फेसबुक, टिवटर, गूगल को हिदायत, ब्लू व्हेल के खिलाफ चलाएं जागरुकता अभियान

फेसबुक, टिवटर, गूगल को हिदायत, ब्लू व्हेल के खिलाफ चलाएं जागरुकता अभियान

मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फेसबुक और टिवटर जैसे सोशल साइट्स और गूगल जैसे सर्च इंजन पर जागरुकता अभियान कैसे चलाया जाएगा, ये उन कंपनियों पर निर्भर करता है. लेकिन कोशिश यही है कि यदि इन साइट्स पर ब्लू व्हेल के दुष्परिणामों के बारे में आगाह किया जाए.

By: | Updated: 11 Sep 2017 05:07 PM

नई दिल्ली: सूचना तकनीक मंत्रालय ने आत्महत्या के लिए उकसाने वाले गेम ब्लू व्हेल को खिलाफ फेसबुक, टिवटर और गूगल को जागरुकता अभियान चलाने की सलाह दी है. उधऱ, इस गेम को लेकर एक नयी परेशानी मोबाइल में उपलब्ध जानकारियो को पूरी तरह से मिटाने को लेकर हो सकती है.


मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फेसबुक और टिवटर जैसे सोशल साइट्स और गूगल जैसे सर्च इंजन पर जागरुकता अभियान कैसे चलाया जाएगा, ये उन कंपनियों पर निर्भर करता है. लेकिन कोशिश यही है कि यदि इन साइट्स पर ब्लू व्हेल के दुष्परिणामों के बारे में आगाह किया जाए. हालांकि एक आशंका ये भी है कि जागरुकता अभियान की वजह से लोगों में ब्लू व्हेल चैलेंज के बारे में जानने की इच्छा जगे और वो उसे विभिन्न माध्यमों पर ढ़ुंढ़ने की कोशिश करेंगे.


फिलहाल, ऐसी आशंका को खारिज करते हुए अधिकारियो ने कहा कि सरकार पहले ही इस गेम के लिंक को ब्लॉक करने के लिए गूगल इंडिया, याहू इंडिया, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प व इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म से इस गेम की लिंक को ब्लॉक करने का निर्देश दे रखा है. यही नहीं यहां इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि मिलते जुलते नाम वाले बेबसाइट पर नजर रखी जाए.


ब्लू व्हेल गेम एक तरह का इंटरनेट चैलेंज है जो रुस से शुरु होकर अब कई देशो में फैल चुका है. चैलेंज के तहत एडमिन खेल में भाग लेने वालों को 50 दिन की अवधि में तरह-तरह के टास्क सौंपता है. फिर खेल में भाग लेने वालों को टास्क पूरा करने के के बारे में वीडियो गेम के बेवसाइट पर डालना होता है. इन टास्क में विचित्र-विचित्र किस्म के काम करना जैसे सबसे प्रिये दोस्त को गाली सुनाना, रात में कब्रगाह जाना, हाथ पर ब्लेड से व्हेल की आकृति बनाना, ऊंची जगह पर एक पांव पर खड़ा होना, डरावनी फिल्में देखना वगैरह शामिल है. पूरे खेल का अंत भाग लेने वालों के आत्महत्य़ा के साथ होता है.


देश में इस खेल के कई मामले सामने आए है. जुलाई में तिरुवनंतपुरम और मुंबई में दो बालको ने ऊंची इमारत से कूद कर आत्महत्या कर ली तो अगस्त में पश्चिम बंगाल में दसवीं कक्षा के छात्र ने प्लास्टिक बैग में मुंह फंसा कर और केरल में फांसी लगाकर 22 साल के युवक ने जान दे दी. इस महीने की शुरुआत में मध्य प्रदेश के इंदौर में तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन के सामने कूद कर नौंवी कक्षा के छात्र ने आत्महत्या की. इन सभी मामलो की वजह ब्लू व्हेल चैलेंज बताया जा रहा है.


आत्महत्या के पहले
इस बीच, जांच अधिकारियो को आत्महत्या के कम से कम दो मामले में मोबाइल डाटा पूरी तरह से साफ मिला. आशंका है कि आत्महत्या के पहले एडमिन ने सब कुछ मिटा देने को निर्देश दिया हो. अधिकारियों की माने तो ऐसे में आत्महत्या की वजह ब्लू व्हेल चैलेंज साबित करने में खासी दिक्कत होगी. वैसे कुछ मामलो में मृतकों की परिजनों ने खुद ही जांच अधिकरियों को ब्लू व्हेल चैलेंज के बारे में बताया.


अब अधिकारियों की अभिभावकों को सलाह है कि वो अपने बच्चों और खास तौर पर तनावग्रस्त बच्चों पर नजर रखें. किसी भी तरह की अस्वाभाविक हरकतों जैसे अकेले-अकेले ज्यादा वक्त गुजारना, देर रात बिना बताए कहीं निकल जाना, शरीर पर जख्म उकेरने का पता चलने पर उचित कदम उठाएं.

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