कर्मचारी ही नहीं सरकार की भी होगी कमाई

By: | Last Updated: Friday, 20 November 2015 4:15 PM

नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल से सरकार का खर्च यदि बढ़ेगा. तो उसके लिए अतिरिक्त कमाई का भी रास्ता खुलेगा.

 

पहले बात सरकार के खर्च की. सरकार ने वीरवार को कहा कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने से 2016-17 के दौरान 1 लाख, 2 हजार, 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वैसे आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2016 से लागू होनी है. यानी चालू कारोबारी साल के पहले तीन महीने का खर्च जोड़ ले तो कुल रकम पहुंच जाएगी 1 लाख, 27 हजार, 625 करोड़ रुपये. अर्थशास्त्रियों के तेवर तीखे होंगे ही, क्योंकि उनकी चिंता है कि इतनी बड़ी रकम, सरकारी खजाने के घाटे पर असर डाल सकती है और हो सकता है कि कारोबारी साल 2016-17 मे सरकारी खजाने का घाटा 3.5 फीसदी के लक्ष्य को पार ना कर जाए.

 

चिंता की एक वजह ये है कि आयोग की सिफारिशों पर अमल से सरकारी खजाने पर जीडीपी के 0.68 फीसदी का बोझ बढ़ेगा. लेकिन खर्चा घटाने और वित्तीय मोर्चे पर अपनी स्थिति मजबूत करने के जुगत मे जुटी सरकार के लिए कुछ ऱाहत की भी खबर मिल सकती है जो घाटा बढ़ने की चिंता को कम कर सकती है. इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च की एक रिपोर्ट कहती है कि सरकार जितना खर्च करेगी, उसका एक हिस्सा वापस सरकारी खजाने में ही आ जाएगा. सबसे पहले तो इनकम टैक्स को ले लीजिए. पूरी रकम पर औसत 20 फीसदी की दर से इनकम टैक्स की बात करें तो यहां सरकार को कमाई होगी 25 हजार, 500 करोड़ रुपये. यानी कर्मचारियों के हाथ में बचेंगे, 1 लाख 2 हजार, 125 करोड़ रुपये.

 

दूसरी ओर आमदनी बढ़ने का मतलब, ज्यादा सामान की खरीद. इंडिया रेटिगं एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत कहते हैं कि आम तौर टैक्स के बाद बची कमाई का 60 फीसदी खपत में 40 प्रतिशत बचत में जाता है. इस हिसाब से खपत में इस्तेमाल होगी 61 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जो जीडीपी के 0.39 फीसदी के बराबर है. वहीं बचत के खाते में आएंगे 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जो जीडीपी के चौथाई फीसदी से कुछ अधिक है.

 

खपत माने सामान की बिक्री बढ़ेगी, यानी सरकार को मिलेगी ज्यादा एक्साइज ड्यूटी. दूसरी ओर बचत के जरिए स्रोत पर कर कटौती (TDS) होगी. इन दो मदों से कुल कमाई 40 हजार करोड़ रुपये से कुछ अधिक हो सकती है. अब केंद्र सरकार को टैक्स से जो कमाई होती है, उसका एक हिस्सा राज्यों को देना होता है. तय फॉर्मूले के मुताबिक राज्यों को हिस्सा देने के बाद केंद्र के खाते में बचेंगे करीब 21 हजार करोड़ रुपये.

 

वैसे इस फायदे को केवल रकम तक ही सीमित ना करें तो हम पाएंगे कि खपत से आर्थिक विकास का पहिया भी तेज घुमेगा. रिसर्च एजेंसी क्रिसिल की माने तो तो अगर 70 फीसदी रकम खपत में इस्तेमाल हो तो जीडीपी में 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, वहीं 50 फीसदी खपत होने पर ये बढ़ोतरी 0.3 प्रतिशत होगी. दूसरी ओर एजेंसी का अनुमान है कि तनख्वाह बढ़ने से कार और दुपहिया वाहनों की बिक्री 2016-17 में 4-5 प्रतिशत ज्यादा होगी, वहीं टीवी, फ्रिज औऱ वाशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री 1-1.5 फीसदी और बढ़ सकती है.

 

बिक्री बढ़ने के पीछे क्रिसिल ने ये तथ्य सामने रखा है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद 2009-10 और 2010-11 में कार और दुपहिया वाहनों की बिक्री 25-26 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री 2.5-3 प्रतिशत बढ़ी. अब इस तरह की बढ़ोतरी इस बार नहीं होने की वजह ये है कि छठे वेतन आयोग के बाद वेतन (भत्तों समेत) 35 फीसदी तक बढ़ा, वहीं इस बार ये सुझाव 23.5 फीसदी के ही करीब है. दूसरी ओर छठे वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल मे देरी के चलते दो साल का बकाया एक साथ मिला, वहीं इस बार बकाया बहुत ही मामूली होगी.

 

फिलहाल, खपत बढ़ने के पीछे एक दलील ये भी है कि केंद्र सरकार के बाद, राज्य सरकारों, स्थानीय शहरी निकाय और केंद्र व राज्य की सरकारी कम्पनियों के कर्मचारियों की भी तनख्वाह देर-सबेर बढ़ेगी. बकौल पंत, ऐसे कर्मचारियों की तादाद केंद्र सरकार (करीब 47 लाख) से चार गुना ज्यादा होगी. यानी सरकार के लिए कमाई के और ज्यादा मौके.

 

इंडिया रेटिंग्स और क्रिसिल दोनों की ही राय है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल से महंगाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला. क्योंकि लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा नहीं आने वाला, वहीं उपभोक्ता बाजार इस समय मंदा ही चल रहा है.

 

 

 

 

क्या है सिफारिश?

  • जस्टिस माथुर ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसके मुताबिक 16 फीसदी वेतन बढ़ाने की सिफारिश की गई है.

  • पेंशन के लिए 24 फीसदी बढ़ोत्तरी की सिफारिश की गई है. न्यूनतम सेलरी 18 हजार के लिए सिफारिश की गई है.

  • वेतन में सालाना 3 फीसदी बढोत्तरी की सिफारिश

  • भत्तों में 63 फीसदी बढ़ोत्तरी की सिफारिश

  • सभी को एक जैसा पेंशन देने की सिफारिश

  • ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दी गई है
  • 1लाख करोड़ रूपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा

 

  • 69 साल पहले साल 1946 में जो पहला वेतन आयोग था उसने 35 रुपए मूल वेतन तय किया था.

  • 1959 में दूसरे वेतन आयोग ने इसे बढ़ाकर 80 रुपए कर दिया

  • 1973 में मूल वेतन 260 रुपए पहुंचा

  • 1986 में चौथा वेतन आयोग ने 950 रुपए किया

  • आजादी के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी पांचवें वेतन आयोग ने की और मूल वेतन 3050 रुपए तय किया

  • जिसे छठे वेतन आयोग ने 2006 में बढ़ाकर 7,730 रुपए कर दिया था

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Good news: 7th pay commission report to be submitted
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017