FULL INFORMATION | व्यापम घोटाला | 55 केस, 2530 आरोपित, 1980 गिरफ्तार

By: | Last Updated: Monday, 6 July 2015 12:59 PM

नई दिल्ली: व्यापम घोटाले में 55 केस दर्ज किये गये हैं, जिनमें 2,530 लोग आरोपी हैं, इनमें से 1,980 गिरफ्तार हो चुके हैं और 550 फरार हैं. इतने सारे केसों की सुनवाई के लिए प्रदेश में 20 से ज्यादा कोर्ट बनाये गये हैं. 55 में से 28 मामले में एसटीएफ चार्जशीट दायर कर चुकी है. 27 मामले बचे हुए हैं. इन्ही मामलों की सुनवाई के लिए 20 कोर्ट बनाए गए. 55 केसों में से 16 केस जुलाई 2013 के पहले के हैं.

 

आरोपियों में यूपी, बिहार, एमपी, राजस्थान और महाराष्ट्र के लोग शामिल हैं. जुलाई 2013 में एसटीएफ को दी गई थी जांच.

 

परीक्षा जो व्यापम के जांच के दायरे में हैं –

पीएमटी (डाक्टरी)– 2012, 2013

प्री पीजी (डाक्टरी)– 2011, 2012, 2013

पुलिस में सिपाही भर्ती – 2012, 2013

परिवाहन आरक्षी भर्ती – 2012, 2013

फूड इंस्पेस्टर भर्ती – 2012, 2013

पुलिस सब इंस्पेक्टर – 2012, 2013

दुग्ध कर्मचारी – 2012

 

संविदा शिक्षकों की भर्ती (सबसे ज्यादा उम्मीदवार थे) इसमें 21 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे

वर्ग 2  – 2012

वर्ग 3 – 2012

 

व्यापम के शुरुआती कदम

 

दरअसल, 1982 से शुरू हुए व्यापम का काम प्रदेश के मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों के लिए प्रवेश परीक्षा कराना ही था. तब परीक्षाओं के मानदंड बड़े कड़े होते थे, इसलिए व्यापम की निष्पक्षता उन दिनों संदेह के परे थी. लेकिन 2008 में व्यापम से सरकारी नौकरियों की भर्तियां भी करायी जाने लगीं. शिक्षक, पुलिस कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर, फूड इंस्पेक्टर, वन रक्षक और जेल रक्षक सरीखी नौकरियों की परीक्षाएं भी व्यापम आयोजित करने लगा.

 

व्यापम की परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें 2009 से सामने आने लगी थीं वर्ष 2013 के बाद से तो इस घोटाले से जुड़ी खबरें लगातार सुर्खियों में हैं. 6 जुलाई, 2013 को प्री-मेडिकल टेस्ट में भाग ले रहे 20 परीक्षार्थी गिरफ्तार किये गये. इन पर दूसरे परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा देने का आरोप था.

 

उसी साल 12 जुलाई को इस मामले का मुख्य आरोपित जगदीश सागर पकड़ा गया और उसके पास से 317 परीक्षार्थियों की एक सूची बरामद हुई. इन गिरफ्तारियों से प्री-मेडिकल टेस्ट में बहुत बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हुआ.

 

एसटीएफ को सौंपी जांच

इस फर्जीवाड़े के सामने आने के कई साल पहले से राज्य के अनेक थानों में दूसरों की जगह परीक्षाएं देने के मामले दर्ज होते रहते थे, लेकिन सागर की गिरफ्तारी और उसके द्वारा पकड़े जाने से तीन साल पहले से 2013 तक 100-150 ‘एमबीबीएस डॉक्टर’ बनाने की बात स्वीकारने के बाद इस घपले की गंभीरता को देखते हुए 26 अगस्त, 2013 को जांच की जिम्मेवारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के नेतृत्व में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंप दी गयी. एसटीएफ मध्य प्रदेश पुलिस की एक इकाई है. 2012 में व्यापम् मे 23 लाख 74 हजार 5 सौ 45 छात्रा शामिल हुए थे. 2013 में व्यापम 10 लाख 38 हजार 33 छात्र शामिल हुए थे.

 

तब इस मामले को ‘पीएमटी घोटाला’ नाम दिया गया था और 2013 में अक्तूबर महीने में ही पहली चाजर्शीट इंदौर की एक अदालत में दायर कर दी गयी. इस चाजर्शीट में एसटीएफ ने कहा कि 438 परीक्षार्थियों ने अवैध रूप से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने की कोशिश की थी और भोपाल के व्यापम के अधिकारियों ने परीक्षाओं में बैठने की व्यवस्था में फेर-बदल किया था, ताकि व्यवस्थित रूप से धांधली की जा सके. एसटीएफ ने संदेश जताया था कि संदेहास्पद परीक्षार्थियों की संख्या 876 हो सकती है. अभियोग पत्र जमा करने से एक सप्ताह पूर्व व्यापम के परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी को गिरफ्तार कर लिया गया था.

 

नवंबर, 2013 में एसटीएफ ने पाया कि व्यापम के अधिकारियों ने राज्य की नौकरियों की पांच परीक्षाओं में धांधली की थी. आगामी महीनों में एसटीएफ ने सैकड़ों छात्रों, अभिभावकों और अधिकारियों पर परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया.

 

शुरू में जांच का दायरा संगठित रूप से प्री-मेडिकल टेस्ट में की जानेवाली धांधली था, जिसमें ऐसे इच्छुक छात्रों की खोज की जाती थी, जो 15-25 लाख रुपये देने के लिए तैयार हों और वैसे लोगों से संपर्क किया जाता था, जो पैसा देनेवाले छात्रों की मदद कर सकें. पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक वसूले जाते थे.

 

राजनेताओं की मिलीभगत

सबसे सनसनीखेज गिरफ्तारी मध्य प्रदेश के तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की थी. इस पूरे घपले में राजनेताओं की मिलीभगत के खुलासे की यह बड़ी शुरुआत थी.

 

राज्य में 2008-13 के बीच प्री-मेडिकल टेस्ट में फर्जी परीक्षार्थियों की जांच कर रही टीम ने पाया कि कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों, खाद्य निरीक्षकों, सिपाहियों और आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों की बहाली में भी खूब धांधली हुई है.

 

एसआइटी का गठन

एसटीएफ ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुधीर साही के नेतृत्व में नवंबर, 2014 तक इस मामले की जांच की. उसके बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया, जिसे एसटीएफ की निगरानी की जिम्मेवारी दी गयी. इस आदेश की पृष्ठभूमि में विपक्ष द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग करते हुए दायर की गयी याचिकाएं थीं, जिन्हें उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एसटीएफ राज्य सरकार की एजेंसी है, इसलिए उसकी विश्वसनीयता संदिग्ध है, क्योंकि इस मामले में बड़े राजनीतिक रसूख के लोग शामिल हैं.

 

उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश चंद्रेश भूषण को एसआइटी का अध्यक्ष बनाया गया, जो उस समय राज्य के उप-लोकायुक्त थे. इसके अन्य दो सदस्य केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के पूर्व विशेष महानिदेशक विजय रमन और नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर के पूर्व उपमहानिदेशक सीएलएम रेड्डी हैं. एसआइटी नियमित रूप से जांच की रिपोर्ट उच्च न्यायालय के समक्ष रखती है.

 

एक विवाद के बाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया था कि एसआइटी को स्वतंत्र रूप से जांच का अधिकार नहीं है और उसकी जिम्मेवारी एसटीएफ के जांच की निगरानी करना है. एसआइटी ने राज्य के राज्यपाल रामनरेश यादव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी थी, जिसे न्यायालय ने रद्द कर दिया था. इस निर्णय का आधार यह था कि राज्यपाल को ऐसी स्थिति में संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है. 24 फरवरी 2015 को राज्यपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है इसी मे उनके बेटे का भी नाम था जिनकी मौत हो गई है.

 

व्यापम घोटाले के रसूखदार आरोपी

लक्ष्मीकांत शर्मा : पूर्व तकनीकी शिक्षा मंत्री को कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों की बहाली परीक्षा में धांधली के आरोप में जेल भेजा गया है. उनके पूर्व विशेष अधिकारी ओपी शुक्ला और पूर्व सहायक सुधीर शर्मा भी जेल में हैं. शुक्ला पर व्यापम के निलंबित अधिकारियों- निदेशक और परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी तथा मुख्य सिस्टम्स विशेषज्ञ नितिन महिंद्रा से परीक्षार्थियों को पास कराने के एवज में 85 लाख रुपये लेने का आरोप है.

 

धनराज यादव : मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के पूर्व विशेष अधिकारी यादव पर पर व्यापम के निलंबित अधिकारियो से सांठगांठ कर बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को पास कराने का आरोप है.

 

आरके शिवहरे : उप पुलिस महानिरीक्षक रहे इस निलंबित आइपीएस अधिकारी पर पुलिस सब-इंस्पेक्टर परीक्षा में अवैध तरीके से परीक्षार्थियों को पास कराने का आरोप है. शिवहरे बेटी और दामाद पर धांधली कर पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल परीक्षा उत्तीर्ण करने का आरोप भी है.

 

रामनरेश यादव : मध्य प्रदेश के राज्यपाल यादव पर पांच लोगों से वनकर्मी बनाने के एवज में रिश्वत लेने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने संवैधानिक व्यवस्थाओं के आधार पर रद्द कर दिया.

भऱत मिश्रा – मध्य़प्रदेश कैडर की महिला आईपीएस का भाई है.

प्रेम चंद प्रसाद – सीएम के पूर्व निजी सहायक औप उकी बेटी

डॉ अजय शंकर मेहता – राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त

अमित पांडे – महिला आईएएस अधिकारी का पति

संजीव सक्सेना – कांग्रेस नेता

 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि शिवराज सिंह ने भर्तियां कराईं.

 

क्या हुआ?

कोर्ट, एसआईटी, एसटीएफ ने नकारा

जल संसाधन मंत्री उमा भारती

इन पर आरोप है कि 13 नामों की सिफारिश कीं

 

बहुत हुआ भ्रष्टाचार: घोटालों पर चुप क्यों हैं पीएम मोदी?

 

क्या हुआ?

एसआईटी को सबूत नहीं मिले, एफआईआर नहीं, जांच जारी

एमपी के पूर्व तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा

आरोप- मंत्री रहते बंगले से रैकेट चलता था. आठ केस दर्ज, 100 से ज्यादा लोगों की सिफारिश की.

 

क्या हुआ?

26 जून 2014 को गिरफ्तार

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Web Title: FULL INFORMATION: vyapam scam
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