SPECIAL: गंगा में कैसे चलेगा जहाज?

By: | Last Updated: Saturday, 12 July 2014 3:07 PM
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नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार देश को 1620 किलोमीटर लंबा सबसे बड़ा जलमार्ग देने की तैयारी कर रही है. आम बजट में वित्त मंत्री ने इस योजना के शुरू होने का एलान भी किया. सबसे खास बात ये है कि 1620 किलोमीटर का ये जलमार्ग गंगा नदी पर तैयार किया जाएगा. जो इलाहाबाद को पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक जोड़ेगा.

 

गंगोत्री में बर्फ से बूंद-बूंद निकलती हैं गंगा की धारा. लेकिन अलग-अलग नदियों का पानी लेकर यही धारा अपने विशालतम रूप में इलाहाबाद में नजर आती है.

 

इलाहाबाद पर है गंगा यमुना का संगम. इसके बाद जो धारा बनती है उस प्राकृतिक संसाधन का इस्तेमाल जल परिवहन के लिए करने की योजना बनाई जा रही है.

 

इलाहाबाद के अलावा गंगा के किनारे वाराणसी, पटना  जैसे शहर बसे हैं. गंगा अकेली ऐसी नदी है जिस पर परिवहन से करोड़ों लोग जुड़ सकते हैं. लेकिन इन तमाम बातों के बाद भी ये राह आसान नहीं रहने वाली.

 

सरकार ने गंगा में जहाज चलाने का फैसला तो किया है लेकिन क्या आसानी से ये काम हो पाएगा. एबीपी न्यूज की इस खास पड़ताल में देखिए कि गंगा में जहाज चलाने में क्या क्या दिक्कत आ सकती है.

 

गंगा की गाद

गंगा जब पहाड़ों से उतरती है तो साथ आते हैं पत्थरों के टुकड़े और रेता. ये सब गाद बनकर गंगा के साथ बहते हैं या तलहटी में बैठते जाते हैं और इनके चलते गंगा की धारा उथली होती जाती है. अगर गंगा में जहाज चलाने हैं तो सबसे पहले गंगा के तल को समतल बनाया जाना जरूरी है. जिसे ड्रेडजिंग कहा जाता है.

 

ड्रेडजिंग के तहत नदी की तलहटी में बैठी गाद या रेते को उठा कर धारा को गहरा किया जाता है. इसके बाद तहलटी को समतल बनाया जाता है ताकि चलने वाले जहाजों को दिक्कत ना हो. इसके बिना छोटी नाव तो चल सकती हैं लेकिन ज्यादा क्षमता वाले जहाज नहीं. इस पूरी प्रकिया के लिए किनारों को भी बराबर बनाया जाता है

 

प्रवाह की समस्या

सिर्फ इतनी ही समस्या नहीं है. किसी भी जहाज को चलने के लिए पानी की जरूरत होगी. गंगा का प्रवाह कई जगह ऐसा है जहां जहाज चलना मुश्किल है. ऐसे में गंगा को प्रवाह कैसे मिलेगा ये बड़ी चुनौती है? लेकिन केंद्रीय परिवहन मंत्री नीतीन गडकरी के मुताबिक इस समस्या का बैराज बनाकर इलाज किया जाएगा. यानी ये बैराज पानी रोकेंगे भी और जरूरत के वक्त पानी छोड़ेंगे भी.

 

 

पर्यावरण की समस्या

दिक्कत ये भी है कि नदियों में जहाज चलने पर नदियों का अपना परिस्थिति तंत्र गड़बड़ा सकता है. WWF  की एक रिपोर्ट के मुताबिक नदियों में जहाज चलने से अक्सर देखा गया है कि नई पैदा हुई मछलियां खत्म होने लगती हैं. क्योंकि वो जहाज से पैदा हुई लहरों को संभाल नहीं पातीं और ऐसे में लंबे वक्त में फायदा होने की बजाए नुकसान होने लगता है.

इसी तरह नदियों पर चलने वाले जहाज से लीक होता ईंधन या दुर्घटना के बाद नदियों में शामिल हुआ कचरा नदियों के तंत्र को बर्बाद कर सकता है.

 

धर्म की समस्या

गंगा नदी से जुड़े लोग गंगा की निर्मल और अविरल धारा की बात कहते रहे हैं. संत समाज गंगा पर बांध बनाए जाने के भी खिलाफ है लेकिन गंगा नदी पर बनते बैराजों को धर्म संगठनों की तरफ से विरोध झेलना पड़ सकता है.

 

कुल मिलाकर सरकार गंगा पर जहाज चलाने की तरफ बढ़ तो गई है लेकिन आने वाले दिनों में इस पूरी परियोजना को कई संगठनों की तरफ से विरोध झेलना पड़ सकता है जिसमें पर्यावरण से जुड़े संगठनों से लेकर धर्म से जुड़े लोग शामिल हैं.