कल का सुपरपावर मच्छर नहीं मार पा रहा है!

By: | Last Updated: Monday, 14 September 2015 4:40 PM
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नई दिल्ली: डेंगू का नाम सुनते ही डर लगने लगता है. डेंगू के मामले में दिल्ली में तो पिछले पांच साल का रिकॉर्ड टूट चुका है. लोगों के दिल में डेंगू का डर घर कर गया है. लेकिन क्यों हर साल हालात बद से बदतर होते जाते हैं. क्यों हर साल डेंगू की चपेट में आने के बाद इंतजाम किए जाते हैं. भारत आने वाले वक्त में सुपरपावर होने का दावा कर रहा है लेकिन भविष्य का सुपरपावर बनने वाला देश एक मच्छर नहीं मार पा रहा है.

 

हम डिजिटल इंडिया बनाएंगे, लेकिन डेंगू को कब भगाएंगे? हम देश में बुलेट ट्रेन दौड़ाएंगे लेकिन अस्तपताल में मरीजों को बेड कब दिलवाएंगे? हम देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाएंगे लेकिन हर साल एक मच्छर के काटने से होने वाली मौतों पर कब लगाम लगाएंगे?

 

इस बात में कोई शक नहीं है कि भारत दुनिया के नक्शे पर एक बहुत बड़ा बाजार बनकर उभर रहा है. हम विकास के रास्ते पर बहुत तेज दौड़ना चाहते हैं. और आगे बढ़ने के लिए जी तोड़ मेहनत भी कर रहे हैं लेकिन कल का सुपरपावर बनने वाला ये देश एक मच्छर नहीं मार पा रहा है. डेंगू ने ऐसा डंक मारा है कि राजधानी से लेकर देश के तमाम कोनों तक तस्वीर बदल कर रख दी है.

 

मरीजों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे हैं. हालत ये है कि एक बेड पर दो से तीन मरीज लेटे हुए हैं. ये देश की राजधानी दिल्ली की तस्वीर है जहां सरकारी अस्पताल में बेड नहीं मिला तो लोग फर्श पर इलाज कराने के लिए मजबूर हो गए.

 

अब जरा दिल्ली से सटे और उत्तरप्रदेश के नंबर एक कारोबारी शहर नोएडा के अस्पताल के हाल भी जान लीजिए. जहां अस्पताल की गैलरी और हॉल तक में बेड लगा दिए गए हैं लेकिन फिर भी पूरे नहीं पड़ रहे.

 

दिल्ली में तो पिछले पांच सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अब तक 1800 से ज्यादा डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं. दावे तो बड़े-बड़े होते हैं लेकिन सवाल ये है कि डेंगू कोई नई बीमारी तो है नहीं ये तो हर साल दस्तक देती है हर साल कई जानें लील जाती है फिर हम इससे निपटने के लिए कौन से पुख्ता इंतजाम करते हैं?

 

आर्थिक विकास की बात हो या फिर सैन्य ताकत की, भारत की तुलना चीन से की जाती है. डेंगू से जितने परेशान हम हैं उतना ही परेशान चीन भी है लेकिन चीन ने डेंगू से निपटने के लिए सिर्फ बेड बढ़ाने का इंतजाम नहीं किया है चीन ने तो डेंगू को जड़ से खत्म करने की तरफ अपना कदम बढ़ाया है.

 

डेंगू के लिए सुसाइड बॉम्बर

 

चीन डेंगू के लिए सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा है मतलब वो हथियार जो डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के घर में घुसकर हमला करेगा औऱ उसे जड़ से ही उखाड़ फेंकेगा.

 

100 देशों में मतलब करीब आधी दुनिया में डेंगू की चपेट में है. डेंगू इतना खतरनाक है कि मादा मच्छर एक बूंद पानी में भी अंडे दे सकती है और डेंगू का एक मच्छर एक दिन में 20 लोगों को संक्रमित कर सकता है.

 

चीन ने इससे निपटने के लिए Wolbachia बैक्टीरिया की मदद ली है. करीब 20 साल पहले इस बैक्टीरिया का इस्तेमाल मक्खी पर हुआ था जब तमाम बीमारियों के वायरस को अपने भीतर पालने वाली मक्खी में वॉलबैकिया वायरस को दाखिल किया गया तो उसने मक्खी में मौजूद सारे वायरस मार दिए थे.

 

SPECIAL REPORT: भविष्य का सुपरपावर देश एक मच्छर नहीं मार पा रहा?  

फिर जब डेंगू फैला तो यही फार्मूला याद आया. माना गया कि अगर मच्छर में भी उसी वॉलबैकिया बैक्टीरिया डाल दिया जाए तो वो डेंगू के वायरस को भी मार देगा. लेकिन इसमें कई अड़चनें थीं.

 

पहली समस्या

 

पहली मुसीबत तब सामने आई जब डेंगू वाले मच्छर के शरीर में इस वॉलबैकिया बैक्टीरिया को डाला गया तो मच्छर के शरीर ने बैक्टीरिया को ही मार दिया.वजह थी मच्छर की मजबूत प्रतिरोधक क्षमता. ऐसे में वैज्ञानिकों ने मच्छर से बैक्टीरिया को मारने वाली ताकत ही छीन ली ताकि मच्छर में बैक्टीरिया को जिंदा रखा जा सके. 

 

दूसरी समस्या

मच्छर में बैक्टीरिया जिंदा रखने का उपाय तो मिल गया लेकिन दूसरी बड़ी समस्या ये थी कि डेंगू फैलाने वाले हर मच्छर में ये बैक्टीरिया कैसे पहुंचे. इसका भी उपाय निकाला गया. मच्छरों की बजाए उसके अंडों में ही बैक्टीरिया डाल दिया गया. उन अंडों से पैदा होने वाले हर मच्छर में बैक्टीरिया मौजूद था और फिर अगली पीढ़ी के अंडों में भी. यानी अब डेंगू वाले मच्छर तो पनपे लेकिन उनमें मौजूद डेंगू का वायरस मारा गया.

 

अब ये नए मच्छर डेंगू नहीं फैला सकते थे. वैज्ञानिकों ने इन नए मच्छरों को वातावरण में छोड़ दिया और इनसे जो पीढ़ियां पैदा हुईं वो डेंगू से पूरी तरह मुक्त थीं. पहले परीक्षण के नतीजे भी चौंकाने वाले थे. ऑस्ट्रेलिया के दो कस्बों में डेंगू मुक्त मच्छर छोड़े गए और वहां 10 हफ्तों के भीतर डेंगू पूरी तरफ मिट चुका था.

 

ऑस्ट्रेलिया में 10 हफ्तों तक लगातार एक घर में एक हफ्ते में बैक्टीरिया वाले सिर्फ दस मच्छर छोड़े गए थे.

 

ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, ब्राजील और थाईलैंड में इस तरीके का प्रयोग हुआ और अच्छे नतीजे सामने आए तो चीन ने इसे अपना लिया. बड़ी बात ये है कि ऐसे बैक्टीरिया वाले मच्छर ना सिर्फ डेंगू खत्म करेंगे बल्कि मलेरिया को भी जड़ से खत्म कर देंगे.

 

चीन से मुकाबला ऐसी कोशिशों में भी करना होगा. लेकिन सवाल ये है कि हम कब ऐसी कोशिशें करना शुरू करेंगे. आखिर और कितना इंतजार करेंगे. क्योंकि जब स्वस्थ रहेंगे तभी तो आगे बढ़ेंगे.

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