मां बेचती थी चाय और चंद सालों में ही बेटा बन गया 500 करोड़ का मालिक!

By: | Last Updated: Tuesday, 27 October 2015 2:50 PM
Full information on rail neer scam

नयी दिल्ली: राजधानी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, भारतीय रेल की शान मानी जाती हैं ये ट्रेन. ज्यादा पैसा देकर आप इन ट्रेनों से इसलिए सफर करते हैं जिससे न सिर्फ आपकी यात्रा सुखद रहे बल्कि आपके खाने-पीने के साथ यहां कोई खिलवाड़ न हो. पर आपको इन ट्रेन में जो बोतलबंद पानी मिला था उसके साथ खिलवाड़ हुआ.

 

ऑपरेशन रेल नीर: कैसे हुआ घोटाला? क्या है पूरा घोटाला?

 

कौन हैं वो कंपनियां जो रेल नीर की जगह आपको ट्रेन में देती थीं साधारण बोलत वाला पानी. आरके एसोसिएट्स नाम की कंपनी का रेलवे कैटरिंग का साम्राज्य चलता है. कैसे आरके एसोसिएट्स ने रेलवे कैटरिंग पर किया कब्जा?

 

पहले उन कंपनियों के बारे में आप जान जाइए जिन पर रेल नीर घोटाले का लगा है आरोप. 

M/s R K Associates & hoteliers

M/s Brindawan food products

M/s Sun Shine caterers

M/s Satyam Caterers pvt ltd

M/s P K Associates Pvt Ltd, Delhi

M/s Food World, Delhi

M/s Ambuj Hotel And Real Estates Delhi

जी हां 7 कंपनियों पर लगा है घोटाले का आरोप. रेलवे सूत्रों की मानें तो 7 में से 4 कंपनियां एक ही परिवार से है. चार की चार कंपनियां आर के एसोसिएट्स एंड होटेलियर्स की है. कहा जाता है कि रेलवे में छोटे से लेकर हर बड़ा अधिकारी आर के एसोसिएट्स के बारे में जानता है. आर के एसोसिएट्स के आधिकारिक बेवसाइट पर उसका दावा है कि वो रेलवे में तकरीबन 150 ट्रेनों की कैटरिंग करता है.

 

आपको बताते है कि आर के एसोसिएट्स कैसे बना रेलवे का कैटरिंग किंग?

M/s R K Associates & hoteliers की कंपनी के बारे में तफ्तीश करने पर एबीपी न्यूज को पता चला कि M/s R K Associates & hoteliers  के  डारेक्टर हैं शरण बिहारी अग्रावाल, सुषमा अग्रवाल, और प्रिया अग्रवाल. शरण बिहारी अग्रवाल ही इसके कर्ता धर्ता हैं इन दिनों रेल नीर घोटाला मामले में तिहाड़ जेल में हैं.

 

एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि M/s R K Associates & hoteliers छत्तीसगढ़ के दुर्ग के पते पर पंजीकृत है. कंपनी का पता है-  सत्यम शिवम सुंदरम, दीपक नगर दुर्ग, छत्तीसगढ़ . कंपनी का नाम M/s R K Associates & hoteliers शरण बिहारी अग्रवाल ने अपनी मां रत्ना कुमारी अग्रवाल के नाम पर रखा है. पिता का राम स्वरुप अग्रवाल है. जो मूलत छत्तीसगढ़ दुर्ग के ही रहने वाले है. कैटरिंग के व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि शरण बिहारी अग्रवाल की मां सबसे पहले दुर्ग स्टेशन के बाहर चाय का ठेला लगाती थीं. बाद में वो स्टेशन के अंदर स्टॉल लगाने लगीं. कारोबार आगे बढ़ा. परिवार ने M/s R K Associates & hoteliers के नाम से कंपनी बनाई. पहला काम मिला दिल्ली गोवा एक्सप्रेस में कैटरिंग का. इसके बाद अग्रवाल परिवार ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

 

रत्ना कुमारी अग्रवाल के नाम पर आर के एसोसिट्स बनी. रत्ना कुमारी के तीन बेटे हैं. शरण बिहारी अग्रवाल, विजय कुमार अग्रवाल, और अरुण अग्रवाल. शरण बिहारी अग्रवाल की कंपनी बनी आरके एसोसिएट्स और होटेलियर्स. विजय कुमार की कंपनी हुई सत्यम कैटरर्स और अरुण अग्रवाल की कंपनी हुई सनशाइन. शरण बिहारी अग्रवाल के दो बेटे हैं राहुल और अभिषेक अग्रवाल. इन दोनों के नाम है वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स. इन पांच लोगों का रेल नीर घोटाले की चार कंपनियों पर कब्जा है. रेलवे के 70 फीसदी कैटरिंग पर इस परिवार का कब्जा है.

 

अग्रवाल परिवार की कंपनियों की हकीकत का पता लगाने के लिए एबीपी न्यूज पहुंचा उन पतों पर जहां से अग्रवाल परिवार का चलता है रेलवे में कैटरिंग का कारोबार. 

 

दिल्ली का जंगपुरा. पता A-25 . एबीपी न्यूज ने पाया कि यहां  बाकायदा M/s R K Associates & hoteliers  के नाम से बोर्ड लगा है. दफ्तर के लोगों से जब कंपनी के बारे में सवाल किया गया तो कर्मचारियों ने कैमरा पर कुछ भी बात करने से मना कर दिया.

 

एबीपी न्यूज पहुंचा अब सत्यम कैटर्रस के पते पर. दिल्ली का जंगपुरा.  4th floor,118/7,  masjid road, jungpura – इस कंपनी के निदेशक मंडल में हैं विजय कुमार अग्रवाल. जी हां विजय कुमार अग्रवाल शरण बिहारी अग्रवाल के भाई हैं.

 

एबीपी न्यूज की टीम उस पते पर भी पहुंची. लेकिन वहीं एक परिवार फिलहाल रह रहा है. परिवार से हमने जब बात करनी चाही तो कैमरे पर तो उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन साल 2012 में मार्च के महीने में उन्होंने ये मकान खरीदा और उस समय जो प्लैट के मालिक थे वो फूलों का धंधा करते थे.

 

एबीपी न्यूज अब पहुंचा तीसरी कंपनी मेसर्स Brindawan food products के पते पर. बेवसाइट पर पता दर्ज है एन -22 जंगपुरा. कंपनी 2007 में बनी, इसके मैनेजमेंट में है राहुल और अभिषेक अग्रवाल. राहुल और अभिषेक शरण बिहारी अग्रवाल के बेटे हैं. इस पते पर जब एबीपी न्यूज पहुंचा तो घर वालों ने बात करने से साफ मना कर दिया. एबीपी न्यूज कंपनी का पक्ष जानना चाहता था लेकिन यहां कोई भी बात करने को तैयार नहीं हुआ. 

 

रेल नीर घोटाले के आरोप से घिरी चौथी कंपनी है सनशान कैटरर्स. इसके मालिक हैं अरुण अग्रवाल जो शरण बिहारी अग्रवाल के भाई हैं. इन तहकीकात में पता चला कि चार की चार कंपनियों का रजिस्टर्ड पता छत्तीसगढ़ के दुर्ग का है.

 

ये तो हुई बात रत्ना कुमारी और उनके तीन बेटो की और चार कंपनियों की. इन्ही कंपनियों पर सीबीआई का छापा भी पड़ा. इसके आलवा एबीपी न्यूज को मिली जानकारी और कागजात के मुताबिर रेलवे की केटरिंग में  उतरी रुप कैटर्र्स और सत्कार कैटर्रर भी इनके हैं. रुप कैटर्टर है तो प्रदीप और हेम्ंत अग्रवाल का लेकिन शरण बिहारी अग्रवाल भी उसके शेयर के मालिक है, और उसी तरह से शरण बिहारी और भाई हिस्सेदार है.

 

अब ज़रा ये समझिये की किसके पास कितनी कैटेरिंग है. 2014 के आंकड़ों के मुताबिक रेलवे के पास प्रीमियम और मेल और एक्सप्रेस ट्रेन मिला कर कुल 224 गाडियों की कैटरिंग है. जिनमे से 25 गांड़ियों की कैटरिंग आईआरसीटीसी खुद करती है. यानी बचे 199 गाड़ियां.

 

इसमें से आर के एसोसिएट्स के पास 23 मेल एक्सप्रेस है. सत्यम केटर्र के पास -20 मेल एक्सप्रेस है. ब्रिंदावन के पास  23 मेल एक्सप्रेस है. सनशाइन के पास .20 मेल एक्सप्रेस है. और रुप कैटर्रस के पास 17 मेल एक्सप्रेस है.

 

इसके आलावा पांचों को मिला कर तकरीबन 33 प्रीमियम ट्रेने हैं, जिनमें राजधानी शताब्दी और दूरंतो शामिल हैं. ( नोट ये आंकड़े 2014 के हैं ) यानी कुल 199 गाड़ियों में से  136..पर आर के का कब्जा है. आर के इस दावे की पुष्टि उसके अपने आधिकारिक बेवसाइट से भी होती जिसमें उसने 150 ट्रेन कैटरिंग के अनुभव की बात की है. अगर हम 136 गाड़ियों की कैटरिंग की ही बात मानें तो रेलवे की कैटरिंग का कुल 70 फीसदी हिस्सा, आर के और उसके परिवार के जिम्मे है.

 

आइए अब आपको बताते है कि रेलवे की केटरिंग पॉलिसी के ऐसे कौन से नियम है जिनकी वजह से आर के एसोसिएट्स बन गया है रेलवे का कैटरिंग किंग. छत्तीसगढ़ का कभी एक छोटा सा ठेकेदार शरण बिहारी अग्रवाल अब 500 करोड़ की संपत्ति का मालिक है. सीबीआई के छापों में हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है. सामने आ रहा है कि शरण बिहारी अग्रवाल और उसकी कंपनी आर के एसोसिएट्स रेलवे में ठेकों का काला खेल खेल रही थी. एक छोटे से ठेकेदार से लेकर रेलवे कैटरिंग का किंग बनने की कहानी शुरू हुई थी करीब साल 1999 में.

 

रेलवे में खान पान यानी केटरिग का जिम्मा पहले था, IRCTC के पास जो 1999 में बनी थी. लेकिन अकेले सभी ट्रेनो में खान पान की जिम्मेदारी नहीं सभंल पा रही रही थी, जिसकी वजह से IRCTC ने अपनी जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों को टेंडर के जरिए देना शुरु किया. उस समय कुछ एक ठेके आर के एसोसिएट को मिले. लेकिन 2004 के बाद इस कंपनी ने असल में फलना फूलना शुरु किया. और 2004 से 2009 के बीच इसको सबसे ज्यादा रेलवे का केटरिंग का काम मिला. जानकारों की माने तो सत्ता के गलियारों में आर के की दखल काफी मशहूर थी, दो पूर्व कैबिनेट मंत्रियों से भी इनकी जानपहचान थी.

 

यूपीए दो के कार्यकाल में आते ही रेल मंत्रालय ममता बनर्जी के हाथ आया और ममता 2010 में नई केटरिंग पॉलिसी लेकर आई.

 

इसके नियमों के मुताबिक IRCTC से कैटरिंग की जिम्मेदारी छीन ली गयी. और छीन कर फेज वाइज रेलवे के अलग अलग जोन को दे दिया गया. पालिसी बनाने का काम भी रेलवे बोर्ड को दे दिया गया. रेलवे बोर्ड ने जो पालिसी बनायीं उसमें. किसी भी बिज़नेस फर्म या कंपनी या आदमी को 10 प्रतिशत से ज्यादा का कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल सकता है, ये प्रावधान रखा.

 

 कैटरिंग के कॉन्ट्रैक्ट को पाने के लिए बिज़नस हाउस फर्म या ग्रुप के पास पिछला अनुभव होना चाहिए. पिछला अनुभव कॉन्ट्रैक्ट के 30 प्रतिशत वैल्यू का होना चाहिए. यानि अगर मान लीजिये 5 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट है, तो जो भी कंपनी इसके लिए आवेदन दे उसने पहले 1.5 करोड़ का काम किया होना चाहिए. पॉलिसी के मुताबिक किसी भी ट्रेन में मोबाइल कैटरिंग सर्विस के लिए आवेदन भरते समय देश भर में एक बेस किचन काम करता होना आवश्यक है. लेकिन जिस रूट में ट्रेन के लिए कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट भर रहा है, 6 महीने के भीतर उस रूट में बेस किचन बनाना भी ज़रूरी है.

 

हालांकि कैटरिंग पालिसी 2010 में ख़राब खाना देने पर जुर्माने का प्रावधान तो है, लेकिन पालिसी में कॉन्ट्रैक्ट रद्द किस बिनाह पर किया जायेगा इसके बारे में जोनल रेलवे को नियम बनाने को कहा गया है. रेलवे को जो कंपनी जितना अधिक लाइसेंस फीस कॉन्ट्रैक्ट की एवज़ में कोट करती उसी को कॉन्ट्रैक्ट मिलता. आर के एसोसिएट्स ने कैटरिंग पालिसी के इन सभी नियमों का तोड़ निकाल लिया. नियमों के मुताबिक  10 प्रतिशत से ज्यादा गाड़ी का कॉन्ट्रैक्ट एक बिज़नस कंपनी को नहीं मिल सकता था. इसलिए उसने अपने भाई और बेटों के फर्म के नाम पर कॉन्ट्रैक्ट टेंडर भरना शुरू कर दिया.

IRCTC ज़माने में आर के ने कई गाड़ियों का केटरिंग का काम कर रखा था, इसके पास बेस किचन मौज़ूद था. इसलिए नई कंपनी के नाम पर बेस किचन दिखने में आर के को  कोई दिक्कत नहीं होती थी. लेकिन बाकि कई कैटरर प्रतिस्पर्धा से इसलिए बाहर हो जाते थे कि उनके पास न तो पुराना अनुभव होता था और न ही बेस किचन. धीरे-धीरे रेलवे के करीब 70 फीसदी कैटरिंग का जिम्मा श्याम बिहारी अग्रवाल और उसकी बनाई कंपनियों के पास आ गया. फ़ूड चैन का भी उसको फायदा मिला.

 

इसके अलावा क्योंकि ख़राब खाने पर जुर्माना के अलावा कॉन्ट्रैक्ट रद्द का कोई प्रवधान था नहीं, जोन में वाइज अधिकारियों से साठ गांठ अच्छी थी, इसलिए ख़राब खाने की शिकायत के वाबजूद कभी भी इसका लाइसेंस रद्द होने की नौबत नहीं आई. आकड़ों के मुताबिक अकेले 1.1.2014 से 31.10.2014  यानि 10 महीने में बृंदावन फ़ूड प्रोडक्ट्स के खाने के 212 शिकायतें आई. आर के एसोसिएट्स की 138 शिकायतें आई, सनशाइन कैटेरेर्स की 114. सत्यम कैटेरेर्स की 68 और रूप कैटेरेर्स की 54 . लेकिन सभी में जुर्माना लगा कर और वार्निग दे कर छोड़ दिया गया.

 

रेलवे सूत्रों के मुताबिक रेलवे R K के साम्राज्य को तोड़ने के लिए रेलवे कुछ नहीं कर सकता क्योंकि R K कैटेरेर्स नियमों को तोड़ नहीं रहा, बल्कि कैटरिंग पॉलिसी की ही खामियों का फायदा उठा कर रेलवे कैटरिंग किंग बना है. इसके लिए रेलवे को पूरी पालिसी ही बदलने की ज़रुरत पड़ेगी. जिसकी समीक्षा के आदेश रेल मंत्री रेल नीर घोटाले के पर्दाफाश होने के बाद ही दे दिए हैं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Full information on rail neer scam
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: CBI Rail Neer scam Railway
First Published:

Related Stories

19 अगस्त को गोरखपुर में होंगे राहुल गांधी, खुद के लिए नहीं लेंगे एंबुलेंस और पुलिस
19 अगस्त को गोरखपुर में होंगे राहुल गांधी, खुद के लिए नहीं लेंगे एंबुलेंस और...

लखनऊ: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 19 अगस्त को यूपी के गोरखपुर जिले के दौरे पर रहेंगे. राहुल...

नेपाल से बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाढ़ का स्थायी समाधान: सीएम योगी
नेपाल से बातचीत के जरिए ही निकल सकता है बाढ़ का स्थायी समाधान: सीएम योगी

सिद्धार्थनगर/बलरामपुर/गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को...

पीएम मोदी ने की नेपाल के प्रधानमंत्री से बात, बाढ़ से निपटने में मदद की पेशकश की
पीएम मोदी ने की नेपाल के प्रधानमंत्री से बात, बाढ़ से निपटने में मदद की पेशकश...

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को नेपाल के अपने समकक्ष शेर बहादुर देउबा से...

एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें
एबीपी न्यूज पर दिनभर की बड़ी खबरें

1. डोकलाम विवाद के बीच पीएम नरेंद्र मोदी का चीन जाना तय हो गया है. ब्रिक्स देशों के सम्मेलन के लिए...

सरकार के रवैये से नाराज यूपी के शिक्षामित्रों ने फिर शुरू किया आंदोलन
सरकार के रवैये से नाराज यूपी के शिक्षामित्रों ने फिर शुरू किया आंदोलन

मथुरा: यूपी के शिक्षामित्र फिर से आंदोलन के रास्ते पर चल पड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद...

बाढ़ से रेलवे की चाल को लगा 'ग्रहण', सात दिनों में करीब 150 करोड़ का नुकसान
बाढ़ से रेलवे की चाल को लगा 'ग्रहण', सात दिनों में करीब 150 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली: असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में आई बाढ़ की वजह से भारतीय रेल को पिछले सात...

डोकलाम विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा- समाधान के लिए चीन के साथ करते रहेंगे बातचीत
डोकलाम विवाद पर विदेश मंत्रालय ने कहा- समाधान के लिए चीन के साथ करते रहेंगे...

नई दिल्ली: बॉर्डर पर चीन से तनातनी और नेपाल में आई बाढ़ को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने...

15 अगस्त को राष्ट्रगान नहीं गाने वाले मदरसों के खिलाफ होगी कार्रवाई, यूपी सरकार ने मंगवाए वीडियो
15 अगस्त को राष्ट्रगान नहीं गाने वाले मदरसों के खिलाफ होगी कार्रवाई, यूपी...

लखनऊ: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योगी सरकार ने राज्य के सभी मदरसों में राष्ट्रगान गाए जाने का...

ब्रिक्स सम्मेलन: तनातनी के बीच सितंबर के पहले हफ्ते में चीन जाएंगे पीएम मोदी
ब्रिक्स सम्मेलन: तनातनी के बीच सितंबर के पहले हफ्ते में चीन जाएंगे पीएम मोदी

नई दिल्ली: डोकलाम विवाद को लेकर चीन युद्ध का माहौल बना रहा है. इस तनाव के माहौल में पीएम नरेंद्र...

गोरखपुर ट्रेजडी: इलाहाबाद HC ने योगी सरकार से पूछा सवाल, बच्चों की मौत कैसे हुई ?
गोरखपुर ट्रेजडी: इलाहाबाद HC ने योगी सरकार से पूछा सवाल, बच्चों की मौत कैसे...

इलाहाबाद: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले की न्यायिक जांच की मांग को...

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017