गूगल ने डूडल के जरिए मंडेला को किया सलाम

By: | Last Updated: Friday, 18 July 2014 1:56 PM
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नई दिल्ली: विशेष मौकों, अवसरों को अपने डूडल से प्रदर्शित करने के लिए लोकप्रिय विश्व के सबसे बड़े सर्च इंजन-गूगल ने शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति और रंगभेद के खिलाफ लड़ाई के सबसे बड़े पुरोधा नेल्सन मंडेला (मदीबा) को उनके 96वें जन्मदिवस पर अपने विशेष डूडल के माध्यम से श्रद्धांजलि दी.

 

इस कड़ी में डूडल को सात खंडों में विभक्त किया गया और हर खंड में इस कालजयी शांतिदूत के महान संदेश देखे जा सकते थे.

 

गूगल के डूडल पर शुक्रवार को सबसे पहले नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्तकर्ता शांतिदूत नेल्सन मंडेला की तस्वीर प्रदर्शित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. डूडल के दूसरे खंड में एक व्यक्ति को आड़े-तिरछे रास्तों पर चलते हुए दिखाया गया है. यह रास्ता एक अश्वेत गांव में जाकर रुकता है और वहां मंडेला की एक उक्ति-‘कोई भी जन्म से किसी अन्य व्यक्ति से उसके रंग, पृष्ठभूमि या धर्म को देखकर नफरत नहीं करता.’ दिखता है.

 

तीसरे खंड में भारत रत्न मंडेला की सूक्ति लिखी थी-“लोगों को नफरत करना सीखना चाहिए और अगर वे नफरत करना सीख सकते हैं, तो प्यार करना भी सीख सकते हैं क्योंकि मानव हृदय में प्रेम कहीं अधिक स्वाभाविक रूप से जन्म लेता है.”

 

डूडल के चौथे खंड में लिखा मंडेला का सुविचार था-“केवल हमारे जीवित रहने में ही जीवन के मायने नहीं हैं. हमारे जीवन का महत्व तो यह चीज निर्धारित करेगी कि हम किसी दूसरे के जीवन में क्या बदलाव लाए.”

 

पांचवें खंड में सर्वप्रथम शांति का प्रतीक चोंच में जैतून की टहनी दबाए एक श्वेत कबूतर दिखाया गया, जो मंडेला के अहिंसावादी रवैये का प्रतीक है. उसके बाद जेल की पृष्ठभूमि में मंडेला को एक किताब थामे दिखाया गया. साथ ही उसमें उनका विचार लिखा था-“शिक्षा ही वह शक्तिशाली हथियार है, जिससे दुनिया को बदला जा सकता है.”

 

इस खंड में जैसे-जैसे सुविचार के शब्द उकेरे जाते हैं, सलाखें अपने आप हटती चली जाती हैं. इससे यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि शिक्षा से मन का अंधेरा दूर होता है और व्यक्ति इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वह दुनिया को बदल सकता है. यह खंड जेल से मंडेला की रिहाई का भी प्रतीक है.

 

छठे खंड में पहले दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्र ध्वज और उसके बाद जनमानस को एकजुट होते दिखाया गया. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के रूप में मंडेला जनमानस को यह संबोधित करते दिखे-“स्वतंत्र होना, अपनी जंजीर को उतार देना मात्र नहीं है, बल्कि इस तरह का जीवन जीना है कि औरों का सम्मान और स्वतंत्रता बढ़े.”

 

सातवें एवं अंतिम खंड में पर चिर परिचित मुस्कान वाली मंडेला की एक तस्वीर दिखाई गई. तस्वीर पर उनका विचार लिखा था-“सबसे बड़े गर्व की बात कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठने में है.”

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