व्यक्ति विशेष: दहशत के नाग की पूरी दास्तान!

By: | Last Updated: Saturday, 14 November 2015 3:16 PM

सिर से पैर तक कंपकपा देने वाला मौत का वीडियो आपने पहले भी देखा होगा. कैमरा ऑन था और कैमरे के सामने ही उस नकाबपोश ने एक इंसान का सिर धड़ से अलग कर दिया. कत्ल का खौफनाक वीडियो जब दुनिया के सामने आया था तो एक बार फिर ISIS की बेरहमी की दास्तान पूरी दुनिया में गूंज उठी थी. लेकिन अभी तक वीडियो जारी करने वाले ISIS ने शुक्रवार रात पेरिस में बड़ा आतंकवादी हमला करके दुनिया को बता को बात दिया है कि उसके इरादे कितने खौफनाक है.

 

आज ISIS आज पूरी इंसानियत के लिए एक बदनुमा दाग बन चुका है. जो ISIS अभी तक इराक और सीरिया में जुल्मों सितम की हर दिन एक नई दास्तान लिख रहा था वो अब सीरिया की सरहदो से निकलकर अपने नापाक मसूबों को अंजाम दे रहा है और पेरिस पर ISIS के आतंकवादी हमले ने भारत समेत पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए बजा दी है खतरे की घंटी.

 

फ्रांस एक बार फिर आतंकी हमले का शिकार हुआ है. आतंकवादियों ने पेरिस पर मुंबई के 26/11 की तरह ही अटैक किया है. पेरिस में आतंकियों ने लोगों को बंधक बनाया, रेस्टोरेंट जैसे सार्वजनिक जगहों पर हमला किया. पेरिस में हमला करने आए आतंकी आईएसआईएस के स्लिपर सेल से थे. भारतीय समय के मुताबिक, आतंकियों ने शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात में पेरिस की सात अलग-अलग जगहों पर हमला किया. आतंकवादी हमले के दौरान जमकर फायरिंग हुई. सीरियल ब्लास्ट भी हुए. जिसमें 150 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. सैकड़ों लोग घायल भी हुए हैं. जवाबी कार्रवाई करते हुए फ्रांस के कमांडोज ने आठ हमलावरों को मार गिराया. इनमें 7 सुसाइड बॉम्बर्स थे. इस बीच, लोकल मीडिया ने ये दावा किया है कि नेशनल स्टेडियम के बाहर धमाका करने वाले हमलावर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद को निशाना बनाने वाले थे.

 

फ्रांस पर बड़े आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी सगंठन ISIS यानी इस्लामिक स्टेट फार ईराक एंड सीरिया ने ली है उसका कहना है फ्रांस पर हमला करके उसने सीरिया और ईराक में उसके खिलाफ हो रहे हवाई हमलों का बदला लिया है. ISIS के आंतक से जूझ रहे सीरिया और ईराक की ये दर्दनाक कहानी भी हम आपको बताएंगे आगे लेकिन पहले देखिए कैसे भारत के लिए भी आईएसआईएस कितना बड़ा खतरा बन चुका है.

 

गृहमंत्री राजनाथ सिंह का ये बयान तब सामने आया था जब करीब तीन हजार किलोमीटर दूर बैठे ISSI के तार भारत से जुड़ते नजर आए थे. बैगलोर पुलिस ने साल 2014 में 24 साल के मेंहदी मसरुर बिस्वास को गिरप्तार किया था. पुलिस के मुताबिक मेहदी एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था लेकिन असल में वो दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन ISIS के खूनी मिशन के प्रचार और प्रसार में जुटा था. मेहदी रात में ट्वीटर पर @ shamiwitness के नाम से ISIS के पक्ष में माहौल बनाता था. और लोगों को गुमराह कर उन्हें ISIS में भर्ती करने के लिए प्रेरित करता था. साल 2014 में ही मुंबई का अरीब अपने कुछ दोस्तों के साथ ISIS में भर्ती होने इराक जां पहुंचा था. उसने ISIS में शामिल होकर हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ली थी लेकिन जब वो घायल हालत में भारत वापस लौटा तो इसी के साथ ये राज भी खुला कि ISIS भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन चुका है.

व्यक्ति विशेष: दुनिया का दुश्मन नंबर एक- ISIS 

पेरिस पर ISIS के आतंकवादी हमले से साफ है कि ISIS अब आतंकवादी संगठन अलकायदा से भी ज्यादा खौफनाक और खतरनाक आतंकवादी संगठन बन चुका है. फ्रांस पर आईएसआईएस ने बड़ा आतंकवादी हमला किया है लेकिन उसके आतंकवाद का एपी सेंटर ईराक औऱ सीरिया है जहां हुआ था उसका जन्म.

 

भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे सीरिया और ईराक देश बसे है. सीरिया की राजधानी दमिश्क है जो पुराने वक्त से ही एक मशहूर शहर रहा है. लेकिन ईराक और सीरिया के शहर इन दिनों खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं. यहां कई शहरों पर आतंकवादी संगठन आईएसआईएस ने कब्जा जमा लिया है. ईराक में मलिक अल नूरी की सरकार है तो वही सीरिया के राष्ट्रपति बसर अल असद है जो लगातार आतंकवादी सगंठन आईएसआईएस के हमलों से जूझ रहे है.

 

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार औऱ आतंकवादी संगठन ISIS यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया के बीच ये शहर भी जंग का मैदान बना हुआ है. सीरिया मध्यपूर्व का एक अहम देश है लेकिन आईएसआईएस की दरिंदगी से यहां हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पिछले पांच सालों में करीब 60 लाख सीरीयाई देश छोड़ चुके है. लाखों लोग सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पड़ोसी मुल्क ग्रीस और यूरोपीय देशों के शरणार्थी कैंपों में रहने को मजबूर है. सीरिया और ईराक के प्रवासियों का ये संकट अब इतना बड़ा हो गया है कि यूरोप ने इन शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं.

 

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि यूरोप का क्राइसेस कितना है तीन लाख की बात कर रहे हो आप तीन लाख है ज्यादा नहीं है. बाकी साठ लाख कहा पर जाएंगे वापस आएंगे घर पर. यूरोपियन क्राइसिस में ये दो लाख तीन लाख लेना या ना लेना. एक लाख सात हजार कौन कौन ले रहे. हमारे मुल्क में कम से कम सिक्स मिलियन पीपुल गया बाहऱ ये तो वापस आएंगे. सब तो घर छोड़ दिया ऐसे हाथ पर गया था. कल को शांति वापस आएंगे सब लोग वापस आएंगे हमारे देश में. कंट्री इतना खूबसूरत है क्यों छोड़ने के लिए. आप ये समझ लोग पांच साल से पहले क्यों लोग नहीं गया था.

 

पेशे से पत्रकार डॉक्टर वेल अव्वाद सीरिया के रहने वाले हैं जब वो कहते है कि पांच साल पहले क्यों सीरीयाई लोग अपना देश छोड़ कर नहीं जाते थे तो उनका ये सवाल ही सीरिया से पलायन की समस्या के पीछे छिपे आतंकवादी संगठन ISIS  के खौफ को बयान कर देता है. आतंकवादी संगठन ISIS कितना और कैसे इतना बड़ा खतरा बन चुका है. ये समझने से पहले मध्यपूर्व के देशों की भौगोलिक और राजनीतिक हालात पर एक नजर डालना भी जरुरी है.

 

भारत से करीब 4 हजार 2 सौ किलोमीटर दूर मेडीटेरियन समुद्र के किनारे सीरिया बसा है. सीरिया के एक तरफ समंदर है तो दूसरी तरफ इसकी सीमाएं लेबनान, इजराइल, जॉर्डन, इराक और टर्की के साथ लगी हुई है. यही वजह है कि भौगोलिक तौर पर सीरिया बेहद अहम देश माना जाता है लेकिन लीबिया, सीरिया और इराक में छिड़े गृहयुद्ध से यहां के लोग अपना देश छोड़ कर यूरोप के देशों मे जा रहे है. मध्यपूर्व और अफ्रीका के देशो से पलायन दो रास्तों से सबसे ज्यादा हो रहा है. पहला रास्ता है ग्रीस का. अवैध तरीके से यूरोप में घुसने के लिए शरणार्थी मेडीटेरियन समंदर को पार करके पहले ग्रीस पहुंच रहे हैं. और फिर यहां से आगे हंगरी, ऑस्ट्रिया होते हुए जर्मनी और फ्रांस में जाकर शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं. अफ्रीकी देश लीबिया से भी बड़ी तादाद में यूरोप की तरफ पलायन हो रहा है अलजीरिया, मोरक्को से होते हुए स्पेन, फ्रांस और जर्मनी तक पलायन का ये दूसरा रास्ता जा रहा है.

 

खास बात ये है कि शरणार्थी को अवैध तरीके से यूरोपीय देशों में घुसने के लिए लंबा और जोखिम भरे सफर से गुजरना पड़ता है लेकिन इन शरणार्थियों के लिए इराक और सीरिया में हालात भयानक बने हुए है यहां ईराक और सीरिया की सरकार के साथ खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस की घमासान जंग जारी है.   

 

वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा बताते हैं कि सीरिया इराक यमन और बहुत से ऐसे देश हैं वहां पर संभव नहीं है जीना इस वजह से माइग्रेशन शुरु हुआ वहां पर जो आंतकी संगठन है लोगों को मार रहें हैं उनकी औरतों को बंदी बना ले रहे हैं और सेक्स स्लेव की तरह रखते हैं बच्चों को जबरदस्ती कर रहें है कि वो उनके आंतकवादी संगठन को ज्वाइन करें और फोर्स करके ले आते है न वहां पर कोई नौकरियां है न कोई जाब हैं और न ही कोई सरकार हैं एक आराजकाता फैली हुई है उनको जब जी चाहता है सुबह भी हो जाता है तो मिलिटेंट आकर गोली मार देते हैं. ये सब पढ़े लिखे लोग है सीरिया में सभ्य लोग हैं तो पुराना सीविल रीलेशन का सेंटर रहा है सीरिया में औऱ फिर खिलाफत का भी दौर रहा है लगातार उसका डिवलपमेंट हुआ है अब इनकी लाइफ इतनी मुश्किल हो गई की कोई घर बार छोड़कर नहीं जाता.

 

इराक और सीरिया में ISIS के आतंकवादियों ने कहर बरपा रखा है. सीरिया के काफी बड़े हिस्से पर उसका कब्जा भी हो चुका है. आईएस के आतंकवादियो के खौफ ने सीरिया के करीब 65 लाख लोगों को बेघर कर दिया है इसमें से करीब 30 लाख लोग सीरिया छोड़ कर आस-पास के मुल्कों में शरण ले चुके हैं. सीरिया और इराक की दिल दहला देने वाली तस्वीर यहां के उस भयानक हालात का दस्तावेज बन गई जो आतंकवादी संगठन आईएस ने इस देश में अपनी क्रूरता से पैदा किए है.  

 

सीरिया में गृहयुद्ध के हालात है लेकिन इस समस्या की जड़ में वो आईएसआईएस संगठन है जिसमें पश्चिमी देशों के जेहादी भी शामिल है और आईएस की ये आग अब इराक के रास्ते सीरिया तक भी जा पहुंची है.

 

दरअसल शुरुआत में ISIS आतंकवादी संगठन अलकायदा का ही एक हिस्सा था जिसे अब इराक और सीरिया में लड़ रहे जेहादी सुन्नी लड़ाकों का संगठन माना जाता है. आईएसआईएस का पूरा नाम इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया है और ये संगठन इराक के शिया बहुसंख्यकों को खत्म कर देना चाहता है. गौरतलब है कि इऱाक की 65 फीसदी आबादी शिया मुसलमानों की है जबकि बाकी यहां सुन्नी मुसलमान, यजीदी, ईसाई और कुर्द जाति के लोग है. सुन्नी मुसलमान यहां संख्या में कम है लेकिन लंबे वक्त तक इराक पर सुन्नी मुस्लमानों की ही हुकूमत रही है यही वजह है कि इराक में लंबे अर्से से शिया और सुन्नी समुदाय के बीच टकराव चलता रहा है फिलहाल यहां शिया सरकार है जिसके सत्ता में आने के बाद से ही सुन्नी और शियाओं के बीच लड़ाई और तेज हो गई थी. 

 

वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा बताते हैं कि ईराक के अंदर डेमोक्रेसी के आने से हुआ ये कि वहां पर शिया की हुकूमत बनी और शिया ने वहां के ट्राइबल के जो चीफ थे इनके हाथ में सत्ता रहती थी और बेपनाह इनको दौलत मिलती थी औऱ सद्दाम के पीरियड में तेल का जो कारोबार था उसमें ये लोग शामिल थे अमेरिकन ने आकर उनकी फौज को डिस्बेंज कर दिया और इनको हर तरफ कर दिया पावर से और सत्ता से क्योंकि ये सद्दाम हुसैन के समर्थक थे और पहले तो सद्दाम हुसैन उनसे लड़ रहे थे सद्दाम हुसैन की तरफ से अमेरिकन से लड़ रहे थे फिर बाद में ये बिल्कुल अलग होते चले गए और किसी हदतक मैं जरूर समझूंगा कि इनको ये किसी कंप्रोमाइज पर राजी नहीं थे इनका कहना था कि शिया भले इराक में मेजारिटी में हो लेकिन ये रिजन्स में हैं औऱ ये बात वो अकेले में नहीं कह रहे थे रुलर्स के साथ वो ये बात कह रहें थे. ओपन स्टेटमेंट आ रहे थे औऱ ये कह रहे थे कि हम कभी अंडर शिया गवर्नमेंट के नहीं रहेंगे.

 

इराक में नूरी अल मलिकी की मौजूदा शिया सरकार के खिलाफ लड़ रहे आईएस के आतंकवादियों की तादाद दो से तीन लाख के बीच बताई जाती है. इन लड़ाकों में यूरोप और मध्यपूर्व के आतंकवादी भी शामिल बताए जाते है. आईएसआईएस को सद्दाम हुसैन के उन पूर्व सैनिकों और इराक के उन सुन्नी कबीलों का समर्थन भी हासिल रहा है जो सद्दाम हुसैन की हुकूमत खत्म होने के बाद सत्ता के खेल में बाहर हो गए थे. सद्दाम समर्थकों के सहारे साल 2011 में तेजी से उभरे चरमपंथी संगठन आईएसआईएस ने इराक के कई अहम शहरों और उसके तेल के ठिकानों पर कब्जा जमा लिया है. इराक के बाद आईएसआईएस का अगला निशाना पडोसी देश सीरिया बना. ये संगठन पूर्वी सीरिया के भी एक बड़े इलाके और उसके तेल और गैस के ठिकानों पर कब्जा जमा चुका है.

 

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि अभी मुल्क में उनके हाथ में 50 पर्सेंट सीरिया के अंदर है लेकिन जो लेस पापुलेटेड एरिया है. जिस जगह तेल है जिस जगह गैस है जिस जगह मान्यूमेंट  है. उसके हाथ में कब्जा कर लिया था. 21. यह नॅार्थन पार्थ आफ सीरिया है जिस पूरे पार्थ में कम से कम 70 फीसदी उन्होंने कब्जा कर लिया कयोंकि तुर्की के अंदर आ रहे उनकी बंदूके आ रही सप्लाई लाईन भी है वहॅा पर तो इसलिए कब्जा हो गया था. थोड़ा सा अंदर बलमाहेरा की तरफ है जो हमारा हेरिटेज है और हमारा गैस और पाइपलाइन भी है वो हमारा जो सरकारी एनर्जी सपोर्ट कर रहा है वहा पर भी कब्जा कर लिया था लेकिन यह खत्म करने के लिए मैं एक चीज़ एश्योर करना चहता हुं हमारे मुल्क में हमारी अपनी सीरीयन आर्मी है पीकेके है और ईराकी आर्मी है ये तीनों सच आईएस आईएस में फाईट कर रहा है बाकी मुल्क में र्सिफ बोलने वाले लोग है.

 

इराक और सीरिया में जड़े जमा चुके आईएस का खौफ तस्वीरों के जरिए आपके टेलीविजन तक भी पहुंचता रहा है. आईएसआईएस ना सिर्फ इराक के इलाकों पर अपना कब्जा जमाने में जुटा है बल्कि इराक के पडोसी देश सीरिया में छिड़े गृहयुद्ध का फायदा भी उसे मिल रहा है. पश्चिमी देशों का मानना है कि सीरिया के कई कट्टरपंथी संगठन भी छुप कर आईएसआईएस की मदद कर रहे हैं. सीरिया और इराक में खौफ का दूसरा नाम बन चुका आईएस कभी आतंकवादी संगठन अलकायदा का ही हिस्सा हुआ करता था लेकिन साल 2006 में अमेरिकी सेना ने चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएस का इराक में खात्मा कर दिया था औऱ उसके चीफ अबु मुसाफ अल जरकावी को भी मार गिराया था. अमेरिकी सेना ने आईएस के मौजूदा चीफ अबुबक्र बगदादी को भी पकड़ कर जेल में बंद कर दिया था लेकिन फिर साल 2009 में अमेरिकी सेना ने ही उसे आजाद भी कर दिया और जब साल 2011 में अमेरिकी फौज इराक से चली गई थी उसके बाद से आईएसआईएस ने एक बार फिर अपना सिर उठाना शुरु कर दिया था. साल 2014 आते तक आईएस ने खुद को अलकायदा से भी अलग कर लिया. और अपनी इस अलग पहचान के साथ उसने इराक और सीरिया को जंग के मैदान में तब्दील कर दिया है.

 

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि 2003 में अलकायदा इराक के अंदर है नहीं. अमेरिकन इनवेजन आ गया था. उसके बाद अलकायदा शुरु हो गया था. अलकायदा शुरु किया था ये वाला रेडिकल एलीमेंट आ गया था अलनुसरा और हमारे देश में आईएस शुरु किया था. हमारा देश सेक्युलर कंट्री है. तो उसके बाद ये सारा पूरा दुनिया शुरु हो गया था. 2011 हमारे देश में शुरु किया था. लीबिया के अंदर भी अभी तक शुरु किया था जब तक आपकी पालिसी है जो यूरोपियन पॉलिसी है औऱ जो अमेरिकन पॉलिसी है. स्पोर्टेड बाय अरब कंट्री हमारा तुर्की भी हमारा नेबर है और सउदी अरब और कतर ने सारा बोर्डर खोल दिया था हमारे मु्ल्क में और ये लोग पैसा देते, बंदूक देते और कहते कि सीरिया के लिए रिजीम चेंज शुरु करे. तो पांच साल पहले सीरिया में और 2003 से पहले इराक में ये कभी हुआ नहीं. तो इसका मकसद क्या होता.

 

वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा बताते हैं कि ये इराक को सीरिया की बहुत ही स्ट्रेटजिक लोकेशन है यहीं पर जो अगर इसके कब्जे में है तो अरब वर्ल्ड उसके कब्जे में है पश्चिम गल्फ उसके कब्जे में हो जाएगी सबसे इंपार्टेंट देश यही दो है यहां पर फिर आगे नार्थ अफ्रिका में इजिप्ट हो जाता है लेकिन अरब ईस्ट में या फिर गल्फ के रीजन में ये सब ईजली अमेरिकन ने सबसे पहले ईराक को चुना. ईराक की बहुत सी कंट्रीज से बार्डर मिलते हैं इसी तरह सीरिया सीरिया मेडिट्रेरिएन है सीरिया से यूरोप बहुत करीब है औऱ इजराएल मिला हुआ है तो ये स्ट्रेटजिक्ली लोकेटेड कंट्रीज हैं इनको अगर आप कंट्रोल कर लीजिए औऱ दूसरी बात ये की सीरिया औऱ ईराक इस्लामिक दौरे हुकूमत में बहुत इंपार्टेंट रोल इन लोगों ने प्ले किया है जो बिल्कुल अब तबाह औऱ बर्बाद हो गए हैं. यमन सीरिया और इराक इनकता तीन का बहुत इंपार्टेंट रोल रहा है और तीन के तीन मुल्क तबाह होते चले जा रहे हैं और ये तीन सबसे इंपार्टेंट देश थे उस वक्त और मैं सभी प्वाइंट आफ व्यू से नहीं कह रहा जो दारुल खिलाफत थी इन्हीं दो देशों में थी ये बगदाद था औऱ दमिश्क था और इनकी नजरें उसी पर थी हमेंशा से.

 

चरमपंथी संगठन आईएसआईएस इराक और सीरिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है. बेहद खतरनाक हो चुका ये चरमपंथी संगठन ऑटोमैटिक मशीनगनों, रॉकेट और टैंकों जैसे अत्यआधुनिक हथियारों से लैस है. आईएस आधुनिक संचार के साधनों और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी का भी बखूबी इस्तेमाल कर रहा है और यही वजह है कि इराकी और सीरियाई सेना के लिए इनसे पार पाना अब और भी ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है. इराक और सीरिया में अपने कब्जे वाले इलाके को आईएसआईएस ने इस्लामिक स्टेट का नाम दिया है और अब इस आतंकी संगठन का नाम भी बदल कर आईएस रखा जा चुका है. अखबार, लांस एजिलंस टाइम ने एक साल पहले अमेरिकी खुफिया एंजेसी के हवाले से आईएस की ताकत का अंदाजा पेश किया था. लॉस एंजिलिस टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में करीब 10 हजार लड़ाकों के आईएस में शामिल होने का अनुमान था. लेकिन ये तादाद 20 हजार से 35 हजार के बीच हो सकती है. इसमें से करीब दो हजार आतंकवादी विदेशी मूल के हैं यानी इराक और सीरिय़ा से इनका कोई नाता नहीं हैं लेकिन साल भर में आईएस की शक्ल बड़े दैत्य में तब्दील हो चुकी है इसी साल फरवरी में आई यूएस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक – आईएस हर महीने 1 हजार नए लड़के भर्ती कर रहा है और इस संगठन ने अब तक करीब बीस हजार विदेशी युवाओं को अपना आंतकी बना लिया है. ये अमेरिका के चौदह हजार विदेशी मूल के आईएस आंतकियों के अनुमान से कहीं ज्यादा है.

 

सीरिया वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि ये तो अमेरिकन ने वहां पर अलकायदा शुरु किया था वहां पर जेहादी कल्चर में जो उन्होंने अफगानिस्तान शुरु किया था. तो वहां पर शुरु किया था उनके साथ में वो सारे लीडर है वहां पर अलकायादा वाले लोग हैं लेकिन आइडियॉलॉजी डिफरेंट है. ये कह रहे हैं कि पहले हमारा अमेरिकन दुश्मन है जो शैतान है. अलकायदा. औऱ ये कह रहे हैं हमारे दुश्मन है माइनारिटी है. ये इस्लाम नहीं है ये हमारा वहाबिस्ट है. वो तो हार्ड लाइन है ये हमारा मुसलमान लोग नहीं है. सिर्फ मुसलमान है जो वहाबी है. और सलाफिस्ट है. सीरियन, वहाबी, हनफी कोई मानते भी नहीं है. कोई माडरेट इस्लाम है नहीं अभी वहां पर कह रहे हैं कि इस्लाम है सिर्फ हमारी है सउदी अरेबिया के अंदर वाली है जो वहाबिस्ट इस्लाम है. और बाकी मुसलमान को बिल्कुल एकसेप्ट नहीं कर रहे हैं. इनके दिमाग में ये तो पैसा है औऱ बिल्कुल एक्स्ट्रीमिस्ट हैं. वो तो मानते भी नहीं है हर दुनिया में हर देश में हर जगह में. जो एक्स्ट्रीमिस्ट एलीमेंट है सिर्फ वहाबिस्ट और सलाफिस्ट है. ओसामा खुद वहां पर वो वहाबी है.

 

सीरिया के एक बड़े इलाके पर आईएस का कंट्रोल बताया जाता है और सीरिया की बशर अल असद सरकार का कंट्रोल राजधानी दमिश्क और चंद शहरों तक ही सीमित रह गया है. खास बात ये है कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद एक शिया मुसलमान हैं लेकिन उनकी बीवी सुन्नी हैं. एक सुन्नी संगठन के तौर पर उभरे आईएस का सीरिया की उस सेना से मुकाबला जारी है जिसमें करीब 95 फीसदी सुन्नी मुसलमान हैं बावजूद इसके सीरियाई सेना की कमान और उसका स्ट्रक्चर टूटा नहीं है. यही नहीं सीरिया के प्रशासन में अहम पदों पर बैठे सुन्नी मुसलमानों ने भी आईएस की चुनौती के सामने घुटने नहीं टेके हैं. जाहिर है कि इराक और सीरिया में सत्ता परिवर्तन के नाम पर शिया और सुन्नी के बीच छिड़ी ये जंग अब एक नए मुकाम और एक नए मोड़ तक पहुंचती नजर आ रही है.

 

सीरिया के वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. वेल एस एच अव्वाद बताते हैं कि आप देख लो जो सीरियन आर्मी है तो सीरियन आर्मी में किसी बटालियन में कोई डिफेक्ट नहीं हुआ क्यों. अगर हम लोग सुन्नी शिया बात करते हैं तो 95 पर्सेंट में सुन्नी हैं. मैं ये कहना चाहता हूं कि अगर आप हमारे इलेक्शन करना चाहते हैं तो बैलेट और बाक्स से ये डिसाइड करना चाहिए. डोन्ट इंपोज आन अस. और अगर आपकी नीयत है औऱ आपकी मकसद है कि सरकार बदलना पडेगा वाय आर यू ब्रेकिंग द स्टोन. पूरा पब्लिक प्रापर्टी क्यों डिस्ट्राय कर रहा है. दिस इज डिफरेंट स्टोर. इट्स नाट ए डेमोक्रेशी. डेमोक्रेशी सिर्फ नाम दे दिया था. पापुलारिटी बात छोडो. अगर ये प्रेसीडेंट को निकाल देंगे तो हमारा देश पूरा डिसइंटीग्रेट करना पडेगा. ये बदल करने के लिए कौन है नुसरा, अलकायदा वाले लोग हैं. और अगर आईएस तो आईएस तो आपको मालूम है क्या कर रहा. अलकायदा भी है अल नुसरा वो दोनो फ्रंट. दे आर बोथ सेम साइड द क्वाइन.

 

मध्यपूर्व के देश सीरिया और ईराक की ये कहानी एक ऐसी दुनिया की कहानी है जहां धरती बम धमाकों से रोज लहूलुहान हो रही है और यहां जिंदगी ISIS के आतंक से पनाह मांग रही है. कभी अलकायदा, कभी अलनुसरा तो कभी आईएस की शक्ल में आतंकवाद का खौफ हर रोज यहां लोगों के यकीन को डस रहा है और हर गुजरते दिन के साथ सीरिया की इस कहानी में दर्द का एक नया अध्याय भी जुड़ रहा है. और अब फ्रांस पर ISIS के बडे आंतकवादी हमले ने दुनिया को एक बार फिर ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कितना खतरनाक हो चुका है अबु बकर बगदादी और उसका आईएसआईएस.

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