बिना 'भगवान' के योग!

By: | Last Updated: Sunday, 21 September 2014 5:59 AM
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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में एक बेहद अलग तरह का योग शिविर चल रहा है. यह योग शिविर इसलिए अलग है क्योंकि ये ऐसा योग शिविर है जिसमें बताया जा रहा है कि योग और भगवान के बीच कोई कनेक्शन नहीं है. दुनिया के 140 देशों में आंदोलन की तरह चल रहे इस आधुनिक योग पद्धति का नाम है बिहार स्कूल ऑफ योगा.

 

बिहार स्कूल ऑफ योगा का मूलमंत्र यानी मुझे भगवान नहीं चाहिए. दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में जहां स्वामी निरंजनानंद योग को आधुनिकता के साथ जोड़कर लोगों तक पहुंचाने के लिए आए हैं.

 

त्यागराज स्टेडियम ठसाठस भरा है. बिना मीडिया की सुर्खियों में आए इस योग शिविर में इतनी भीड़ आखिर कैसे आ पहुंची? इस सवाल में छिपी है बिहार स्कूल ऑफ योगा की कामयाबी की कहानी-

 

दिल्ली के शिविर में भी बात शुरू होती है बिहार स्कूल ऑफ योग की उस दर्शन से जिसमें योग जीवन को संवारने का काम करता है ना कि परलोक को. इस योग विधा की दूसरा अहम सूत्र है योग कीजिए तो पूरा ना कि थोड़ा-थोड़ा.

 

स्वामी निरंजनानंद सरस्वती की बातें लोगों के दिलों में सीधे उतरती हैं. स्वामी निरंजनानंद बिहार स्कूल ऑफ योग का प्रचार प्रसार करने वाले गुरुओं की तीसरी पीढ़ी में आते हैं और उनका नाता है बिहार के मुंगेर जिले में गंगा किनारे बसे इस गंगा दर्शन आश्रम से. यह वही आश्रम है जहां से हुई थी बिहार स्कूल ऑफ योगा की शुरुआत.