की सुबह अपने मैकऑर्थर हाईस्कूल के निकला था. अपने स्कूल बैग में उसने पेंसिल बॉक्स में डिजाइन की गई डिजिटल घड़ी मौजूद थी.

 

स्कूल पहुंचते ही वो सबसे पहले अपनी इंजीनियरिंग की टीचर के पास पहुंचा और अपने हाथों से बनी डिजिटल घड़ी दिखाई इस उम्मीद में कि उसकी पीठ थपथपाई जाएगी, शाबाशी मिलेगी. लेकिन सुनिए अहमद की टीचर ने क्या कहा. ये बहुत अच्छा है लेकिन मेरा मशविरा है कि तुम इसे किसी दूसरे टीचर को मत दिखाना.

 

अहमद ने बात मान ली और अपनी क्लास में वापस चला गया. अपनी बनाई घड़ी को उसने फिर से बैग में रख लिया था लेकिन अंग्रेजी की अगली क्लास में उसकी घड़ी से बीप की आवाज आने लगी.

 

इस आवाज ने पूरी क्लास को चौंका दिया और अंग्रेजी की टीचर को भी. अंग्रेजी टीचर के पूछने पर अहमद ने उन्हें भी अपनी बनाई घड़ी दिखाई और पूरी बात बता दी. जरा सुनिए अब अंग्रेजी टीचर ने क्या कहा ये घड़ी तो नहीं लगती. ये तो किसी बम जैसी नजर आ रही है.

 

अहमद को शाबाशी नहीं शक की नजर से देखा गया. टीचर ने घड़ी जब्त कर ली और मैकऑर्थर स्कूल के प्रिंसिपल से अहमद की शिकायत कर दी.

 

अहमद को अचानक 6वें पीरियड में प्रिंसिपल के कमरे में बुलाया गया. जहां मौजूद अमेरिकी पुलिस के अधिकारी ने अहमद के साथ किसी अपराधी की तरह बर्ताव किया.

 

पुलिसवाला – अच्छा तो यही है वो लड़का, मैं भी यही सोच रहा था.

पुलिसवाला – तो तुम बम बनाने की कोशिश कर रहे थे?

अहमद – नहीं मैं तो घड़ी बनाने की कोशिश कर रहा था.

पुलिसवाला – अच्छा.. मुझे तो ये किसी फिल्म में दिखाए जाने वाले बम जैसा ही दिख रहा है.

 

इसके बाद उसे हथकड़ी पहना दी गई. अहमद को अपराधी की तरह सीधे स्कूल से पुलिस के हेडक्वार्टर ले जाया गया और वहां उसके फिंगरप्रिंट भी लिए गए. उन पलों की दहशत भरी कहानी अब अहमद कभी नहीं भूल पाएगा.

 

पुलिस की पूछताछ के बाद बम बनाने का जो आरोप मैकऑर्थर रोड की तीन टीचरों ने लगाया था वो खारिज हो गया. अहमद को छोड़ दिया गया लेकिन स्कूल ने उसे तीन दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया.

 

अब अमेरिकी पुलिस अहमद की गिरफ्तारी को स्कूल और देश की सुरक्षा से जोड़कर जरूरी बता रही है. पुलिस के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आखिर 14 साल के बच्चे को हथकड़ी क्यों लगाई गई?

 

अहमद के साथ हुई इस घटना के बाद उसके पिता मोहम्मद ने इस पूरी घटना को अमेरिका में पलने वाले नस्लवाद से जोड़ा है. दरअसल अहमद मोहम्मद और उनका परिवार अफ्रीकी देश सूडान का रहने वाला है. पिता मोहम्मद दो बार सूडान के राष्ट्रपति चुनाव में दावेदारी कर चुके हैं और वहां की एक राजनीतिक पार्टी के उपाध्यक्ष भी हैं. 1980 में वो अमेरिका के टेक्सस आए थे और तब सड़क के किनारे हॉटडॉग बेच कर परिवार चलाते थे. पिछले 25 साल में अपनी जीतोड़ मेहनत से वो जेट टैक्सी नाम की टैक्सी कंपनी के मालिक बन चुके हैं लेकिन वो मानते हैं कि अमेरिका ने अभी भी उन्हें नहीं अपनाया है.

 

इस घटना के बाद अहमद ने अपना जो दर्द बयां किया है वो भी मुस्लिमों के लिए आम अमेरिकी के रवैये को ही दिखाता है. मुझे लगा कि मैं कोई अपराधी हूं. मुझे लगा कि मैं कोई आतंकवादी हूं. मुझे लगा कि मैं वो सब कुछ हूं जो मुझे मेरे नाम की वजह से कहा जाता रहा है. मिडिल स्कूल में मुझे आतंकवादी कहा जाता था. मुझे बम बनाने वाला कहा जाता था और ये सब मेरे धर्म और नस्ल की वजह से होता था.

 

महज 14 साल की उम्र में जो कुछ अहमद के साथ हुआ क्या वो उसे भूल पाएगा और वो भी तब जब इस घटना के बाद भी स्कूल माफी मांगने को तैयार नहीं है.

 

अब बदल गए दिन

एक घड़ी बनाने पर हुई गिरफ्तारी ने सूडानी मूल के अमेरिकी छात्र अहमद मोहम्मद की जिंदगी को दो तरह से बदल दिया है. एक तो वो कच्ची उम्र में धर्म के नाम पर होने वाले भेदभाव को शायद ही भुला पाए लेकिन एक और ना भूलने वाली बात भी हुई है. वो ये कि उसकी हथकड़ी लगी तस्वीर सामने आते ही अहमद का साथ देने के लिए पूरी दुनिया उठ खड़ी हुई. ये समर्थन अहमद का खोया हुआ हौसला उसे लौटा सकता है.

 

अहमद मोहम्मद की इस तस्वीर ने उसकी जिंदगी को बदल दिया है. 14 साल की उम्र में उसने पहली बार अपना ट्विटर एकाउंट खोल लिया है. शायद इसलिए कि उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी तकलीफ को सारी दुनिया ने समझा है और उसे सबका शुक्रिया अदा करना है.

 

अहमद का पहला ट्वीट है कि आपके समर्थन के लिए शुक्रिया. मैं नहीं सोचा था कि लोगों को एक मुस्लिम लड़के की तकलीफ से भी फर्क पड़ता है.

 

अहमद ने दूसरा ट्वीट किया कि मेरे साथियों, समर्थकों आपका शुक्रिया. हम इस नस्लवादी भेदभाव को मिलकर खत्म कर सकते हैं और इसे दोबारा होने से रोक सकते हैं.

 

अहमद नस्लभेद का शिकार हुआ था. उसका परिवार, उसके पिता, मां और दादी, एक छोटी बहन उसके साथ हुए अन्याय के हर पल में साथ खड़े थे लेकिन इसके बाहर मौजूद बाकी दुनिया से ऐसे समर्थन की उम्मीद उसे नहीं थी.

 

सबसे बड़ा समर्थन तो उसे अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिला. सबसे पहले व्हाइट हाउस ने मीडिया में अहमद के समर्थन का ऐलान किया.

 

इस ऐलान के बाद आया अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का ये ट्वीट जो पूरे अमेरिका के लिए और खासतौर से अहमद के स्कूल के लिए एक संदेश था. अच्छी घड़ी है अहमद. क्या तुम इसे व्हाइट हाउस में लाना चाहोगे? हमें तुम्हारे जैसे बच्चों को विज्ञान से जुड़ने की प्रेरणा देनी चाहिए है. यही तो अमेरिका को महान बनाता है.

 

विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी अहमद का हौसला बढ़ाया. उन्होंने ट्वीट में लिखा पूर्वाग्रह और भय हमें सुरक्षित नहीं बनाते, वो हमें पीछे धकेलते हैं. अहमद, उत्सुक रहो और बनाते रहो.

 

ये हौसलाअफजाई दरअसल अहमद के टूटे हुए सपनों को जोड़ने की कोशिश है और अहमद भी अब जिंदगी की नई पारी शुरू करना चाहता है. उसने व्हाइट हाउस जाने का न्योता स्वीकार कर लिया है.

 

अहमद के सपनों को पर देने के लिए फेसबुक के मालिक जुकरबर्ग ने भी उसे फेसबुक के ऑफिस आने का न्योता दिया है. अहमद अगर तुम कभी भी फेसबुक के दफ्तर आना चाहो तो मुझे तुमसे मिलने में खुशी होगी.

 

ये चंद शब्द अहमद के लिए मरहम का काम कर रहे हैं. अहमद को अब वो हौसला मिल गया है कि अब वो अपने स्कूल के खिलाफ भी आवाज उठा रहा है.

 

स्कूल बदले या ना बदले अहमद के सपनों को सहारा देने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है. न्यूयॉर्क में नई खोजों के लिए होने वाले सालाना समारोह का न्योता उसे मिल गया है. ये समारोह अगले हफ्ते ही शुरू होने वाला है और अहमद को खासतौर से इस समारोह में अपनी घड़ी के साथ आने के लिए कहा गया है.

 

यही नहीं गूगल जैसी कंपनी के साइंसफेयर विंग ने भी अहमद को बुलावा भेजा है. हाय अहमद, हम तुम्हारे लिए इस हफ्ते के अंत में होने वाले गूगल साइंस फेयर में एक सीट सुरक्षित कर रहे हैं. क्या आना चाहोगे?  अपनी घड़ी जरूर लाना.

 

बॉक्स क्लाउड कंपनी के सीईओ ने तो अहमद को अपने साथ काम करने की पेशकश कर दी है. कंपनी के सीईओ एरॉन लेवी ने ट्वीट में लिखा है अहमद मुझे पता है कि तुम्हें व्हाइट हाउस और फेसबुक का न्योता मिल चुका है लेकिन मैं जानता हूं कि तुम भीतर से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो. तो बॉक्स में चले आओ.

 

दुनिया भर से अहमद को मिल रहे सहयोग और न्योतों को छापने वाली वेबसाइट वायर्ड डॉट कॉम को भी अब अहमद का साथ चाहिए. अहमद जब तुम सिलकन वैली और सैन फ्रेंसिस्को घूमकर लौट आओ तो हमारे दफ्तर आना. हमारे यहां कुत्ते भी हैं, गैजेट्स भी और ढेर सारी दूसरी चीजें भी. हमें अच्छा लगेगा अगर हम मिलकर कुछ बेहतरीन डिजिटल घड़ियां बना सकें.

 

अहमद के घर में मौजूद उसके सपनों की ये दुनिया अब एक नई सुबह का इंतजार कर रही है. इस उम्मीद के साथ कि दोबारा उस जैसे किसी बच्चे के हाथ नफरत और डर से जकड़ ना दिए जाएं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Full controversy Ahmad Mohammad
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Ahmad Mohammad America Obama
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017