पितृपक्ष में तीर्थयात्रियों के लिए तैयार गया

By: | Last Updated: Tuesday, 9 September 2014 3:40 AM
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गया: पूर्वजों के पिंडदान के लिए आने वाले श्रद्घालुओं के लिए बिहार का गया शहर पूरी तरह तैयार है. प्रशासन और गयापाल पंडा समाज की तरफ से गया में आने वाले लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है जबकि धर्मशाला, होटल, निजी आवास श्रद्घालुओं से भर गए हैं.

 

पितृपक्ष में एक पखवारे तक लगने वाले ‘पितृपक्ष मेला’ का उद्घाटन सोमवार शाम बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी करेंगे. भगवान विष्णु की नगरी ‘मोक्ष धाम’ गया पिंडदान के लिए देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए पूरी तरह तैयार है.

 

गया जिले के एक अधिकारी के मुताबिक यहां विष्णुपद मंदिर परिसर में बने भव्य पंडाल में प्रसिद्घ पितृपक्ष मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री करेंगे. इस वर्ष पितृपक्ष के मौके पर यहां सात लाख श्रद्घालुओं के आने की संभावना है.

 

गया में पिंड दान करने वाले लोगों के आने का सिलसिला जारी है. श्रद्घालुओं की संख्या को देखते हुए कई स्थानों पर खुले मैदान में तंबू लगाए गए हैं ताकि श्रद्घालु यहां रात गुजार सकें. एक पखवारे तक चलने वाले इस मेले में कर्मकांड का विधि-विधान कुछ अलग-अलग है.

 

श्रद्घालु एक दिन, तीन दिन, सात दिन, 15 दिन और 17 दिन तक का कर्मकांड करते हैं. कर्मकांड करने आने वाले श्रद्घालु यहां रहने के लिए तीन-चार महीने पूर्व से ही इसकी व्यवस्था कर चुके होते हैं.

 

गया के सभी होटल तीन महीने पूर्व ही आरक्षित किए जा चुके हैं. गया के होटल एसोसिएशन के सचिव संजय कुमार सिंह कहते हैं, “पूर्व में ऐसी स्थिति नहीं होती थी परंतु हाल के वर्षो में पितृपक्ष के दौरान आने वालों की संख्या में वृद्घि हुई है.

 

पहले लोग गया में रहकर कर्मकांड कर वापस चले जाते थे, लेकिन अब श्रद्घालु सुविधा पसंद कर रहे हैं. ऐसे में लोग पितृपक्ष के दो-तीन महीने पूर्व से ही होटल आरक्षित करा रहे हैं.”वह कहते हैं कि लोग गया से ज्यादा बोधगया में रहना पसंद कर रहे हैं.

 

इधर, जिला प्रशासन ने इस वर्ष पितृपक्ष के मौके पर 30 महाविद्यालयों और विद्यालयों तथा 429 पंडा आवासों को भी श्रद्घालुओं के रहने के लिए अनुमति दी है.

 

प्रशासन तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बस सेवा और स्वास्थ्य सेवा के बेहतर इंतजाम का दावा कर रही है. पूरे मेला क्षेत्र में दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर पुलिस शिविर लगाए गए हैं.

 

इस मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिला हुआ है.गयावाल पंडा समाज के महेश लाल कहते हैं, “तीर्थयात्रियों को धार्मिक कर्मकांड में दिनभर का समय लग जाता है. लोग थक जाते हैं.

 

ऐसे में तीर्थयात्री अपने परिवार के साथ आराम की तलाश करते हैं. पहले तीर्थयात्री अपने पुरोहितों के घर रहकर कर्मकांड पूरा करते थे परंतु अब लोग ज्यादा सुविधा खोजते हैं.

 

“गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निशांत कुमार तिवारी ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान मेला क्षेत्र को 38 मंडलों में बांटा गया है. हर मंडल के लिए जोनल दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जा रही है. पुलिस प्रशासन की ओर से 40 पुलिस शिविर बनाए जा रहे हैं. विष्णुपद मंदिर के पास अस्थायी पुलिस शिविर होगा. मेले की सुरक्षा को लेकर बनाए गए पुलिस शिविरों में कम से कम 20 पुलिस जवानों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी.”

 

मेले में देश-विदेश से लोग आते हैं. पिछले वर्ष भी इस मेले में आतंकी हमले की जानकारी खुफिया विभाग द्वारा दी गई थी. मेला क्षेत्र में बम निरोधी दस्ते को विशेष रूप से तैनात किया जाएगा.

 

उक्त मेला गया शहर, बोधगया सहित अन्य स्थानों में फैला होता है. हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है.

 

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को ‘पितृपक्ष’ या ‘महालय पक्ष’ कहा जाता है, जिसमें लोग अपने पुरखों का पिंडदान करते हैं. वैसे तो पिंडदान के लिए कई धार्मिक स्थान हैं, परंतु सबसे उपयुक्त स्थल बिहार का गया माना जाता है.

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