आज मोदी सरकार देगी 'गुड न्यूज', सरकारी कर्मचारियों की बढ़ जाएगी 23% सैलरी!

By: | Last Updated: Thursday, 19 November 2015 2:42 AM

नई दिल्ली: आज गुड न्यूज आने वाली है क्योंकि आज सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने वाली है. ये खबर सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नहीं है. आयोग की सिफारिशें लागू हुईं तो केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन बढ़ने के बाद राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाएंगी. जो सरकारी नौकरी के लिए कोशिश कर रहे हैं वो बढ़ा हुआ वेतन जानना चाहेंगे और जो कॉरपोरेट जगत में हैं वो इस बार अपने वेतन की तुलना सरकारी कर्मचारी के वेतन से जरूर करेंगे.

 

तो हो जाइए तैयार. इंतजार की घड़ियां खत्म हो चुकी हैं. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों की लिस्ट पूरी हो चुकी है. सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट वित्त मंत्री अरुण जेटली को आज शाम 7.30 बजे सौंपी जाएगी. पीटीआई के मुताबिक वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों का वेतन 23 फीसदी बढ़ाने की सिफारिश की है.

 

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अगर ये सिफारिशें मंजूर हुई तो इन्हें एक महीने 10 दिन बाद यानि एक जनवरी 2016 से लागू भी कर दिया जाएगा. लेकिन बढ़ा हुए वेतन मिलने में अप्रैल तक का वक्त लग सकता है.

 

900 पन्नों की सातवें वेतन आयोग की ये रिपोर्ट मंजूर हुई तो केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारियों समेत पेंशन पाने वाले 56 लाख लोगों को बढ़े हुए वेतन का फायदा मिलेगा. इन एक करोड़ लोगों को सीधा फायदा मिलने के अलावा बाद में राज्य सरकारें भी इसे लागू करेंगी जैसा कि पहले होता रहा है.

 

फरवरी 2014 में लोकसबा चुनाव से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जस्टिस अशोक कुमार माथुर की अध्यक्षता में सातवें वेतन आयोग का गठन किया था.

 

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने की सिफारिश लागू करने पर केंद्र सरकार पर 25 हजार से 38 हजार करोड़ का बोझ बढ़ जाएगा.

 

सातवें वेतन आयोग की सिफारिश में सबसे बड़ी बात ये है कि वेतन में 15 फीसदी बढ़ोतरी के अलावा न्यूनतम मूल वेतन 15 हजार किए जाने के आसार हैं. अगर ये हुआ तो इसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे कर्मचारियों को मिलेगा.

69 साल पहले साल 1946 में जो पहला वेतन आयोग था उसने 35 रुपए मूल वेतन तय किया था.

1959 में दूसरे वेतन आयोग ने इसे बढ़ाकर 80 रुपए कर दिया

1973 में मूल वेतन 260 रुपए पहुंचा

1986 में चौथा वेतन आयोग ने 950 रुपए किया

आजादी के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी पांचवें वेतन आयोग ने की और मूल वेतन 3050 रुपए तय किया

जिसे छठे वेतन आयोग ने 2006 में बढ़ाकर 7,730 रुपए कर दिया था

अगर सातवें वेतन आयोग ने इसे 15 हजार किया तो सीधे दोगुना हो जाएगा.

 

खास बात ये है कि अगर पहले वेतन आयोग और सातवें वेतन आयोग की तुलना की जाए और मान लिया जाए इस बार 15 फीसदी वेतन बढ़ेगा तो बीते 70 साल में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 430 गुना इजाफा हो जाएगा.

 

खबरों के मुताबिक वेतन आयोग के सामने बड़े और छोटे कर्मचारियों के बीच वेतन के अंतर को संतुलित करने की भी चुनौती है. छोटे कर्मचारियों के खराब रवैये के पीछे तर्क ये दिया जाता है कि बड़े अफसरों से वेतन बहुत कम मिलने से छोटे कर्मचारियों में कुंठा की वजह से सरकारी कामकाज पर बुरा असर पड़ता है. और इसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है.

 

आजादी से पहले 1946 में पहले वेतन आयोग सबसे कम यानि एक चपरासी और सबसे ज्यादा एक आईएएस अफसर के मूल वेतन के बीच 41 गुना का अंतर था जो छठे वेतन आयोग तक आते-आते 12 गुना रह गया है.

 

माना जा रहा है कि सातवें वेतन आयोग के जरिए इस अंतर को और कम किया जा सकता है.

 

 

 

 

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