व्यक्ति विशेष: एक राजा, उसकी दो रानी और कत्ल की एक कहानी!

By: | Last Updated: Saturday, 20 September 2014 11:29 AM
Full information about raja sanjay singh

बारह सौ साल गुजर गए. देश में अंग्रेज आए और चले भी गए लेकिन इस भूपति भवन पैलेस में राजा रणंजय सिंह का दरबार कायम रहा. यूं तो आजादी के बाद तमाम रियासतें खत्म हो गई थी लेकिन अमेठी रियासत के इस राजमहल की परंपराएं हमेशा बरकरार रही और इसीलिए महाराज रणंजय सिंह के बाद एक दिन इस महल के महाराज बने संजय सिंह. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉक्टर संजय सिंह देश की राजनीति में एक जाना पहचाना चेहरा रहे हैं लेकिन जिस अमेठी में संजय सिंह की सियासत का सिक्का चलता है उसी अमेठी में एक शख्स ने उनके खिलाफ कर दिया है ऐलाने जंग. संजय सिंह को चुनौती देना वाला ये शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद उनका ही बेटा और अमेठी राजघराने का युवराज अनंत विक्रम सिंह है. शाही परिवार की ये लड़ाई अब महल की चारदीवारी से निकल कर सड़कों तक आ पहुंची है. रिश्तों की इस जंग में एक तरफ राजा संजय सिंह और उनकी पत्नी अमिता सिंह हैं तो दूसरे खेमें में युवराज अनंत विक्रम सिंह और उनकी मां गरिमा सिहं खड़ी है. बेटा अपने पिता के रिश्ते पर सवाल उठा रहा है तो उसकी मां अपने पति के जुल्मों सितम की कहानी बयान कर रही है. अमेठी राजघराने में छिड़ी रिश्तों की इस जंग में सैय्यद मोदी हत्याकांड का जो मुद्दा उछल रहा है उसकी भी बरसों पुरानी एक कहानी है. ये कत्ल की एक ऐसी दास्तान है जो एक बार फिर अमेठी के इस राजमहल पर काला साया बन कर मंडरा रही है. 

आज आपको बताएंगे एक राजा और उसकी दो रानियों के उलझते रिश्ते की पूरी कहानी. साथ ही पड़ताल इस बात की भी करेंगे कि आखिर क्यों एक राजकुमार अपने पिता के रिश्ते पर सवाल खड़े कर रहा है और क्यों उस राजा पर गंभीर इल्जाम लगा रही है खुद उसकी ही एक रानी.

 

अनंत विक्रम सिंह की मां गरिमा सिंह ने बताया कि हम 20 साल बाद भी वही पा रहे है, आज भी वही दशा है मेरे बेटे की इस तरह से अगर पोते और बेटे को भी जगह नहीं मिलेगी तो हम कहां तक चुप रहेंगे.

 

उत्तर प्रदेश के अमेठी में राजघराने के विवाद ने अब खूनी रुप ले लिया है. अमेठी के राजा संजय सिंह और उनके बेटे अनंत विक्रम सिंह के बीच संपत्ति का विवाद जब सड़कों पर आया तो राजमहल गोलियों की आवाज से गूंज उठा. बीते रविवार को महल के सामने अनंत विक्रम सिंह के समर्थकों ने जब पुलिस पर पथराव किया तो पुलिस ने भी भीड़ पर लाठियों की बरसात कर दी. दरअसल अमेठी राजमहल के कमरों से शुरु हुआ ये विवाद पहले महल के इस दरवाजे तक पहुंचा और फिर सड़क पर उतर कर इसने खूनी रुप लिया है. पुलिस और पब्लिक के बीच हुए  इस जबरदस्त टकराव के दौरान गोलियां भी चली जिसमें एक पुलिस वाले की मौत हो गई.

 

दिल्ली से करीब 670 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश का शहर अमेठी कभी शाही रियासत हुआ करती था लेकिन जब देश आजाद हुआ तो अमेठी को गांधी-नेहरु परिवार से रिश्तों की वजह से शोहरत ज्यादा हासिल हुई. अमेठी सीट से राजीव गांधी और फिर उनके बाद सोनियां गांधी भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं. फिलहाल राहुल गांधी अमेठी लोकसभा सीट से सांसद हैं और यही वजह है कि देश भर में चुनावों के दौरान अमेठी की चर्चा जरुर होती है लेकिन इस बार राजघराने में मचे घमासान को लेकर अमेठी सुर्खियों में है.

 

संजय सिंह के बेटे अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि जो हरकल हुई है कोर्ट में…ये हमारे 33 या 34 पीढ़ी की सभ्यता खत्म हो गई ये हाल है इस रियासत का अमिता मोदी की वजह से.

 

अमेठी की जमीन पर बरसों से सीना ताने खड़े भूपति भवन पैलेस के इतिहास में जो कभी नहीं हुआ वो अब हो रहा है. इस राजमहल में कभी राजा रणंजय सिंह रहा करते थे लेकिन उनकी मौत के बाद महल के मालिक उनके बेटे डॉक्टर संजय सिंह बन गए और अब अमेठी का यही भूपति भवन पैलेस राजा और युवराज के बीच विवाद की जड़ बन गया है.

 

अमेठी के रामनगर इलाके मे बनें इस राजभवन में कुल 75 कमरें है. इस राजमहल के दो कमरों में युवराज अनंत विक्रम सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं लेकिन उनके इन्हीं दो कमरों को लेकर विवाद उस वक्त शुरु हुआ जब इस राजमहल के मालिक संजय सिंह के लखनऊ से अमेठी पहुंचने की खबर फैली. युवराज अनंत विक्रम सिंह के सैकड़ों समर्थक राजमहल के बाहर जमा हो गए और इसके बाद संजय सिंह को महल में जाने से रोकने को लेकर हंगामा शुरु हो गया. युवराज अनंत विक्रम सिंह के समर्थकों और पुलिस के बीच हुए इस टकराव में कई लोग जख्मी हुए तो वहीं एक कॉन्सटेबल विजयप्रताप मिश्रा की गोली लगने से मौत हो गई.

 

दरअसल कांग्रेस के सांसद संजय सिंह और युवराज अनंत विक्रम सिंह के बीच ये जंग अमेठी की राजनीतिक विरासत और राजमहल भूपति भवन पैलेस को लेकर छिड़ी हुई है. और इस लड़ाई में अमेठी राज परिवार में दो गुट बन गए हैं. एक तरफ राजा संजय सिंह औऱ उनकी पत्नी अमिता सिंह है तो वही दूसरी तरफ संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह, उनके बेटे युवराज अनंत विक्रम सिंह और दो बेटियों शैव्या सिंह और महिमा सिंह ने मोर्चा संभाल रखा है.

 

अमेठी राजघऱाने में विरासत की ये जंग करीब दो महीनों पहले उस वक्त सड़कों पर आ गई थी जब जुलाई के महीने में युवराज अनंत विक्रम सिंह अपनी दो बहनों, पत्नी और मां को साथ लेकर अमेठी के भूपति भवन पैलेस पहुंचे थे. आरोप ये हैं कि राजा संजय सिंह के कुछ भरोसेमंद लोगों ने पहले युवराज अनंत विक्रम के ड्राइवर को बुरी तरह से पीटा और फिर उसके बाद खुद उनके साथ भी मारपीट की गई थी.

 

अमेठी राजघराने में उठा ये विवाद तो नया है लेकिन इसकी जड़े काफी गहरी और पुरानी है. अब आगे हम आपको बताते हैं कि इस विवाद की इन ताजा तस्वीरों के पीछे की असल कहानी क्या है. दरअसल अमेठी राजघराने के राजा संजय सिंह ने करीब 18 साल पहले बैडमिंटन चैंपियन सैय्यद मोदी की विधवा अमिता मोदी से शादी की थी. जिसके बाद से ही उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह अमेठी के इस राजमहल से चली गई थी औऱ उनसे अलग रहने लगी थी. लेकिन अमेठी राजघराने में संपत्ति को लेकर छिड़े इस घमासान में टर्निंग प्वाइंट उस वक्त आया जब संजय सिंह ने प्रेस के सामने आकर गरिमा सिंह को अपनी पत्नी मानने से ही इंकार कर दिया.

 

शाही परिवार में छिड़ी रिश्तों की इस महाभारत में राजा संजय सिंह की तरफ से ये पहला बड़ा हमला था जिसका जवाब उनके बेटे अनंत विक्रम सिंह ने उन्हें दिया. युवराज अनंत विक्रम सिंह ने संजय सिंह के उन जख्मों पर ही सीधी चोट कर दी जो उनके दामन पर करीब 25 साल पहले लगे थे. बैडमिंटन खिलाड़ी सैय्यद मोदी की हत्या के मामले में संजय सिंह और उनकी पत्नी अमिता सिंह को क्लीन चिट देने पर अनंत विक्रम सिंह ने सवाल खड़े कर दिए हैं. अपने पिता के पुराने जख्मों को कुरेदते हुए युवराज अनंत विक्रम सिंह ने यहां तक कह दिया कि सबूत ना मिलने के आधार पर किसी के दोष को नकारा नहीं जा सकता है.

 

अमेठी राजघराने में रिश्तों की ये कहानी बेहद उलझी हुई है. रिश्तों की ये उलझन भी हम सुलझाएंगे आगे लेकिन उससे पहले बात करते हैं उस कत्ल की जिसका जिक्र युवराज अनंत विक्रम सिंह ने छेड़ दिया है. वो कत्ल जो 26 साल बाद आज भी दुनिया की नजर में एक अबूझ पहेली बना हुआ है. बैडमिंटन चैंम्पियन सैयद मोदी के इस मर्डर केस में महाराज कहे जाने वाले संजय सिंह और उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह को सीबीआई की जांच का सामना भी करना पड़ा था और अब एक बार फिर संजय सिंह के बेटे अनंत विक्रम सिंह ही इस कत्ल के संगीन मामले को हवा दे रहे हैं.

 

अमेठी राजघराने के युवराज अनंत विक्रम सिंह ने बताया कि नासमझी में हमको फसाया जा रहा है जो लोग फंसा रहे हैं इनका इतिहास पुराना रहा है खून खराबे का. ये आप लोग जानते हैं 88 से ये सिलसिला चला आ रहा है. सईद मोदी हत्या कांड का. सईद मोदी हत्या कांड का सिलसिला चला आ रहा है जो आज तक सॉल्व नहीं हुआ या आप लोग भी जानते हैं.

 

अमेठी राजघराने में मचे इस घमासान के बीच जब सैयद मोदी हत्याकांड की दोबारा जांच का मुद्दा उछला तो 26 साल पुराने इस केस के जख्म जैसे हरे हो गए. लेकिन सवाल ये भी है कि आखिर शाही परिवार की आपसी जंग में इस हत्याकांड का मुद्दा क्यों उछाला जा रहा है. दरअसल अमेठी राजपरिवार की इस विवादित कहानी कहानी में राजा और उसकी दो रानियों के अलावा एक किरदार और भी है. और वो चौथा किरदार है बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी.

 

सैय्यद मोदी अपने जमाने के मशहूर बैडमिंटन खिलाडी रहे हैं. 1962 में सैयद मोदी का जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में हुआ था. आठ भाई-बहनों के बड़े परिवार में सैय्यद मोदी सबसे छोटे थे लेकिन गरीबी और मुश्किल हालात से जूझते हुए उन्होनें खेल की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल किया था.  

 

सैय्यद मोदी ने 1980 से लेकर 1987 तक लगातार 8 बार नेशनल बैडमिंटन चैम्पियन का खिताब जीत कर इतिहास रच दिया था. 1984 के कॉमनवेल्थ खेलों में भी उन्होंने देश का नाम रोशन किया था. 27 साल के इस बैडमिंटन चैंम्पियन ने दुनिया भऱ में देश का परचम लहराया था और यही वजह थी कि उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा गया गया था.

 

1990 के दशक का ये वो दौर था जब सैय्यद मोदी बैडमिंटन की दुनिया में देश का सबसे चमकदार चेहरा बन चुके थे. उन दिनों लखनऊ में अमेठी राजघराने के राजा संजय सिंह और सैयद मोदी बतौर दोस्त भी पहचाने जाते थे. सैय्यद मोदी जहां बैडमिंटन के चैंम्पियन थे तो वहीं संजय सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में खेल राज्यमंत्री हुआ करते थे.

 

लखनऊ में सैय्यद मोदी रेलवे में नौकरी करते थे और यहीं के के डी सिंह बाबू स्टेडियम में उनका खेल भी परवान चढ़ रहा था. बैडमिंटन को ही अपनी जिंदगी मानने वाले खिलाड़ी सैय्यद मोदी जिन दिनों देश और दुनिया में नए-नए कीर्तिमान रच रहे थे उसी दौरान उनकी मुलाकात अमिता कुलकर्णी से हुई थी. मुंबई की अमिता कुलकर्णी भी बैडमिंटन की एक उभरती हुई खिलाड़ी थी और यही वजह थी कि साल 1978 में ये दोनों पहली बार संपर्क में आये थे. इसी साल अमिता कुलकर्णी और सैय्यद मोदी बीजिंग में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय एशियन चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने चीन भी गए थे.

 

सैय्यद मोदी और अमिता कुलकर्णी की दोस्ती जब मोहब्बत में तब्दील हो गई तो दोनों ने 14 मई 1984 को शादी कर ली थी और इस तरह अमिता कुलकर्णी अमिता मोदी बन गई लेकिन इस शादी से एक साल पहले 1983 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन खेल राज्यमंत्री और अमेठी के राजा संजय सिंह भी अमिता मोदी के संपर्क में आ चुके थे और यही वजह थी कि सैय्यद मोदी और अमिता मोदी का ब्याह लखनऊ में संजय सिंह के घर पर ही संपन्न कराया गया था लेकिन इन दोनों खिलाड़ियों का ये रिश्ता उस वक्त एक पहेली बन गया जब 1988 में सैय्यद मोदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई.

 

लखनऊ के के डी सिंह बाबू स्टेडियम के गेट के सामने 23 जुलाई 1988 को सैयद मोदी का कत्ल कर दिया गया था. 27 साल के सैय्यद मोदी जब शाम को प्रैक्टिस करने के बाद अपने घर लौट रहे थे तभी हमलावरों उन पर गोलियों की बरसात कर दी थी. अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सैय्यद मोदी की जिस तरह से हत्या की गई थी उससे ये बात साफ थी कि ये हत्याकांड किसी गहरी साजिश का नतीजा था.

 

सैयद मोदी हत्याकांड की शुरुवाती जांच उत्तर प्रदेश पुलिस ने की थी लेकिन राज्य सरकार की सिफारिश पर 2 अगस्त 1988 को इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई थी. और जब सीबीआई ने अपनी पड़ताल शुरू की तो इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में शक की सुई अमेठी के इसी भूपति भवन पैलेस की तरफ घूम गई थी.

 

सैयद मोदी हत्याकांड में सीबीआई की चार्जशीट में सात लोग नामजद किए थे. इन सात आरोपियों में से दो आरोपी ऐसे थे जिनके नाम ने उस वक्त सबको चौका कर रख दिया था. सैयद मोदी हत्याकांड में सबसे पहले आरोपी थे अमेठी राजघराने के राजा और उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन खेल राज्यमंत्री संजय सिंह और आरोपियों की लिस्ट में दूसरा नाम सैय्यद मोदी की विधवा अमिता मोदी का था.

 

राज्य सरकार के तत्कालीन मंत्री संजय सिंह पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह के चचेरे दामाद थे और अमेठी राज घराने के राजा भी थे लेकिन सैयद मोदी हत्याकांड में उनका नाम इस वजह से उछला क्योकि उन दिनों अमिता मोदी और संजय सिंह के बीच विवाहेत्तर संबंधों की बातें सामने आने लगी थी और इन दोनों की करीबियत ही सैयद मोदी की हत्या की वजह बताई जा रही थी. इसीलिए सीबीआई के हाथों में जब सैयद मोदी हत्याकांड की जांच आई तो शक के आधार पर सबसे पहले संजय सिंह और फिर उनके बाद में अमिता मोदी को भी गिरफ्तार कर लिया गया था. 30 सितंबर 1988 को इंडिया टुडे में छपे एक लेख के मुताबिक सीबीआई ने उस वक्त संजय सिंह और अमिता मोदी से इस हत्याकांड को लेकर तमाम तरह के सवाल किए थे.

 

देखिए कैसे और क्या सवाल पूछ गए?

CBI –  क्या आप इन्हें जानती हैं? (संजय सिंह को दिखा कर)

अमिता मोदी – हां.

CBI –  क्या आप इन्हें जानते हैं? (अमिता सिंह को दिखा कर)

संजय सिंह – हां अच्छी तरह.

CBI –  आपका इनके साथ क्या संबंध हैं?

अमिता मोदी – ये हमारे पारिवारिक मित्र हैं.

CBI –  आपके बीच किस तरह औऱ किस हद तक दोस्ती थी?

अमिता मोदी – किस तरह से क्या मतलब है आपका?  हम करीबी दोस्त थे.

CBI –  ओके, आपने पहली बार कब इनके साथ विवाहेत्तर संबंध बनाए थे?

अमिता मोदी – ( अमिता मोदी संजय सिंह की तरफ देखती हैं)

संजय सिंह – क्या बकवास कर रहे हैं आप. आप ये सवाल मुझसे पूछिए, मैं आपको इसका जवाब दूंगा जिसके आप योग्य हो. फिर मुझसे ये भी पूछो कि मेरे सोनिया गांधी के साथ क्या संबंध थे क्योंकि किसी वक्त मैं राजीव गांधी का भी करीबी दोस्त था.

(तेजी से कमरे से बाहर चले जाते हैं)

CBI –  ये आपके सामने इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं. घबराइये मत वो कल तक ठीक हो जाएंगे. लेकिन आप इतना क्यों घबरा गई थी जब उन्होनें चिल्लाना शुरु किया था आपने हमारे सवालों का ठीक तरह से जवाब दिया लेकिन अब क्या हुआ.

अमिता – आप क्या जानना चाहते हैं, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है.

(सिंतबर 30 1988 इंडिया टुडे)

 

कत्ल, सैयद मोदी जैसे मशहूर खिलाड़ी का हुआ था और इसका इल्जाम जनमोर्चा के दिग्गज नेता संजय सिंह और सैयद मोदी की विधवा अमिता मोदी पर लगा था. उस वक्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक भूचाल सा आ गया था. पूरे देश की निगाहें इस हाई प्रोफाईल मर्डर केस की जांच पर टिकी थी. हर कोई यही जानना चाहता था कि आखिर किसके इशारे पर इस हत्यकांड को अंजाम दिया गया था. नवंबर 1988 में सीबीआई ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था. आरोपियों में संजय सिंह…अमिता मोदी… जितेंद्र सिंह…भगवती सिंह….अखिलेश सिंह….अमर बहादुर सिंह और  बलई सिंह शामिल थे. सीबीआई का आरोप था कि संजय सिंह, अमिता मोदी और अखिलेश सिंह ने सैयद मोदी के मर्डर की साजिश रची थी और बाकी के 4 लोगों ने इस हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाया था. सीबीआई की थ्योरी के मुताबिक के डी सिंह बाबू स्टेडियम के पास मारुति कार में से जब भगवती सिंह ने सैयद मोदी पर रिवाल्वर से फायरिंग कि तो दूसरे आरोपी जितेंद्र सिंह ने उसका साथ दिया था. 

 

कहा जाता है कि सैयद मोदी, अमिता मोदी और संजय सिंह के बीच गहरी दोस्ती थी इसी दोस्ती की वजह से संजय सिंह और सैयद मोदी का परिवार एक दूसरे के बेहद करीब भी आ गया था. लेकिन सैयद मोदी के कत्ल के बाद खेल, राजनीति और रिश्तों की एक अजीब सी उलझी हुई कहानी सामने आने लगी थी.

 

सैयद मोदी मर्डर केस में सीबीआई का आरोप था कि संजय सिंह और अमिता मोदी के बीच पनप रहा संबंध ही सैयद मोदी की मर्डर की वजह बना. सीबीआई ने जो केस बनाया उसके मुताबिक ये पूरा मामला प्रेम त्रिकोण का था. सीबीआई ने अमिता मोदी को हिरासत में लेकर उनसे कड़ी पूछताछ भी की थी. जांच के दौरान सीबीआई ने अमिता मोदी की डाय़री भी जब्त की जिसमें संजय सिंह से उनके नजदीकी रिश्ते की बातें दर्ज थी. इस डायरी में कई और सनसनीखेज बातें भी थी. सीबीआई का कहना था कि संजय सिंह ने ही सैयद मोदी की हत्या के लिए अपने साथी अखिलेश सिंह की मदद ली और उन्हें मारने के लिए भाड़े के हत्यारे भेजे थे. अदालत में संजय सिंह की तरफ से दिग्गज वकील रामजेठमलानी ने मोर्चा संभाला था और फिर इसी के बाद राजनीति, खेल और रिश्तों में उलझी हुई एक कानूनी जंग छिड़ गई थी.

 

सैयद मोदी मर्डर केस की जांच जब पूरी हुई तो कोर्ट में सीबीआई के तमाम दावों की धज्जियां उड़ गई थी. सीबीआई को पहला झटका उस वक्त लगा जब संजय सिंह और अमिता मोदी ने सीबीआई की चार्जशीट को ही अदालत में चुनौती दी और फिर इन दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत न होने की वजह से सेशंस कोर्ट ने सितंबर 1990 में संजय सिंह और अमिता मोदी का नाम इस केस से ही अलग कर दिया. 

 

सैयद मोदी हत्याकांड में सीबीआई को दूसरा झटका 1996 में लगा जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक और अहम आरोपी अखिलेश सिंह को इस मामले से बरी कर दिया. आरोपी जितेंद्र सिंह भी इस मामले से बेनेफिट ऑफ डाउट देकर रिहा कर दिया गया. इस केस के 7 में से चार आरोपी तो पहले ही रिहा हो गए और बाकी बचे अमर बहादुर सिंह का संदिग्ध हालत में मर्डर कर दिया गया और एक और आरोपी बलई सिंह की मौत हो गई. सैयद मोदी मर्डर के आखिरी आरोपी भगवती सिंह को लखनऊ के सेशन कोर्ट ने दोषी करार दिया औऱ उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 22 अगस्त 2009 को दिए अपने फैसले में अदालत ने सीबीआई की फांसी की सजा की मांग को ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि सीबीआई इस कत्ल का मोटिव पता लगाने में नाकाम रही है.

 

सैयद मोदी के मर्डर के 21 साल बाद अदालत ने आरोपी भगवती सिंह को उम्र कैद की सजा सुनाई लेकिन आज भी सैयद मोदी के कत्ल का मकसद एक राज ही बना हुआ है. इस हत्याकांड को हुए भी 26 साल गुजर गए है इस दौरान बहुत कुछ उलझा रह गया, बहुत सी बातें राज ही रह गई तो वहीं कई चीजें पूरे तौर पर साफ भी हो गईं.

 

पिछले छब्बीस साल के इस लंबे अर्से में अमेठी राजघराने के राजा संजय सिंह और अमिता मोदी की जिंदगी ने भी कई उतार–चढाव देखे हैं. 1990 में सैयद मोदी मर्डर केस से बरी होने के बाद साल 1995 में संजय सिंह ने अमिता मोदी से ब्याह रचा लिया था. लेकिन तब तक संजय सिंह और गरिमा सिंह के घर अनंत विक्रम सिंह के अलावा दो बेटियों महिमा सिंह और शैव्या सिंह का जन्म हो चुका था. ये तीनों बच्चे बाद में करीब 18 साल तक संजय सिंह के साथ ही उनके घर में रहे. कहा जाता है कि अमिता सिंह से शादी करने से पहले संजय सिंह ने अपनी पहली पत्नी गरिमा सिंह को तलाक दिया था जिसके बाद गरिमा सिंह राजमहल छोड़कर चली गई थी और लखनऊ में रहने लगी थी. लेकिन अब गरिमा सिंह और उनके तीनों बच्चे अमेठी राजघराने की विरासत पर अपना दावा ठोंक रहे हैं. उधर संजय सिंह का दावा कर रहे हैं कि गरिमा सिंह के साथ उनका तलाक हो चुका है जबकि गरिमा सिंह आज भी खुद को तलाकशुदा नहीं मानती हैं.

 

संजय सिंह उनकी अमिता सिंह और इन दोनों की बेटी. वो बेटी जिसका जन्म सैयद मोदी के कत्ल से दो महिने पहले हुआ था. इन तीनों का एक भरा-पूरा परिवार है और अब वो पुरानी कहानी भी अतीत का एक धुंधला हिस्सा बन कर रह गई हैं लेकिन पिछले दो महीनों से अमेठी राजघराने में संपत्ति को लेकर जो घमासान मचा है उसने राजघराने का सुकून और चैन एक बार फिर छीन लिया है. 

 

उन्नीस साल पहले गरिमा सिंह से अलग होने के बाद संजय सिंह के तीनों बच्चे उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह के साथ ही रहने लगे थे. 18 साल पहले इन बच्चों ने ही सौतेली मां का साथ देकर अपनी सगी मां गरिमा सिंह के लिए अमेठी राजमहल के दरवाजे बंद कर दिए थे लेकिन अब युवराज अनंत विक्रम सिंह का कहना है कि उस वक्त वो नासमझ थे और उन्हें उनकी मां गरिमा सिंह के खिलाफ भड़काया गया था. अपनी मां और पिता के बीच अलगाव के लिए अब वो खुल कर अपनी सौतेली मां अमिता सिंह को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन अमिता सिंह इन आरोपों को बेबुनियाद बताती हैं.

 

 

अमेठी राजघराने में छिड़ी इस जंग में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. संजय सिंह अपने बेटे अनंत विक्रम सिंह की समझदारी पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं लेकिन अमेठी में ये पूरी लड़ाई विरासत पर हक जताने के लिए लड़ी जा रही है. फिलहाल 75 कमरों वाले इस भूपति भवन पैलेस के सिर्फ दो कमरों पर अनंत विक्रम सिंह का कब्जा है और ये दो कमरे खुद संजय सिंह ने अपनी पहली पत्नी गरिमा सिंह और उनके बच्चों को दिए गए थे लेकिन पिछले दिनों इन दोनों कमरों का सामान बाहर फेंके जाने की खबर मिली थी जिसके बाद गरिमा सिंह अपने तीनों बच्चों को साथ लेकर यहां पहुंची थी इसको लेकर संजय सिंह का कहना है कि इन लोगों ने गलत तरीके से जबरन महल में घुसने की कोशिश की थी.

 

अमेठी राजघराने के इस शाही महल भूपति भवन पैलेस में कौन रहेगा और कौन यहां से बेदखल किया जाएगा ये फैसला होना अभी बाकी है लेकिन संजय सिंह के बेटे अनंत विक्रम सिंह ने फिलहाल अमेठी में ही डेरा डाल रखा है. मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ चुके अनंत विक्रम सिंह पिछले एक साल से अमेठी में अपनी राजनीतिक जमीन  भी मजबूत करने में जुटे हैं. अमेठी की राजनीति में बरसों से संजय सिंह और उनकी पत्नी अमिता सिंह की तूती बोलती रही है अमिता सिंह वरुण गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर से लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं जाहिर है राजघराने में छिड़ी संपत्ति की ये जंग अमेठी की राजनीतिक जमीन पर कब्जे के लिए भी लड़ी जा रही है और रिश्तों में उलझी शाही विरासत की ये लड़ाई अब खूनी रुप भी लेती जा रही है.  

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