एक साल: बिजली के वायदे पर केजरीवाल पास या फेल?

By: | Last Updated: Monday, 8 February 2016 9:19 PM
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नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल का दूसरा बड़ा वादा – सस्ती बिजली. दिल्ली के पिछले दोनों चुनावों में वोटिंग से पहले ही जिस एक मुद्दे से केजरीवाल ने विरोधियों को काफी पीछे छोड़ दिया वो था बिजली बिल आधा करने का वादा. केजरीवाल ने बिजली बिल में 400 यूनिट तक 50 फीसदी की सब्सिडी यानि छूट दी. केजरीवाल ने वादा तो निभाया लेकिन अभी ये अधूरा है क्योंकि 400 यूनिट तक बिल तो आधे हुए लेकिन बिजली के रेट कम नहीं हुए.

दिल्ली के लिए सस्ती बिजली के इस वादे को अरविंद केजरीवाल की राजनीति की धुरी भी माना जाता है और केजरीवाल सरकार इसे अपनी सबसे बड़ी कामयाबी भी बताती है.

इसी नारे के बलबूते दिल्ली में दो बार सरकार बनाने वाले केजरीवाल ने 400 युनिट तक की बिजली की खपत करने वालों को सरकारी खजाने से पचास फीसदी की सब्सिडी का तोहफा दिया है यानी 400 यूनिट तक की बिजली के बिल सीधे आधे हो गए हैं. लेकिन बिजली के इन आधे बिलों का फायदा ना तो सबके लिए है और ना ही साल के हर महीने के लिए. यही है बिजली के बिल का सबसे बड़ा पेंच. इससे समझने के लिए दिल्ली की बिजली दरों और सरकारी सब्सिडी का हिसाब समझना होगा.

दिल्ली में फिलहाल घरेलू उपभोक्ता को 0 से 200 यूनिट के लिए 4 रुपये प्रति यूनिट
201 से 400 यूनिट के लिए 5 रुपये 95 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिल भरना होता है
400 यूनिट तक के खर्च पर सरकार 50 फीसदी सब्सिडी देती है यानी 200 यूनिट तक के लिए सिर्फ 2 रुपये प्रति यूनिट और 201 से 400 यूनिट तक की बिजली खपत के लिए 2 रुपये 97 पैसे की दर से ही बिल देना पड़ता है.

kejri1लेकिन अगर बिजली की खपत 401 यूनिट से ज्यादा हो गई तो सरकारी सब्सिडी नहीं मिलती और उपभोक्ता को पूरा बिल चुकाना होता है. और यहीं से दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को महंगे बिल का झटका लगना शुरू हो जाता है.

सब्सिडी का फायदा सिर्फ सर्दियों के 3-4 महीने में ही मिलता है लेकिन साल के बाकी 8 महीनों में भारी भरकम बिल चुकाना पड़ता है.

लेकिन दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री सतेंद्र जैन के मुताबिक उनके मुताबिक दिल्ली के 80 फीसदी उपभोक्ता पूरे साल सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं. जबकि सर्दियों में 95 फीसदी उपभोक्ताओं के बिल सब्सिडी के दायरे में पहुंच जाते हैं.

ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि ना तो बिजली की दरें कम हुईं ना पूरी दिल्ली को फायदा मिला. दरअसल कहा गया था कि बिजली वितरण कम्पनियों की सीएजी जांच पूरी होते ही बिजली के रेट आधे हो जाएंगे, फिर बिना सब्सिडी के ही सबके बिल हाफ हो जाएंगे. लेकिन CAG जाँच का मामला कोर्ट में लटक गया और बिजली की दरों में कोई कमी नहीं आई है.

केजरीवाल से कुछ कम ही सही सब्सिडी तो शीला दीक्षित भी देती थीं. मंहगी बिजली के रेट कम करने की जगह सब्सिडी देना दूसरे दरवाजे से निजी कंपनियों को ही फायदा पंहुचाना है. सब्सिडी से लोगों को काफी राहत तो मिलती है लेकिन दिल्ली में ही बड़ी संख्या में रहने वाले किराएदारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता. जाहिर है CAG से हो या DERC से या किसी भी और तरीके से बिजली के रेट कम किए बगैर केजरीवाल का ये वादा अधूरा ही माना जाएगा.

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