90 साल में 55 करोड़ पुस्तकें छाप चुकी गीता प्रेस का संकट गहराया, हड़ताल जारी

By: | Last Updated: Tuesday, 1 September 2015 6:47 AM
Geeta press controversy

नई दिल्ली : दुनिया भर में धर्म और अध्यात्म की किताबों को पहुंचाने वाले गीता प्रेस संकट का संकट गहराता जा रहा है. वेतन वृद्धि सहित अन्य मुद्दों पर प्रबंधन के साथ कर्मचारियों का सामंजस्य नहीं बैठ रहा है. बात यहां तक पहुंच चुकी है कि बीते माह आठ अगस्त से छपाई बंद है और कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने की बात कही है.

 

1923 में स्थापित गीता प्रेस से अब तक 55 करोड़ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. 11 भाषाओं में गीता प्रकाशित होती है. प्रेस के 92 साल के इतिहास में कर्मचारी आंदोलन की यह पहली घटना है. इस बीच गीता प्रेस के गतिरोध को दूर करने के लिए मंगलवार को उप श्रमायुक्त के साथ बैठक हुई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला.

 

सोशल मीडिया पर भी गीता प्रेस बचाने का अभियान चल रहा है. फेसबुक और ट्विटर पर ‘सेव गीता प्रेस’ हैशटैग ट्रेंड कर रहा है. गीता प्रेस से जुड़ी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने आर्थिक सहयोग की पेशकश की है. गीता प्रेस की किताबें खरीदकर उन्हें उपहार स्वरूप देने का आग्रह है. कई लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सांसद योगी आदित्यनाथ और विधायक डा.आरएमडी अग्रवाल को ट्वीट कर गीता प्रेस बचाने की गुहार लगा रहे हैं.

 

इस बीच गीताप्रेस प्रबंधन ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एक टीवी न्यूज चैनल में दिखाए गए समाचार ‘गीताप्रेस बंद होने के कगार पर’ भ्रामक व असत्य है. गीताप्रेस न तो बंद होने की स्थिति में है और न ही इसे बंद होने दिया जाएगा. प्रेस बंद नहीं हुआ है, केवल कर्मचारियों की हड़ताल के कारण काम बंद है.

 

यह है मामला

गीता प्रेस में कुल 525 कर्मचारी हैं, जिनमें 200 स्थायी हैं जबकि 325 ठेके पर काम करते हैं. समझौते के तहत प्रबंधन ने इस शर्त पर वेतन वृद्धि की हामी भरी कि कर्मचारी पिछले सभी विवाद समाप्त कर दें और पांच वर्ष तक कोई नई मांग न रखें.

 

इस शर्त के बाद कर्मचारियों ने सात अगस्त को कथित तौर पर सहायक प्रबंधक मेघ सिंह चौहान को धक्के देकर गेट से बाहर कर दिया. दूसरे दिन प्रबंधन ने 12 स्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और पांच संविदा कर्मचारियों को निकाल दिया. तब से कर्मचारी हड़ताल पर हैं.

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Web Title: Geeta press controversy
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