अपने राष्ट्रपिता का सम्मान करना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Thursday, 16 April 2015 12:11 PM
Gandhi should not be insulted: SC

नई दिल्ली: “अपने राष्ट्रपिता का सम्मान करना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है. हमारे सिर्फ एक ही राष्ट्रपिता हैं. हम उनका अपमान कैसे कर सकते हैं.” ये टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने की है.

 

महात्मा गांधी को लेकर 21 साल पहले छपी एक कविता के मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की है.

 

‘गांधी माला भेटला होता’ यानी ‘मुझसे मिले गांधी’ नाम की जिस कविता के प्रकाशन को लेकर ये मामला है उसे 1984 में कवि वसंत दत्तात्रेय गुर्जर ने लिखा था. बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र कर्मचारी यूनियन की पत्रिका ने 1994 में इस कविता का प्रकाशन किया.

 

इस कविता में कथित तौर पर गांधीजी के बारे में अश्लील और आपत्तिजनक बातें लिखी गईं हैं. कविता के प्रकाशन को लेकर पत्रिका के संपादक और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र कर्मचारी यूनियन के महासचिव देवीदास तुलझापुरकर के खिलाफ पुणे में आईपीसी की धारा 292 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया. अश्लील सामग्री के प्रकाशन के लिए लगने वाली इस धारा के तहत 2 साल तक की सज़ा हो सकती है.

 

तुलझापुरकर ने इसी मुक़दमे को रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाई है. इस अर्ज़ी पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

 

इससे पहले 2010 में बॉम्बे हाई कोर्ट इस मुक़दमे को निरस्त करने से मना कर चुका है.

 

सुप्रीम कोर्ट में मामले को सुनने वाली बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस दीपक मिश्रा ने गुरुवार को ये भी कहा कि “जब बात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हो तो सार्वजनिक रूप से किस तरह की बात कही जा सकती है, इसे लेकर पैमाना सख्त होना चाहिए.”

 

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणियां इस आधार पर की हैं कि कविता में गांधीजी और उनके आदर्शों के बारे में अश्लील तरीके से लिखे जाने का आरोप है. राजनीतिक मामलों को लेकर ये टिप्पणी नहीं है.

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Web Title: Gandhi should not be insulted: SC
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