InDepth: सुप्रीम कोर्ट के जजों को क्यों आना पड़ा मीडिया के सामने? जानें क्या है पूरा मामला

InDepth: सुप्रीम कोर्ट के जजों को क्यों आना पड़ा मीडिया के सामने? जानें क्या है पूरा मामला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब जस्टिस गोगोई से पूछा गया कि क्या ये विवाद जज लोया की संदिग्ध मौत से जुड़ा है. इसके जवाब में जस्टिस गोगोई ने कहा- 'जी हां.'

By: | Updated: 13 Jan 2018 11:48 AM
Government speaks to the Chief Justice of India after four SC judges press confrence

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत के चार जज देश के सबसे बड़े जज की शिकायत करने के लिए मीडिया के सामने आए. चारों जजों ने सुप्रीम कोर्ट में प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाया. इस मामले पर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने आ गई हैं. कांग्रेस ने जहां इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए जस्टिस लोया की मौत की जांच की मांग की. वहीं बीजेपी ने इसे सुप्रीम कोर्ट का आंतरिक मामला बताते हुए कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया.


यह सुप्रीम कोर्ट का आंतरिक मामला, कांग्रेस ने गलत किया: संबित पात्रा
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ''यह सुप्रीम कोर्ट का आंतरिक मामला है, अटॉर्नी जनरल ने अपना बयान दिया है. इस पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए. न्यायपालिका पर राजनीति करना गलत है, कांग्रेस ने आज गलत किया. कांग्रेस अवसर ढूंढ रही है."'


कांग्रेस ने खुद को बेनकाब किया: संबित पात्रा
संबित पात्रा ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट के आंतरिक विषयों पर सड़क पर राजनीति करना गलत है. हमें आश्चर्य और दुख है कि कांग्रेस पार्टी जिसे चुनाव चुनाव दर मौका नहीं मिल रहा है ऐसे में इस तरह के मुद्दे पर राजनीति करके उन्होंने साबित कर दिया कि वो अवसर ढूंढ रहे हैं. कांग्रेस ने आज देश की जनता के सामने खुद को बेनकाब कर दिया.''


जज लोया की मौत की जांच SC के वरिष्ठ जज करें: राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''ये बहुत संवेदनशील मामला है, चार जजों ने जो मुद्दे उठाए हैं वो बहुत महत्वपूर्ण हैं. जजों ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है इस पर ध्यान देने की जरूरत है.'


इसके साथ ही राहुल गांधी  ने जस्टिस लोया की मौत का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि इस मामले की जांच वरिष्ठ जज से करानी चाहिए. हमारी न्याय प्रणाली पर पूरा देश भरोसा करता है, इसीलिए आज हम इस पर बयान जारी कर रहे हैं.


कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ''आज सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इसके साथ ही एक वो पत्र भी जारी किया जो उन्होंने चीफ जस्टिस को लिखा था. माननीय जजों की टिप्पणी बेहद परेशान करने वाली हैं. जजों की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का लोकतंत्र पर दूरगामी असर होगा.'' इसके साथ ही कांग्रेस ने जस्टिस लोया की मौत की जांच वरिष्ठतम जज से कराने की मांग की है.


कांग्रेस की बैठक में कौन कौन शामिल हुआ?
जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस विवाद पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के घर आज शाम बैठक हुई. इस बैठक में पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, अहमद पटेल, मोतीलाल बोरा, मनीष तिवारी, काग्रेस लीगल सेल के हेड विवेक तन्खा और काग्रेंस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला शामिल हुए.


जजों की चिंता से हम भी चिंतित: कांग्रेस की प्रारंभिक प्रक्रिया
इस मामले पर कांग्रेस ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जजों की चिंता से हम भी चिंतित हैं. कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने इस पूरे मामले को दुखद करार दिया तो वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कुछ भी गलत नहीं किया.


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सरकार ने सीजेआई से बात की
जानकारी के मुताबिक सरकार ने जजों के उठाए मुद्दे पर सरकार ने चीफ जस्टिस से बात कर चिंता जताई है. इससे पहले खबर आई थी कि सरकार ने जजों के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला बताया. सरकार ने कहा कि जज आपस में मुद्दे को सुलझा लेंगे. हालांकि जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने कानून मंत्री को बुलाकर बात की थी.


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प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में नंबर दो की हैसियत रखने वाले जस्टिस चलमेश्वर ने कहा, ''किसी भी देश खासकर हमारे देश और न्यायपालिका के लिए अभूतपूर्व हालात हैं, हमारे लिए ये खुशी की बात बिल्कुल नहीं है कि हमें ये प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ी. कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सही तरीके से काम नहीं कर रहा. ऐसी कई चीजें हुई हैं जो नहीं होनी चाहिए थीं. कई मौकों पर वरिष्ठ जज होने के नाते हमने चीफ जस्टिस को ये बताने की कोशिश की कि कई चीजें ठीक से नहीं हो रही हैं इसलिए सुधार के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. दुर्भाग्य से हमारी कोशिश नाकाम रही. हम सभी चार लोगों को लगता है कि अगर सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता बरकरार नहीं रहती है तो हमारे या किसी देश का लोकतंत्र नहीं बच सकता. किसी भी अच्छे लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका जरूरी है.''


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दुर्भाग्यवश हम चीफ जस्टिस को समझा नहीं सके: जस्टिस चलमेश्वर
जस्टिस जस्ती चलमेश्वर ने कहा, ''हमारी हर कोशिश नाकाम हो गई. आज सुबह भी एक खास मुद्दे को लेकर हम चार लोगों ने चीफ जस्टिस से मुलाकात की और उनसे निवेदन किया लेकिन दुर्भाग्यवश हम उन्हें ये नहीं समझा सकते कि हम सही हैं और कदम उठाने की जरूरत है. इसलिए देश के सामने अपनी बात रखने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं था. हम ये नहीं चाहते थे कि 20 साल बाद देश को कोई बुद्धिमान आदमी ये कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी. हमने इस संस्था की गरिमा और देशहित का ख्याल नहीं रखा.''


जज लोया की मौत के केस को लेकर छिड़ी जंग!
जस्टिस लोया की मौत की लेकर भी जजों में नाराजगी रही. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब जस्टिस गोगोई से पूछा गया कि क्या ये विवाद जज लोया की संदिग्ध मौत से जुड़ा है. इसके जवाब में जस्टिस गोगोई ने कहा- 'जी हां.'


15 जनवरी तक के लिए टली सुनवाई
आज जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस शांतनागौडर की बेंच ने जस्टिस लोया की मौत वाली याचिका पर सुनवाई की. बेंच ने इस मामले को 15 जनवरी तक के लिए टाल दिया है. बेंच ने कहा- ये एक बेहद गंभीर मसला है. पहले महाराष्ट्र के वकील राज्य सरकार से निर्देश लें. मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखना भी ज़रूरी है, हम मामले को दोबारा सोमवार को सुनेंगे. कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला और पत्रकार बी आर लोने की याचिकाओं पर दो से तीन मिनट तक सुनवाई चली.


क्या है जस्टिस लोया का पूरा मामला?
जज लोया की एक दिसंबर 2014 को नागपुर में दिल का दौरा पड़ने से उस समय मौत हो गई थी, जब वह अपनी एक सहकर्मी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए जा रहे थे. यह मामला तब सामने आया जब उनकी बहन ने भाई की मौत पर सवाल उठाए थे. बहन के सवाल उठाने के बाद मीडिया की खबरों में जज लोया की मौत और सोहराबुद्दीन केस से उनके जुड़े होने की परिस्थितियों पर संदेह जताया गया था. बॉम्बे लॉयर्स असोसिएशन ने भी 8 जनवरी को बंबई हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर जज लोया की मौत की जांच कराने की मांग की थी.


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गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और उनके सहयोगी तुलसीदास प्रजापति के नवंबर 2005 में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में पुलिसकर्मी समेत कुल 23 आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं. बाद में यह मामला सीबीआई को सौंपा गया और मुकदमे को मुंबई ट्रांसफर किया गया. जस्टिस लोया इसी मामले की सुनवाई कर रहे थे.

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