अरब की सुंदर लड़की को दुल्हन बनाने का सपना दिखाकर भारत के लड़कों की जान ले रहा है IS?

By: | Last Updated: Monday, 23 November 2015 3:38 PM
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नई दिल्ली: देश की सुरक्षा एजेंसियों को मिली एक खुफिया रिपोर्ट से जानकारी मिली है कि अब तक कुल 23 भारतीय खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े चुके हैं. IS में शामिल हुए 6 भारतीय मारे जा चुके हैं.

 

मारे गए 6 लोगों में सबसे ज्यादा 3 लोग कर्नाटक से जबकि 1 उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, 1 महाराष्ट्र के ठाणे और 1 तेलंगाना के आदिलाबाद का रहने वाला बताया जा रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकी संगठन में शामिल होने वाले लोगों को अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता है.

 

अरब देश से शामिल होने वालों को आतंकी वारदाद करने की बड़ी जिम्मेदारी मिलती है. जबकि भारत, पाकिस्तान जैसे एशियाई देशों से जाने वालों को कमजोर माना जाता है. इसीलिए इनका इस्तेमाल आत्मघाती दस्तों के तौर पर किया जाता है.

 

दुनिया में दहशत का दूसरा नाम बन चुका सुन्नी चरमपंथी संगठन आईएस भारत में भी अपने पसार रहा है. आतंकी संगठन आईएस तरह-तरह के लालच देकर भारत के लड़कों को अपने संगठन का हिस्सा बना रहा है.

 

वो सुख सुविधाओं का लालच भी देता है. और अरब की सुंदर लड़की को उनकी दुल्हन बनाने का सपना भी दिखाता है. लेकिन भारत की सुरक्षा एजेंसियों के हाथ जो जानकारी लगी है उसके मुताबिक आईएस भारतीय लड़ाकों को बेहद कमजोर मानता है.

दरअसल आतंकी संगठन आईएस में भर्ती होने वाले लड़ाकों की कई कैटेगरी होती है. और भारत समेत पाकिस्तान, बांग्लादेश, नाइजीरिया और सूडान से आईएस में भर्ती होने वाले लड़ाकों को सबसे निचली कैटेगरी के माना जाते हैं.

 

इसीलिए अरब के लड़ाकों को एशिया के लड़ाकों की तुलना में बेहतर हथियार और बारूद, रहने की अच्छी व्यवस्था और अच्छा वेतन दिया जाता है. जबकि भारत पाकिस्तान जैसे देशों से जाने वाले लड़ाकों को छोटे छोटे बैरकनुमा कमरों में रखा जाता है उनको ना सिर्फ कम पैसे मिलते हैं. बल्कि सुविधाओं के नाम पर भी कुछ नहीं दिया जाता.

 

रिपोर्ट के मुताबिक आईएस सिर्फ ताकत के नाम पर भारत पाकिस्तान के लड़ाकों को कमजोर नहीं मानता है बल्कि आईएस धर्म के नाम पर भी उन्हें निचले दर्जे का मानता है. आईएस के मुताबिक भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिम असली इस्लाम जानते ही नहीं और इसलिए वो जेहाद करने के काबिल नहीं हैं.

 

अब सवाल ये उठता है कि अगर आईएस के लिए एशिया के इन देशों के लड़ाके किसी काम के नहीं है तो फिर इन्हें लालच देकर वहां बुलाया क्यों जाता है?

 

रिपोर्ट के मुताबिक आईएस इन्हें फिदायीन हमलावर की तरह इस्तेमाल करता है. भारत पाकिस्तान से जाने वाले लड़ाकों को गोला बारूद से भरे वाहन को एक तय जगह पर ले जाने के लिए कहा जाता है. वहां पहुंचकर एक नंबर डायल करने के लए कहा जाता है. जो उन्हें आकर मिशन के बारे में बताएगा. लेकिन जैसे ही लड़ाके आईएस का दिया नंबर डायल करते हैं वहां विस्फोट हो जाता है और आईएस का दहशत फैलाने का मिशन पूरा हो जाता है.

 

अलग-अलग देशों से आने वाले लड़ाकों को तमाम तरह की सुख सुविधाओं के साथ-साथ सबसे बड़ा लालच जेहादी दुलहन के नाम पर दिया जाता है. ये आईएस का कोरा झूठ होता है क्योंकि जिन इलाकों पर आईएस का कब्जा है वहां महिलाओं की संख्या बेहद कम हो चुकी है. भारत पाकिस्तान बांग्लादेश नाइजीरिया और सूडान के लड़ाकों के लिए तो दुल्हन का नंबर कभी आता ही नहीं क्योंकि आईएस का मानना है कि जेहादी लड़ाकों की अगली पीढ़ी भी इनकी तरह कमजोर ही होगी.

 

भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश, नाइजीरिया के लड़ाकों को एक साथ रखा जाता है और आईएस में शामिल होने के बाद भी इन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है. अरब देशों के लड़ाके आईएस की पुलिस फोर्स में शामिल हो सकते हैं लेकिन एशियाई देशों के पास ये अधिकार भी नहीं है.

 

दक्षिण के युवा क्यों आ रहे हैं आईएस के प्रभाव में ?

खुफिय़ा एजंसियो की एक रिपोर्ट के मुताबीक भारत के करीब 150 युवा खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस के प्रभाव मे आए है, और इसमे खास बात ये है कि इसमे से ज्यादातर युवा दक्षिण भारत से हैं. आखिर क्या वजह है की दक्षिण भारत के युवा आईएसआईएस के प्रभाव मे आ रहे है, और कौन है ये लोग इसी पर एबीपी न्यूज की ये पडताल.

 

नाम –सलमान मोहीउद्दीन

उम्र – 32 साल

शहर- हैदराबाद

16 जनवरी 2015 को गिरफ्तार.

आखिर पुलिस ने मोहिउद्दीन को क्यों गिरफ्तार किया, सलमान की गतिविधियों पर पुलिस की कई दिनों से नजर थी. गिरफ्तारी के बाद सलमान ने बोलना शुरु किया.

 

मेरा हैदराबाद मे आजीविका का कोई साधन नहीं था. इसलिए मैं दिनभर इंटरनेट पर दौला न्यूजरुम में लोगों से चैटिंग करते रहता था. मुझे ऐसा लगा की विश्व में पश्चिमी देश मुस्लिम संपत्तियों की लूटमार कर रहे हैं और सब तरफ मुस्लिमों की स्थिति दयनीय है. और इसका एक ही इलाज है और वो है इस्लामीक स्टेट को स्थापित करे जहां शरिया कानून हो.

 

सायबराबाद पुलिस के मुताबीक 32 साल का सलमान मोहीउद्दीन दुबई जा रहा था और वहां से तुर्की से वो सीरिया आईएसआईएस मे शामिल होने के लिए जाने वाला था. लेकिन पुलिस ने उसे एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया.

 

आईएस आईएस के बारे मे ये बयान सलमान मोहीउद्दीन ने गिरफ्तारी के बाद हैदराबाद पुलिस को दिया था, जब उसे हैदाबाद एयरपोर्ट से  पुलिस ने गिरफ्तार किया था. ये आईएसआईएस से संबंधित भारत में हुई तीसरी गिरफ्तारी थी.

 

आंध्रप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के रि़टायर्ड इंजिनियर का बेटा मोहिउद्दीन 2010 मे अमेरिका चला गया था, जहां पर होस्टन की  टेक्सास सदर्न युनिवरसिटी मे  पढाई करने के बाद वो नौकरी करता था.

 

यहां पढ़ें उसका बयान

2011 में मैं जब टेक्सास में था तब एक महिला निकी जोसेफ के संपर्क में आया था, जो ब्रिटिश नैशनल थी और दुबई में रहती थी. मैं यू ट्यूब के जरिए उसके संपर्क में आय़ा. मुझे पता चला था कि उसने धर्म परिवर्तन किया था और वो क्रिश्चन से मुस्लिम बनी थी. उसने एक डॉक्टर से शादी की थी और वो अब एक मुस्लिम से शादी करना चाहती थी. मैं उसे कहा कि वो मुझसे शादी करे. मैंने और निकी ने तय किया कि हम गैरकानूनी तरीके से तुर्की की सरहद पार करके सीरिया जाकर आईएसआईएस मे शामिल होंगे.

 

लेकिन शायद तब तक मोहीउद्दीन को ये पता ही नहीं था कि निकी कौन है, निकी जो दुबई में रहती थी उस पर भी यूएई पुलिस की नजर थी उसे यूएई पुलिस ने हैदराबाद डिपोर्ट कर दिया. और यहां पर आने के बाद उसने पुलिस को बताया कि  उसका असली नाम था अफशां जबीन. वो तीन बच्चो की मां थी. और मोहिउद्दीन के साथ सीरिया जाने का उसका कोई प्लान नहीं था.

 

सलमान मोहीउद्दीन की गिरफ्तारी के बाद अफशां जबीन की गिरफ्तारी हुई. वह खूद आईएसआईएस के कैंपेन चलाती थी, उसने पुलिस को 20 युवकों की लिस्ट दी जो आईएसआईएस में शामिल होने के लिए उसकी सहायता मांग रहे थे.

 

सलमान मोहिउद्दीन इंटरनेट पर आईएसआईएस का प्रचार करता था और अफशां भी. वो देश की पहली महिला है जो आईएसआईएस मे शामील होने के लिए युवकों को उकसाती थी.

 

बयान

मैंने 2012 में आईएसआईएस का प्रचार करने के लिए एक फेसबुक पेज बनाया था, इस पर मैं आईएसआईएस के बारे में जानकारी डालता था. ताकि युवा आकर्षित हो सकें. फेसबुक ने ये पेज बाद मे बंद कर दिया.

 

सलमान मोहीउद्दीन के फेसबूक पेज और चैट रुम से प्रभावित होने वाले युवको को पुलिस ने जांच के लिए बुलाया लेकिन उनको समझाकर छोड दिया गया.

 

जामा मस्जीद एडवायजरी कमिटी के सदस्य डॉ ए के अंजारिया बताते हैं कि पुलिस ने सही किया है, लेकिन जिनकी काउंनसिलींग की गई है उन बच्चों पर नजर रखनी चाहिए, ताकि वे आगे ऐसे ना करे. लेकिन आईएसआईएस के बहकावे में आने का दक्षिण भारत के नौजवानों का ये कोई एकलौता मामला नही है,

 

तारीख —-20 नवंबर 2015

जगह—-चेन्नई

चेन्नई के दो नौजवानों को तुर्की की सरकार ने डिपोर्ट किया. 15 दिन पहले से वो आईएसआईएस से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, एक 23 साल का और एक 22 साल का नौजवान. ये दोनों अगस्त मे बैंगलोर से दुबई गए और फिर वहां से तुर्की. जहां उन्हें संदेहास्पद हरकतों के चलते हिरासत मे लिया गया. ये दोनों तुर्की मे जिस लॉज में रह रहे थें वहां वो सीरिया जाने के बारे में जानकारी ले रहे थे, तभी होटल के स्टाफ ने पुलिस को जानकारी दे दी और इन दोनों को पकडकर तुर्की सरकार ने चेन्नई डिपोर्ट कर दिया. ये दोनों कई घंटो तक इंटरनेट पर आईएसआईएस मे शामिल होने के बारे जानकारी लेते थे.

 

मौलाना घौसावी शाह हैदराबाद के जाने माने लोगों में से एक शख्सियत हैं, वो जानते हैं कि नौजवान आईएसआईएस के बहकावे में आने की वजह इंटरनेट पर आईएसआईएस का जमकर प्रचार बडी वजह है. इससे पहले भी चेन्नई से 2014 में दो नौजवान लापता हुए थे बाद में पता चला था कि वो आईएसआईएस के संपर्क में थे. ये तो हुई हैदराबाद और चेन्नई की बात लेकिन इसी साल सितंबर महीने मे यूएई से केरला के चार नौजवानों को आईएसआईएस से संबंधित गतिविधियों के चलते डिपोर्ट किया गया. 

 

खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबीक करीब 150 नौजवान आईएसआईएस के बहकावे मे आए है, और ये ज्यादातर दक्षिण भारत के है. नॉर्थ बैंगलोर के जालाहल्ली इलाके में पिछले दिसंबर महीने में मेंहदी मसरुर बिश्वास गिरफ्तार हुआ था जो आईएसआईएस के लिए शमी विटनेस नाम का ट्वीटर अकाउंट चलाता था. जो आईएसआईएस में अखुना शमी के नाम से मशहूर था.

 

जो नौजवान आईएसआईएस के प्रभाव में आए है उन पर खुफिया विभाग लगातार नजर रखे हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक भारत से करीब 23 नौजवान आईएसआईएस मे शामिल होने सीरिया और इराक गए. इसमें से 16 मारे जा चुके हैं और केवल कल्याण का अरीब माजिद वापस लौट आय़ा. लेकिन अभी भी

 

कल्याण के 2 ऑस्ट्रेलिया मे बसा कश्मीर का 1, तेलंगाना का 1, कर्नाटका का 1, ओमान में बसा 1 भारतीय और सिंगापुर मे बसा 1 भारतीय.

 

ऐसे करीब 7 लोग अभीभी सिरिया इराक मे आईएसआईएस के लिए काम कर रहे है.

 

इस्लामिक वॉईस के एडिटर इन चीफ असीफुद्दीन मोहम्मद अगर आप देखेंते तो और मुल्को के मुकाबले भारत से कम लोग है. शायद यही वजह है कि दक्षिण भारत के हैदराबाद जैसे शहर में अब लोग आईएसआईएस के खिलाफ प्रचार की जरुरत ज्यादा महसुस कर रहे हैं.

 

खास बात है कि नौजवानों की आईएसआईएस के खिलाफ इस मुहीम को बडे-बुर्जुगों का साथ है. जाहीर सी बात है कि  आईएसआईएस के खिलाफ देश में चल रही मुहिम रंग ला रही है और सब तरफ आईएसआईएस जैसे खतरनाक आतंकी संगठन का अब खुलकर विरोध हो रहा है.

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