गूगूल ने डूडल बनाकर आंबेडकर को याद किया

By: | Last Updated: Tuesday, 14 April 2015 3:12 AM

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी गूगल ने आज भीमराव आंबेडकर की 124वीं जंयती पर डूडल बनाकर उन्हें श्रदांजलि दी है. गूगूल ने इस डूडल में बाबा साहेब आंबेडकर की एक तस्वीर का इस्तेमाल किया. इस तस्वीर के बैकग्राउंड में गूगल लिखा हुआ है.

 

आज देश भर में भीम राव आंबेडकर की जयंति को धूम धाम से मनाया जा रहा है. मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 में महार जाति के परिवार में पैदा हुए भीमराव को अपनी जाति के कारण बचपन से ही सामाजिक भेदभाव झेलना पड़ा. उनके मन में छूताछूत के लिए संघर्ष की नींव यहीं से पड़ी और आगे चलकर दलितों के मसीहा के रूप में इतिहास में दर्ज हुए.

 

महाराष्ट्र के अपने गांव अंबावडे को उन्होंने उपनाम के रूप में अपनाया और भीमराव आंबेडकर बन गए लंदन से कानून की पढ़ाई कर के लौटे भीमराव अंबेडकर बहिष्कृत हितकारिणी सभा का गठन किया और 1927 में छूताछूत के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन चलाया.

 

वो जाति व्यवस्था के खिलाफ थे. देश आजाद होने पर नेहरू सरकार में उन्हें देश का पहला कानून मंत्री बनाया गया. नया संविधान बनाने के लिए 29 अगस्त 1947 संविधान मसौदा समिति बनी तो बाबा साहब आंबेडर उसके अध्यक्ष बनाए गए.

 

1951 में संसद में अपने हिंदू कोड मसौदे को रोके जाने के विरोध में उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इस मसौदे मे उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में महिलाओं को भी पुरुषों की तरह समान अधिकार देने की बात थी.

 

14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपने करीब 8 लाख समर्थकों के साथ बाबा साहब आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपना लिया. दुनिया में ये धम्मचक्र परिवर्तन के नाम से जाना गया.

 

शिक्षित बनो, संगठित बनो,संघर्ष करो इस नारे से दलितों में नई चेतना फूंकने वाली इस शख्सियत ने 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली के अपने घर में आखिरी सांस ली. 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया.

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