जब मोरारजी देसाई ने जताई ‘नकली’ गांधी पर आपत्ति..

By: | Last Updated: Tuesday, 26 August 2014 11:05 AM
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पुणे: फिल्म ‘गांधी’ बनाने वाले मशहूर ब्रितानी फिल्मकार रिचर्ड एटेनबरॉ के लिए चीजें उतनी आसान नहीं रही थीं. जब उन्होंने प्रसिद्ध आगा खां पैलेस में कस्तूरबा गांधी के अंतिम दिनों के फिल्मांकन के लिए अनुमति मांगी तो उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के विरोध का सामना करना पड़ा था.

 

इसे याद करते हुए, गांधी नेशनल मेमोरियल सोसाइटी :जीएनएमएस: ट्रस्ट की तत्कालीन सचिव और आगा खां पैलेस परिसर की संरक्षक शोभना रानाडे ने बताया, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई एक जाने-माने गांधीवादी थे. जब एटेनबरॉ की यूनिट ने पैलेस के परिसर में फिल्मांकन की अनुमति मांगी थी, तब मोरारजी देसाई जीएनएमएस के अध्यक्ष थे.

 

जिस क्षेत्र में फिल्मांकन की अनुमति मांगी गई थी, उसमें कस्तूरबा (महात्मा गांधी की पत्नी) की ‘समाधि’ भी थी.’’ गांधी की भूमिका एक ब्रितानी ‘बेन किंग्सले’ द्वारा निभाई जाने के विचार पर मोरारजी देसाई की आपत्ति का वर्णन करते हुए 90 वर्षीय रानाडे ने उनके हवाले से कहा, ‘‘हमें महात्मा का चित्रण करने के लिए एक ‘नकली’ गांधी की जरूरत क्यों है?’’ काफी सोच-विचार के बाद एटेनबरॉ को अनुमति दे दी गई थी.

 

उन्हें ऐतिहासिक आगा खां पैलेस में दस दिन की शूटिंग के दौरान ‘‘यह करें और यह न करें’’ की जानकारी दी गई थी. शहर के पूर्व में बाहरी क्षेत्र में स्थित यह महल स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गांधी को यरवदा जेल में मिली कैद का भी गवाह बना था.

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