ऑपरेशन गोरक्षा: गायों की तस्करी का 'गोल्डन रूट'!

By: | Last Updated: Tuesday, 20 October 2015 2:39 PM
full information on cow smuggling

नई दिल्ली: दिल्ली से सटे दादरी गांव में गोमांस खाने पर हुई अखलाक की हत्या ने देश का माहौल बदल दिया है. महज तीन हफ्ते पहले हुई इस घटना के बाद से गोरक्षा की मांग ने जोर पकड़ लिया है. भारत के 29 राज्यों में से 24 राज्यों में गोहत्या पर पाबंदी है लेकिन ये भी सच है गायों की तस्करी का गैरकानूनी धंधा लगातार जारी है.

 

हरियाणा में गो तस्करी पर बैन है. पुलिस भी गायों को बचाने में जुटी है लेकिन इसके बाजजूद गो तस्करी जारी है. गायों की तस्करी का ये कारोबार कैसे फल-फूल रहा है इसकी पड़ताल करने के लिए आपका न्यूज चैनल एबीपी न्यूज पहुंचा गुड़गांव?

 

यहां एबीपी न्यूज की मुलाकात स्वयं-भू गोरक्षा दल से हुई जो कानून हाथ में लेकर गायों की रक्षा में लगा है. आखिर कड़े कानून के बाद भी हरियाणा में गो तस्करी पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है?

 

गोरक्षा दल की तरफ से जारी की गई तस्वीरें गायों के साथ क्रूरता की कहानी खुद बता रही हैं. गायों को ट्रकों में ठूंस-ठूंसकर ले जाया जाया जाता है. गोरक्षा दल के लोगों का दावा है कि कई बार तो इन्हें बेहोशी की हालत में बोरियों में भरकर गाडियों में भर दिया जाता है. गोरक्षा के लिए मुहिम चलाने वाले धर्मेंद्र यादव ने एबीपी न्यूज को जो बताया वो चौंकाने वाला है. धर्मेंद्र यादव के मुताबिक पिछले तीन से चार महीनों में इन्होंने खुद डेढ़ सौ से दौ सौ गाड़ियों को गाय ले जाते हुए पकड़ा है.

 

गुड़गांव पुलिस के मुताबिक जब उन्हें इस तरह की कोई जानकारी मिलती है तो वो तुरंत मौके पर पहुंच कर कार्रवाई करती हैं. गोरक्षा दल का दावा है कि इनके लोग दिन-रात गायों को बचाने के लिए गुड़गांव और उसके आस-पास के इलाके में तैनात रहते हैं. कई बार तो इन्हें गो तस्करों की तरफ से होने वाले हमलों से भी दो-चार होना पड़ता है. गोरक्षा दल ने इसके लिए सबूत के रुप में एक वीडियो भी पेश किया जिसमें पुलिस ने उस ड्राइवर को पकड़ा है जिसने इन पर गाड़ी चढ़ा दी थी और जान से मारने की कोशिश की. ये घटना किस तारीख की है ये तो गोरक्षा दल के इस वीडियो में साफ नहीं हो पा रहा है लेकिन ड्राइवर अपना गुनाह जरूर कबूल रहा है.

 

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि राजस्थान और गुजरात से आने वाली इन ट्रकों को बीच में ही क्यों नहीं पकड़ा जाता है? सैकड़ों किलोमीटर बेरोकटोक सफर करने के बाद गुड़गांव में गो तस्करों की पोल खुलती है. क्या इसमें पुलिस प्रशासन की कोई मिली-भगत है? गायों की रक्षा में लगे धर्मेंद्र यादव के मुताबिक ये सारा खेल पुलिस से सेटिंग के बिना चल ही नहीं सकता है.

 

धमेंद्र यादव के इन आरोपों की पड़ताल के लिए एबीपी न्यूज गुड़गांव के एसपी हवा सिंह के पास पहुंचा. उन्होंने एबीपी न्यूज के सामने गो तस्करी के बात जरूर कही लेकिन पुलिस की भूमिका से साफ इनकार किया.

 

गुड़गांव पुलिस के मुताबिक उसने लोगों से भी अपील कर रखी है कि अगर गो तस्करी के बारे में उन्हें पता चलता है तो पुलिस को जरूर बताएं ताकि गायों को बचाया जा सके.

 

गुड़गांव पुलिस ने मेवात और राजस्थान की ओर से आने वाली गाड़ियों की पड़ताल के लिए एक स्पेशल टीम भी बना रखी है. ये टीम शक होने पर गाड़ियों को चेक भी करती हैं.

 

गुड़गांव हरियाणा राज्य में आता है और यहां गोतस्करी के लिए तीन साल की सजा का कानून भी है. लेकिन इसके बाद भी गो तस्करों के हौसले बुलंद हैं. यहीं वजह है कि राज्य सरकार ने 10 साल की कड़ी सजा का प्रावधान करते हुए नया कानून बनाया लेकिन वो अभी तक लागू नहीं हो सका है. गोरक्षा दल का दावा है कि उन्हें पिछले 1 साल में हरियाणा के 6 जिलों में करीब 20 हजार गायों को गो तस्करों के चंगुल ले छुड़ाने में कामयाबी मिली है. इन गायों को जिन जिलों में बचाया गया है वो हैं गुड़गांव, रेवाड़ी, पलवल, झज्जर, मेवात और नारनौल-महेंद्रगढ़.

 

गोरक्षा दल के मुताबिक गोतस्करी के सबसे ज्यादा मामले मेवात जिले में ही सामने आए हैं. हालांकि एबीपी न्यूज गोरक्षा दल के इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं करता है.

 

गोरक्षा दल का ये दावा भी है कि जिन ट्रकों में गायों को ले जाया जाता है वो ज्यादातर यूपी, राजस्थान और गुजरात की होती हैं. यूपी में गोहत्या पर बैन भी है लेकिन तस्वीरें बता रही हैं कि गो तस्करों कानून का डर ही नहीं हैं. सरकार और पुलिस प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी गोतस्करी पर नकेल नहीं कसी जा पा रही है.

 

 

अगर भारत सरकार के आंकड़ों की बात करें तो साल 2014-15 में करीब 17 लाख गोवंश से जुड़े जानवरों को तस्करी के जरिए बांग्लादेश पहुंचा दिया गया. अगर इसमें बकरियों को भी जोड़ दिया जाए तो इस साल 1 अप्रैल तक 21 लाख से ज्यादा चौपायों को बांग्लादेश पहुंचाया गया.

 

लेकिन सिर्फ भारत और बांग्लादेश सीमा ही नहीं भारत के राज्यों की सीमाओं पर भी हो रही है गोवंश यानी गाय भैंसों और बैलों की तस्करी.

 

आंकड़े बताते हैं कि साल 2014 में राजस्थान के रामगढ़ इलाके में गायों की तस्करी के करीब 180 मामले दर्ज हुए थे. लेकिन इस साल यानी साल 2015 के सात महीनों में ही 130 मामले दर्ज हो चुके हैं. यही नहीं हरियाणा में पिछले 6 जिलों में करीब 20 हजार गायों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: full information on cow smuggling
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: cow smuggling
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017