आंतक और तनाव बढ़ाने वाली थ्योरी पर काम कर रही है मोदी सरकार: गोविंदाचार्य

By: | Last Updated: Friday, 3 July 2015 6:23 AM
Govindacharya on modi government

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘डिजिटल इंडिया की शुरुआत कर दी है. पीएम का दावा है कि ‘डिजिटल इंडिया’ भारत की तस्वीर बदलने वाली योजना साबित होगी. लेकिन इसी बीच बीजेपी के पूर्व महासचिव और विचारक गोविंदाचार्य ने मोदी के इस विजन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

 

 

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में गोविंदाचार्य ने कहा है कि मोदी सरकार इस विजन के लिए जिस ‘ट्रिकल डाउन थ्योरी’ पर काम कर रही है वह दुनिया भर में रिजेक्ट हो चुकी है. दुनियाभर में इस थ्योरी की वजह से आतंक बढ़ा है, तनाव बढ़ा है, गैर-बराबरी बढ़ी, अपराध बढ़े हैं और इससे प्राकृतिक विध्वंस भी जबरदस्त हुआ है. ऐसे में भारत में यह थ्योरी कैसे सकारात्मक प्रभाव डालेगी ?

 

ट्रिकल डाउन थ्योरी को आतंक, तनाव, गैर-बराबरी एवं प्राकृतिक विध्वंस को बढ़ावा देने वाली थ्योरी करार देते हुए गोविंदाचार्य ने सीधे तौर पर मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि ‘मोदी सरकार इस ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को कॉरपोरेट के नजरिए से देख रही है और यह विजन आम आदमी की जरूरतों से मेल नहीं खा रहा है क्योंकि सरकार निवेशकों के साथ ट्यूनिंग कर रही है ना कि लोगों के साथ.’ गोविंदाचार्य का कहना है कि कि ‘मोदी सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं में भारी समझ की कमी है. ‘डिजिटल इंडिया’ के मंच पर जो चेहरे थे वही सरकार के दिलो-दिमाग में बसते हैं तो फिर आम आदमी की जरूरत और उसकी प्राथमिकता सरकार को कैसे नजर आएगी.’

 

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना को लॉन्च करते समय कहा था कि इससे 18 लाख नौकरियां मिलेंगी. लेकिन इस पर सवाल उठाते हुए गोविंदाचार्य ने कहा है कि  ‘इस विजन में हमारे देश के युवकों लायक काम कहां हैं? मोदी रोजगार की बात कर रहे हैं लेकिन टेक्नॉलॉजी ऐसी है कि सर्वर अगर बाहर है तो रोजगार यहां कैसे मिलेगा? यहां के लोग उस इंस्ट्रूमेंट का उपयोग कैसे करेंगे? उसे उपयोग करने का क्या उद्देश्य और क्या दिशा होगी? ये हमने अगर माहौल नहीं बनाया तो इस विजन का फायदा क्या होगा?’

 

गोविंदाचार्य का कहना है कि सिर्फ घोषणाएँ कर देने से कुछ नहीं होता है जबतक कि सरकार के पास अच्छी नीतियां ना हो. गोविंदाचार्य ने कहा है कि ‘देश में बेरोजगारी तो समस्या है ही लेकिन साथ ही लोगों की जो मूलभूत समस्याएं हैं सरकार उन पर ध्यान ना देकर ‘डिजिटल इंडिया’ में लगी है. मोदी स्मार्टसिटी, बुलेट ट्रेन और डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं लेकिन जिन 238 जिलों में पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक मिला है वहां लोगों की प्राथमिकता पीने का पानी है कुछ और नहीं.’

 

मोदी सरकार के बुलेट ट्रेन पर सवाल उठाते हुए गोविंदाचार्य ने कहा है कि जिस देश में ट्रेनों के अनारक्षित डिब्बों की इतनी बुरी हालत हो वहां पर सरकार की प्राथमिकता बुलटे ट्रेन कैसे हो सकती है ? यहां नीयत पर नहीं मगर नीतियों पर तो सवाल उठ रहे हैं.

 

सरकार पर सीधा हमला करते हुए गोविंदाचार्य ने कहा है कि ये साफ दिखाई पड़ता है कि मोदी सरकार ‘विदेश परस्त’ और ‘कॉर्पोरेट परस्त’ नीतियों पर चल रही है. हालांकि बातचीत के क्रम में गोविंदाचार्य ने कह भी स्वीकार किया है कि अटल बिहारी वाजयेपी की सरकार के दौरान भी अंधाधुंध वैश्वीकरण जारी था और देश में संकट की स्थिति थी, मगर आज स्थिति और भी बुरी है.

 

ललित गेट मसले पर बोलते हुए गोविंदाचार्य ने कहा है कि जिस तरह हवाला कांड के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने इस्तीफा दे दिया था उसी तरह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे को इस्तीफा दे देना चाहिए. गोविंदाचार्य ने कहा, ‘जब विवाद के बाद कोई इस्तीफा नहीं देता तो लोगों के बीच यह धारणा बन जाती है कि ये सत्ता से चिपके रहना चाहते हैं, इसलिए गद्दी नहीं छोड़ना चाहते. बीजेपी जनता से जो वादे कर चुकी है सरकार को लोग उसी मापदंड पर ही तौलेंगे. जनता से भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टोलरेंस’ का वादा किया था. जनता इसी आधार पर इन्हें तौलने वाली है.’

 

हाल ही में लाल कृष्ण  आडवाणी एक इंटरव्यू में कहा था कि वे आश्‍वस्‍त नहीं है कि देश में आपातकाल दोबारा नहीं लग सकता. इस पर गोविंदाचार्य ने कहा है कि ‘आपातकाल से पहले यह नारा लगा था ‘इंडिया इज इंदिरा’ और ‘इंदिरा इज इंडिया’. वर्तमान की स्थिति में भी कुछ हद तक ऐसा ही है. कोशिश भी कुछ वैसी ही है. आपातकाल की स्थित तब आती है जब मनुष्य को खुद को ‘मसीहा’ समझने लगता है. ‘मसीहा’ होने पर यह लगता है कि जो मैं कर रहा हूं जनता की भलाई उसी में हैं. आडवाणी ने ऐसा कहा है क्योंकि उन्होंने आपातकाल नजदीक से देखा है. आडवाणी के दिमाग में ये बातें आईं होंगी जब उन्होंने देखा होगा कि विपक्ष बहुत ‘कमजोर’, ‘साखहीन’ और ‘दागदार’ है, टीम की भावना के साथ काम नहीं हो रहा है और नेतृत्व सिर्फ अपना ‘प्रतिमा-मंडन’ करने लगा है.’

 

हालांकि गोविंदाचार्य ने माना है कि वर्तमान में आपातकाल लगाने पर जनता की तरफ से मुहतोड़ जवाब मिलेगा क्योंकि आज सोशल मीडिया के द्वारा बहुत तेजी से कम्युनिकेशन हो रहा है. अब देश आपातकाल से निपटने के लिए ज्यादा मजबूती से तैयार है.

 

क्या है ट्रिकल डाउन थ्योरी

आपको बता दें कि ‘ट्रिकल डाउन’ थ्योरी के मुताबिक़ बताया जाता रहा है कि इसके मुताबिक आर्थिक विकास से अमीरों की आय बढ़ेगी, तो गरीबों का भी फायदा होगा जो कि इस विकास की प्रक्रिया में सीधे तौर पर नहीं जुड़े हैं. लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 150 विकासशील देशों के अंदर कई दशकों तक अध्ययन करने के बाद यह मान लिया है कि अमीरों से गरीब तक पैसे के पहुंचने की ट्रिकल डाउन थ्योरी गलत है. इसी साल जारी एक रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा है कि इससे अमीर और अमीर होते जाते हैं और गरीब वहीं टिका रहता है.

 

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